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जमशेदपुर की कुछ दिलचस्प झलकियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के खिलाड़ी तो बहुत सोच-समझकर अपने भोजन का ऑर्डर देते हैं लेकिन पाकिस्तान के खिलाड़ी खाने का पूरा मज़ा ले रहे हैं. शाहिद अफ़रीदी को तरह-तरह का पास्ता लुभा रहा है तो कप्तान इंज़मामुल हक़ इडली और लच्छा पराठा के दीवाने हो गए हैं. हालाँकि दिन के भोजन में वह केवल चिकेन बर्गर खाकर उठ गए. यूनुस ख़ान को जमशेदपुर में बना पेशावरी खाना पसंद आया. पेशावरी कबाब, तंदूरी झींगा, दाल बुखारा और भरवा शिमला मिर्च- ये सब हैं यूनुस की पसंद. शोएब मलिक ने सब्ज़ बिरयानी और पीली दाल चाव से खाई. भारतीय खिलाड़ियों का ज़्यादा ज़ोर दाल-चावल पर है और कभी सब्ज़ी और चिकन भी. सचिन तेंदुलकर ने मुर्ग बिरयानी चाव से खाई. सौरभ गाँगुली का भी भोजन काफी सादा है हालाँकि ‘ग्रिल्ड फिश’ उन्हें पसंद आई. युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ़ ने कुल्फों और मटर पनीर से काम चलाया, जबकि मुरली कार्तिक शुद्ध शाकाहारी भोजन की तलाश में रहे. दानिश कनेरिया ने जमशेदपुर पहुँचते ही काली बारी में माँ काली का दर्शन किया लेकिन मंदिर में प्रवेश करने से पहले हाथ-पैर अच्छी तरह धोए और फिर परंपरागत रीति से पूजा-अर्चना की. लगता है, दानिश की प्रार्थना सुन ली गई और उन्हें एक दिवसीय टीम में जमशेदपुर में खेलने का मौक़ा मिला. दानिश ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाक़े में थोड़ी ख़रीददारी भी की. जब दानिश आभूषणों की एक दुकान में थे तब दुकान के बाहर कम से कम दो हज़ार लोग उन्हें देखने के लिए जमा हो गए थे. बड़ी मुश्किल से, भीड़ से बचते-बचाते दानिश कनेरिया वापस अपने होटल पहुँचे. पाकिस्तानी खिलाड़ियों को देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने तो ऐसी मुश्किल खड़ी की कि खिलाड़ी जुमे की नमाज़ मस्जिद में अदा ही नहीं कर पाए. स्थानीय मस्जिद में नमाज़ अदा करने पहुँचे पाकिस्तानी खिलाड़ियों को 5 मिनट के अंदर ही वापस अपने होटल लौटना पड़ा. हालाँकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं थी लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोग खिलाड़ियों को देखने के लिए जमा हुए कि उनपर क़ाबू पाना मुश्किल था और ऐसे में खिलाडियों ने होटल लौट जाने का फ़ैसला किया. चाचा ने साधी चुप्पी! हरे चोलानुमा कुर्ता पहने और सफेद टोपी लगाए सफेद दाढ़ी वाले पाकिस्तानी ‘चाचा’ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ओर से भारत में जनता के दूत बनकर आए हैं. चाचा जहाँ-जहाँ जाते हैं, वहीं लोग उन्हें घेर लेते हैं. कीनन स्टेडियम में भी मैच से एक दिन पहले जब चाचा पहुँचे तब स्थानीय पत्रकारों और स्टेडियम में काम करने वाले लोगों ने उन्हें घेर लिया. लेकिन चाचा किसी से बात करने को तैयार नहीं थे. चाचा की इस चुप्पी का कारण? चाचा बहुत दुखी हैं और चिंतित भी. बहुत टोका-टाकी के बाद चाचा बोले, "अब हम तीसरी हार बर्दाश्त नहीं कर पाएँगे." चाचा दिन रात अपनी टीम के लिए दुआ कर रहे हैं और चाचा के चाहने वाले जमशेदपुर के लोग उन्हें ख़ुश करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. |
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