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ड्रेस कोड और ईरान की महिला खिलाड़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आपको पता है कि एथेंस ओलंपिक में भाग लेने गई ईरान की टीम में कितनी महिलाएँ हैं? जवाब है - सिर्फ़ एक. नसीम हासनपोर अकेली नवयुवती हैं ईरान की टीम में हैं और वे 10 मीटर के एयर पिस्टल निशानेबाज़ी प्रतियोगिता में शामिल होने एथेंस गई हैं. इस प्रतियोगिता में भी शामिल होने वो इसलिए जा पाई हैं क्योंकि यही एक खेल है जो महिलाओं को उन कपड़ों के साथ खेल में शामिल होने की अनुमति और सुविधा देता है जो ईरानी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुरुप है. उल्लेखनीय है कि ईरानी परंपराओं के अनुसार महिलाओं को पूरा शरीर ढँकने वाला लंबा लबादा पहनना और सिर पर स्कार्फ़ बाँधना ज़रुरी है. 19 साल की नसीम हासनपोर सधे हाथों से निशाना लगाती हैं और जब गोली दागती हैं तो वह निशाने के बीचोंबीच लगता है. फिर गंभीरता से वे अपना पिस्टल रीलोड करती हैं. वे ओलंपिक की तैयारी के लिए प्रतिदिन छह घंटे अभ्यास करती हैं. उनके कंधों पर बोझ बहुत है. न केवल वे ईरानी टीम में अकेली महिला हैं बल्कि वे सबसे युवा खिलाड़ी भी हैं. वे कहती हैं, "ईरानी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हुई मैं बहुत गौरव का अनुभव करती हूँ. शायद इससे दूसरी ईरानी महिलाओं को कुछ प्रेरणा मिल सकेगी." उनके कोच जावद कुपाज़ादे का कहना है कि नसीम एक बेहतरीन निशानेबाज़ हैं और भविष्य की स्टार हैं. वे कहते हैं, "नसीम एक जिमनास्ट भी हैं इसलिए उनका शरीर पूरी तरह सधा हुआ है. हमें चीन ओलंपिक 2008 में उनसे बहुत उम्मीदें हैं." खेल और ड्रेस कोड वैसे निशानेबाज़ी ऐसा खेल नहीं है जिसमें नसीम का प्रदर्शन सबसे अच्छा है. उनकी असली रुचि तो जिमनास्टिक्स में है.
लेकिन महिलाओं के कपड़ों को लेकर ईरान में जो क़ायदे क़ानून हैं उसके कारण वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिमनास्टिक में भाग नहीं ले सकतीं. वे कहती हैं, "निशानेबाज़ी मेरी पसंद नहीं है लेकिन मैं देश के लिए कुछ हासिल करना चाहती थी इसलिए इसमें आ गई." वैसे ईरान के ड्रेस कोड के कारण महिलाओं के ओलंपिक खेलों में भाग लेने में बहुत सी अड़चनें हैं. इसी कारण ईरानी महिलाएँ गोल्फ़ और घुड़सवारी जैसे खेलों में भाग लेने लगी हैं जिसमें वे ईरानी ड्रेस कोड का पालन भी कर सकती हैं. वैसे समस्या सिर्फ़ कपड़ों की नहीं है ईरान में महिलाओं के लिए तो खेल सुविधाओं का उपलब्ध होना भी बड़ा सवाल है. हालांकि ईरान में महिलाओं के लिए अलग प्रतियोगिताएँ होती हैं जिसमें पुरुषों को आने की अनुमति नहीं होती. लेकिन फ़िलहाल तो उनके लिए ओलंपिक दूर का सपना ही दिखता है. |
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