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शनिवार, 09 अप्रैल, 2005 को 17:04 GMT तक के समाचार
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'मेरा काम है पूरी मेहनत करना'

आशीष नेहरा
भारत के तेज़ गेंदबाज़ आशीष मेहरा से ख़ास बातचीत.

सवाल- इस श्रृंखला में अब तक के प्रदर्शन से आप कितने संतुष्ट हैं?

आशीष - इस बार जिस तरह की विकटें भारत में देखने को मिली हैं, जिस पर 300 या उससे ज़्यादा बन रहे हैं, ऐसी विकटों पर अपनी गेंदबाज़ी से मैं काफ़ी ख़ुश हूँ.

सवाल - इस बार आप कुछ ज़्यादा रन दे रहे हैं. रनों को कम करने के लिए आप क्या कर रहे हैं? कोई रणनीति आपने बनाई है?

आशीष - अभी विशाखापट्टनम में मैंने कुछ ज़्यादा रन दिए हैं, उससे पहले मैच में मैंने 6 ओवरों में 21 रन दिए थे जो बाक़ी गेंदबाज़ों से कम थे. दुर्भाग्य से, सबको पिछला मैच ही याद रहता है, उससे पहले वाला मैच याद नहीं रहता.

अगर कोई बल्लेबाज़ एक मैच में 80 या 100 रन बनाता है और उसके बाद दो या तीन मैचों में कुछ नहीं करता, तो उससे कोई नहीं पूछता कि आपने पिछले मैच में रन क्यों नहीं बनाए? भारत में हमेशा ये सवाल गेंदबाज़ से ही पूछे जाते हैं. यहाँ चाहे 350 रन के मैच हों या 325 रन के मैच हो रहे हों, हर आदमी यही चाहता है कि गेंदबाज़ सर्कल में 6 ओवर डाले और फिर स्लौग 25 या 30 रन दे. ऐसा कैसे संभव है?

कोई गेंदबाज़ ज़्यादा रन देना नहीं चाहता लेकिन मेरा अपना ख़याल यह है कि अगर आपने 350 रनों के मैच में थोड़े ज़्यादा रन देकर भी 4 या 5 विकेट ले लिए तो आपने अपना काम पूरा कर दिया.

सवाल - भारतीय टीम के चयनकर्ताओं ने ऐसी विकटों पर एक दिवसीय मैचों में तीन तेज़ गेंदबाज़ों वाली टीम को उतारने का फैसला किया है. दो स्पिनरों को नहीं खिलाकर, तेज़ गेंदबाजों को टीम में रखने का फ़ैसला आप सही मानते हैं?

आशीष - विश्व कप के बाद हमने एशिया से बाहर ही नहीं, एशिया में भी जितने एक दिवसीय मैच खेले हैं, उनमें शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि तीन तेज़ गेंदबाज़ नहीं खेले हों. और हम अच्छा ही कर रहे हैं. फिर हमारे पास युवराज, सचिन और सहवाग तीन ऐसे खिलाड़ी हैं जो अच्छी स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं तो हमारे पास ये अच्छे विकल्प हैं, जो स्पिनर की कमी पूरी कर देते हैं.

सौरभ गांगुली के साथ आशीष नेहरा

सवाल - जब ज़हीर, इरफ़ान और आप, तीनों तेज़ गेंदबाज़, मैदान पर होते हैं तब कैसा तालमेल रहता है, आपके बीच? आप तीनों बाएँ हाथ के गेंदबाज़ हैं.

आशीष - भारतीय टीम इस मायने में अब पहले की तरह नहीं है. इस टीम में तेज़ या मध्यम तेज़ गेंदबाज़ी करने वाला कोई ऑल-राउंडर नहीं है- सभी स्पिनर ऑल राउंडर हैं. तीन तेज़ गेंदबाज़ हैं. यह तीन तेज़ गेंदबाज़ होने से ठीक रहता है क्योंकि हमें, ख़ासकर एक दिवसीय मैचों में स्लॉग में बॉलिंग करनी होती है.

पहले 15 ओवर हमें ही डालने होते हैं, तो काफ़ी अच्छा तालमेल रहता है और हमें थोड़ी आसानी भी होती है. इसलिए पिछले दो-तीन साल से हमारा प्रदर्शन काफ़ी अच्छा रहा है.

सवाल - इरफ़ान पठान पिछले कुछ दिनों से अच्छी फॉर्म में नहीं हैं. एक तेज़ गेंदबाज़ की नज़र से आप उनके वर्तमान फ़ॉर्म और प्रदर्शन को किस तरह आँकते हैं?

आशीष - कोई भी तेज़ गेंदबाज़ जब चोट ठीक होने के बाद मैदान पर लौटता है तब उसे फिर से पूरी तरह फिट होने में दो-तीन मैच लग जाते हैं. इरफ़ान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ लेकिन इसके पहले 6-8 महीने जो इरफ़ान ने खेला है, भारत के लिए, उन्होंने काफी अच्छा किया. मुझे उम्मीद है कि वह दोबारा वही प्रदर्शन करेंगे और उन्हें मौका मिला है तो अपना वही फॉर्म वापस पा लेने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.

सवाल - आपकी अपनी फ़िटनेस पर भी बार-बार सवाल उठते रहे हैं. अब आप पूरी तरह फ़िट हैं या नहीं?

आशीष – अभी तो बिल्कुल ठीक चल रहा है. मैं अच्छा महसूस कर रहा हूँ. हालाँकि मैंने टेस्ट मैच नहीं खेले, पर मैं टीम में था. उम्मीद यही है कि आगे भी फ़िट रहूँगा. यह मेरे हाथ में तो नहीं है, मेरा काम है पूरी मेहनत करना जो मैं इस उम्मीद के साथ पूरी लगन से कर रहा हूँ कि आगे भी फ़िट रहूँगा और मुझे विकेट मिलते रहेंगे.

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