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'शोएब की कमी ज़रूर महसूस होगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सिरीज़ पर अपने ज़माने के मशहूर पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ और रिवर्स स्विंग के जादूगर वक़ार युनूस की राय जानते हैं. जिन्हें पाकिस्तानी टीम का गेंदबाज़ी कोच बनाने का प्रस्ताव है. वकार: जब भारत-पाकिस्तान श्रृंखला की बात आती है तब ये कहना मुश्किल हो जाता है कि किसका पलड़ा भारी रहेगा. क्योंकि चाहे टीम मज़बूत हो या कमज़ोर, यह प्रेशर की गेम होती है लेकिन मैं इतना ज़रूर कहूँगा कि भारत की बैटिंग लाइन-अप काफी मज़बूत है और बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि होम-ग्राउंड पर वो किस तरह की विकेट बनाते हैं. हालाँकि भारतीय टीम पर भी दबाव होगा क्योंकि ‘होम टीम’ पर ज़्यादा दबाव होता है और ख़ासकर जब भारत-पाकिस्तान के बीच मुक़ाबले होते हैं. तब तो जो भी टीम अपने घर के मैदानों पर खेलती है वह ज़्यादा दबाव में रहती है. पाकिस्तान के जो तीन प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ है-शोएब अख़्तर, शब्बीर अहमद और उमर ग़ुल, खासकर शोएब, वो इस श्रृंखला में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, ऐसे में कितना मज़बूत समझते हैं आप अपनी टीम की तेज़ गेंदबाज़ी को? वकार:यह तो कमी ज़रूर है कि शोएब, शब्बीर और उमर ग़ुल टीम में नहीं है और इसका कुछ नुक़सान भी पाकिस्तान टीम को उठाना पड़ेगा. ये वो गेंदबाज़ हैं जो इस श्रृंखला में काफी प्रभावशाली साबित होते, इसलिए निश्चित रूप से नुक़सान तो है लेकिन जैसा कि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर देखा गया कि राणा नवीद उल हसन ने अच्छी गेंदबाज़ी की और ख़लील ने भी ठीक बॉलिंग की है.
वे इतने प्रभावशाली तो नहीं दिखे लेकिन ठीक-ठाक गेंदबाज़ी कर लेते हैं और मोहम्मद समी वापस आए हैं तो इतनी बुरी भी नहीं है पाकिस्तान की गेंदबाज़ी. अब सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि वो भारत में किस तरह की विकेट बनाते हैं. अगर वो सीमिंग विकेट देंगे तो शायद भारत का पलड़ा थोड़ा भारी हो. हाँलाकि जहाँ तक स्पिन गेंदबाज़ों का ताल्लुक़ है तो दानिश कानेरिया ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बहुत अच्छी गेंदबाज़ी की है. अरशद खाँ बहुत परिपक्व ऑफ़ स्पिनर हैं तो पाकिस्तान के पास भी इस श्रृंखला के लिए अच्छे विकल्प हैं. चाहे ख़लील हो चाहे राणा, जितने भी नौजवान खिलाड़ी जा रहे हैं, इससे बढ़िया अवसर नहीं मिलता, क्योंकि हरेक पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी का यह सपना होता है कि वो भारत के विरूद्ध खेले, तो बहुत ही बड़ा अवसर मिला है उन्हें जिसे वो गँवाना नहीं चाहेंगे. आपको बॉलिंग कोच बनाने की बात है. कोच के रूप में आप क्या-क्या करना चाहेंगे, क्या प्राथमिकताएँ होंगी और आपकी. और कितने दिनों के लिए आपको कोच बनाने की पेशकश की गई है? वकार:अभी तो कुछ भी पक्का नहीं है. मैंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को बताया है कि मैं कब तक उपलब्ध रहूँगा और अब मुझे उसके जवाब का इंतज़ार है. अगर वो मुझे सिर्फ इसी दौरे के लिए कोच बनाना चाहते हैं तब तो मेरे लिए और उनके लिए भी यह समय की बर्बादी होगी. इतने कम दिनों में कोच किसी भी खिलाड़ी को कुछ भी मदद नहीं कर सकता. हाँ, अगर लंबे अरसे के लिए मुझे कोच बनाया जाता है तो मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता ये होगी कि ये जो अतिरिक्त रन दिए जाते हैं, जो किसी भी टीम के लिए सबसे ज़्यादा चुभन पैदा करते हैं. उन्हें कम से कम किया जाए. फिर आजकल के दौर में क्योंकि एक दिवसीय मैच ज़्यादा हो गए हैं. इसलिए बल्लेबाज़ स्ट्रोक ज़्यादा खेलते हैं. मेरी कोशिश होगी की लाइन और लेंथ नियंत्रण में हो और बल्लेबाज़ों को कम से कम रन दिए जाएँ ताकि विकेट लेने के अवसर ज़्यादा से ज़्यादा मिलें. |
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