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राज्यवर्धन के घर ख़ुशी का माहौल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेजर राज्यवर्धन सिंह राठौर के पदक जीतने की ख़बर मिलते ही जयपुर में कर्नल एलएस राठौर के घर फ़ोन की घंटी घनघनाने लगीं और थोड़ी ही देर में बधाई देने वालों का ताँता लग गया. उनके घर का माहौल जीत के जोश, भावुकता और गर्व से भरा हुआ था, राज्यवर्धन के बारे में लोग याद कर रहे थे कि किस तरह उन्होंने ओलंपिक के लिए तैयारियाँ की थीं. राज्यवर्धन की उम्रदराज़ नानी ने रूँधे हुए गले से कहा, "मैं क्या कहूँ, सब परमात्मा की शक्ति है, वही उसका साथ दे रही है." कर्नल राठौर घर में टीवी पर दम साधे ओलंपिक देखते रहे और जब परिणाम आया तो वे ख़ुशी से झूठ उठे. उन्होंने बड़े जोश के साथ कहा, "ये तो मेडलों की शुरूआत है, यह भारत का पहला मेडल है, इसके बाद तो मेडल ही मेडल आएँगे." विजेता पुत्र के गर्व भरे पिता भारतीय दल के बाक़ी खिलाड़ियों को भी शुभकामना देना नहीं भूले, "मेरी शुभकामना है कि भारत के और भी जितने खिलाड़ी हैं वे भी राज्यवर्धन की ही तरह मेडल लाएँ." राठौर के घर जमा हुए लोगों में ख़ासा जोश दिखाई दिया और वे इस बात की योजना बनाने में व्यस्त थे कि राज्यवर्धन जब एथेंस से लौटकर आएँ तो उनका किस तरह स्वागत किया जाए. कर्नल राठौर को इस बात मलाल ज़रूर था कि उनके बेटे को स्वर्ण पदक नहीं मिल पाया लेकिन उन्होंने कहा कि अभी और मौक़े आएँगे. खुशी का कारण भी साफ़ है, आज़ादी के बाद राज्यवर्धन व्यक्तिगत स्पर्धाओं में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं. राज्यवर्धन अपने पिता की ही तरह भारतीय सेना में अधिकारी रहे हैं. राज्यवर्धन कई सिडनी, साइप्रस में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल कर चुके हैं. खेल के चौथे दिन भारत को सफलता दिलाकर राज्यवर्धन ने उम्मीदें जगा दी हैं कि भारत अभी कुछ और मेडल जीत सकता है. राज्यवर्धन ने मेडल जीतने के बाद बीबीसी से कहा, "मुझे आशा है कि इस सफलता से भारतीय खिलाड़ियों का हौसला बढ़ेगा और वे कुछ कर दिखाएँगे." |
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