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मंगलवार, 15 फ़रवरी, 2005 को 12:09 GMT तक के समाचार
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'मानसिक रूप से भारत की स्थिति बेहतर'

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क़ादिर मानते हैं कि पाकिस्तान में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद मनोवैज्ञानिक तौर पर लाभ भारत को मिलेगा
पाकिस्तानी के पूर्व टेस्ट खिलाड़ी अब्दुल क़ादिर मानते हैं कि मनोवैज्ञानिक तौर पर लाभ भारत को इसलिए मिलेगा क्योंकि पिछले साल पाकिस्तान में उसका ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा.

पाकिस्तान में भारत ने पाकिस्तान को टेस्ट श्रृंखला में हराया और एक दिवसीय श्रृंखला में भी मात दी और क़ादिर मानते हैं कि इसलिए मानसिक रूप से भारत की स्थिति बेहतर होगी.

उनका कहना है कि पाकिस्तान टीम को जो नुकसान नज़र आ रहा है, उसकी वजह हैं शोएब अख़्तर.

वे कहते हैं कि फ़िलहाल ये पता नहीं शोएब अख्तर भारत के दौरे पर जा पाते हैं या नहीं लेकिन उनके हिस्सा लेने से काफ़ी फ़र्क पड़ सकता है.

अब्दुल क़ादिर मानते हैं कि एक और दृष्टि से भारत का पलड़ा भारी दिखता है और वह ये कि भारत के पास दो परिपक्व और अनुभवी स्पिन गेंदबाज़ हैं - कुंबले और हरभजन.

वे कहते हैं, "दूसरी ओर पाकिस्तान के पास हैं लेग स्पिनर दानिश कनेरिया. अब एक बनाम दो है मुक़ाबला और वह भी स्पिनिंग विकेट्स पर. हो सकता है कि पाकिस्तानी टीम में ऑफ स्पिनर अरशद ख़ाँ को शामिल कर लिया जाए जिन्होंने ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कई अच्छे मैच खेले हैं."

उनका कहना है कि पाकिस्तान को बल्लेबाज़ी में भी तीसरे स्थान तक काफ़ी मुश्किलें हैं लेकिन भारत की नम्बर तीन पोजिशन पाकिस्तान से कहीं ज़्यादा मज़बूत है.

वे कहते हैं कि जहाँ तक मध्यमक्रम का सवाल है, पाकिस्तान का मध्यक्रम इंज़माम और यूहाना की वज़ह से काफ़ी मजबूत लगता है, लेकिन उसके मुक़ाबले में भारत का मध्यक्रम भी कुछ कम नहीं है.

क़ादिर का कहना है कि निचले क्रम की ओर नज़र डालें तो वहाँ पाकिस्तान के टेलएन्डर्स बेहतर नज़र आते हैं. निचले क्रम में रज़्ज़ाक आ जाते हैं, उनके बाद विकेटकीपर और फिर शाहिद आफ़रीदी आ जाएंगे. इस तरह पाकिस्तानी बल्लेबाज़ी का निचला क्रम, भारत की अपेक्षा कहीं ज़्यादा मजबूत है.

अपने ज़माने के लेग-स्पिन बादशाह क़ादिर कहते हैं कि यदि तेज़ गेंदबाज़ी के क्षेत्र में तुलना करें तो इरफ़ान पठान ने बहुत ही उम्दा बॉलिंग की है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. नेहरा भी काफी अनुभवी हो चुके हैं.

वे कहते हैं कि ज़हीर ख़ाँ भी काफी अनुभवी हैं लेकिन दुर्भाग्यवश पिछले एक साल से वह अच्छी गेंदबाज़ी नहीं कर रहे हैं पर चूँकि अनुभव उनके पास है, इसलिए संभव है कि वो इस श्रृंखला में दोबारा अपने फ़ार्म में लौटें.

अब्दुल क़ादिर इस फ़ैसले पर पहुँचते हैं, "इस तरह भारत के पास अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ हैं तो पाकिस्तान के पास नए, अनुभव की कमी वाले तेज़ गेंदबाज़. हमारे पास नवीदुल हसन और खलील भी हैं. लेकिन इन सबके पास अनुभव नहीं है. इन सब हकीकतों को देखते हुए ऐसा लगता है कि भारत को बहुत ज़्यादा लाभ मिलेगा, अपने देश में खेलने का और फिर टीम बेशक, बहुत अनुभवी और मज़बूत भी है."

गंभीर आरोप लगाते हुए अब्दुल क़ादिर कहते हैं, "हमारी टीम का बुरा हाल हमारे कोच बॉब वूल्मर ने किया है. मेरा मानना है कि विदेशी कोच के साथ हमारे खिलाड़ियों का तालमेल बैठ नहीं सकता. बॉब वूल्मर ने पाकिस्तानी टीम को एक खिलौना बना दिया है और टीम गली-कूचे की टीम की तरह हो गई है."

उनका मानना है कि वूल्मर को फ़िक्र होना चाहिए कि विश्व कप आने वाला है, इसलिए देखें कि पाकिस्तानी टीम में कौन-कौन सी कमियाँ हैं ?

वे कहते हैं," कुछ समझ में नहीं आ रहा कि वूल्मर की योजना क्या है? कभी किसी को टीम से बाहर कर देते हैं, कभी किसी को शामिल कर लेते हैं, इस तरह न तो टीम तैयार होती है, न ही खिलाड़ी तैयार होते हैं."

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