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'कड़ा मुक़ाबला होगा दोनों टीमों में' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आगामी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सिरीज़ पर क्या कहते हैं कि दुनिया के महान स्पिन गेंदबाजों मे से एक पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी. बिशन सिंह बेदी- पुरानी कहावत है, बोली मेरी मछली कितना पानी? अब यह तो मछली ही बता सकती हैं, बाहर से देखने वालों को अब कुछ ही दिनों बाद अंदाज़ हो जाएगा, लेकिन अगर हम दोनों टीमों की कमजोरियों और मजबूरियों की तुलना करें तो मेरा मानना है कि श्रृंखला में मुकाबला कड़ा होगा और काफी मजेदार क्रिकेट दर्शकों को देखने को मिलेगी. पाकिस्तानी टीम ऑस्ट्रेलिया का दौरा करके लौटी है और यह दौरा मुश्किल दौरा था. हालाँकि टीम श्रृंखला हारकर लौटी है लेकिन अगर निष्पक्ष तरीक़े से इस श्रृंखला का विश्लेषण किया जाए तो ऐसा लगता है कि पाकिस्तान टीम को कमजोर नहीं आँकना चाहिए. उसके इरादे काफी दृढ होंगे और भारतीय टीम को चौकस रहना ज़रूरी है क्योंकि उन्होंने सिर्फ बाँग्लादेश का दौरा किया है और पिछली श्रृंखला में मिली जीत को अब इतिहास का पन्ना बन चुकी है. हमें अजीत में नहीं, वर्तमान में जीना होगा. भारतीय टीम को जीत हासिल करने के लि पूरी ताकत लगानी होगी. पाकिस्तानी टीम में खिलाड़ियों के बीच कुछ मतभेद रहे हैं और उनकी फिटनेस की भी समस्या है. शोएब अख़्तर फिट नहीं हैं, मोहम्मद समी फिट नहीं हैं और इंज़माम भी फिट नहीं हैं. ऐसे में भारत का पलड़ा भारी रहने की उम्मीद है क्या? बिशन सिंह बेदी- मुझे लगता है कि हमें उनके कैंप के बारे में बहुत सोचने की ज़रूरत नहीं है, हमें अपना घर सँवारना है. इसमें कोई शक नहीं उनके खिलाड़ी घायल हैं. लेकिन घायल तो हमारे खिलाड़ी भी हैं. फिटनेस की समस्या तो हमारी टीम में भी है और फिर हमारे फ़िज़ियों एंड्रू लीपस भी हमारे टीमें में नहीं हैं, अब टीम में एक नया फ़िज़ीकल ट्रेनर आया है और बच्चों की जो फिटनेस लेवेल है, उसका दुरूस्त होना बहुत ज़रूरी है. मेरा मानना है कि दोनों टीमों में कोई ख़ास अंतर नहीं है. 19-21 का फर्क है. इसलिए जिस टीम के खिलाड़ी लगातार फिट रहते हैं और घायल होकर मैदान के बाहर बैठने पर मजबूर नहीं होते, वही टीम जीतेगी. पिछले साल जब भारत ने पाकिस्तान को पाकिस्तान में हराया था, उस समय की टीमों और आज की टीमों में आपको क्या फर्क नज़र आता है?
बिशन सिंह बेदी- दोनों टीमें बराबर की है. ज़्यादा फर्क नहीं है. पाकिस्तानी टीम को हल्का नहीं आँकना चाहिए. वह दृढ इरादे के साथ आएगी. ख़ासकर जब पाकिस्तान, भारत के साथ खेलता है, तब उसके खिलाड़ियों के हौसले काफी बुलंद होते हैं. और फिर, पिछली श्रृंखला में उनकी हार हुई थी, इसलिए वो आएँगे अपना हिसाब बराबर करने के लिए, तो भारतीय टीम को अपनी पूरी शक्ति चाहिए, पूरी ताक़त लगानी पड़ेगी. सचिन का खेलना बहुत ज़रूरी है क्योंकि, उनके मैदान पर खड़े होने से ही टीम को एक मनौवैज्ञानिक लाभ मिल जाता है. लेकिन उसके कंधों पर बेवजह भार देना भी उचित नहीं है. उसे अपनी 'नैचुरल गेम' खेलने का मौका दिया जाना चाहिए. उसे अपनी स्थिति का ख़ुद अंदाजा होगा. उसपर बोझ नहीं डाला जाए. पाकिस्तानी खिलाड़ियों को कुंबले के सामने बड़ी मुश्किल होती है, क्या समझते हैं आप, क्या इस बार भी कुंबले का जादू चलेगा? बिशन सिंह बेदीः 'इंशा अल्लाह' मैं उम्मीद करता हूँ. कुंबले में मैद जिताने की क्षमता है और मेरी समझ में सचिन तेंदुलकर के बाद, भारत में, वास्तव में अगर कोई महान खिलाड़ी है तो वह अनिल कुम्बले है. उसे सफलता ज़रूर मिलेगी. |
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