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'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बचा कर रखा है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के लिए पदक की दावेदारों में प्रमुख हैं एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज. पेरिस में हुई विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली अंजू से भारत को काफ़ी उम्मीदें हैं. हमने उनसे विशेष बातचीत की. ओलंपिक में भारतीय दल का नेतृत्व आप कर रही हैं. कैसा लग रहा है आपको? क्या आपने कभी सोचा था कि आप इस मुकाम तक पहुँचेंगी? बचपन में जब मेरे पिताजी मुझे एथलेटिक्स की ट्रेनिंग देते थे, तब मैं अक्सर यह सोचती थी कि क्या मैं भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत पाऊँगी. फिर मैंने ठान लिया कि मुझे भारत के लिए पदक तो जीतना ही है. जब उषा दीदी (पीटी उषा) को ओलंपिक में कांस्य पदक नहीं मिला तब मैंने सबसे पहले ओलंपिक के बारे में सुना. अख़बारों में ख़बर छपी, टेलीविज़न पर देखा तो बहुत बुरा लगा और तब से ही मैं ओलंपिक में भाग लेने और पदक जीतने की बात सोचने लगी. एथेंस ओलंपिक के लिए आपकी कैसी तैयारी है? अन्य प्रतियोग़ियों की तुलना में आप ख़ुद को पदक की कितनी मज़बूत दावेदार के रूप में देखती हैं? एथेंस ओलंपिक के लिए तैयारी तो हमने वर्ष 2000 में ही शुरू कर दी थी. तब सिडनी ओलंपिक में मैं घायल होने के कारण हिस्सा नहीं ले पायी थी. तभी मेरे पति और मेरे प्रशिक्षक बॉबी जॉर्ज ने मुझसे कहा कि हमें 2004 के एथेंस ओलंपिक के लिए हमें तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. पिछले साल हम यूरोपियन सर्किट में पहुंचे और तब हमें यह अंदाज़ा हुआ कि हम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. हमलोग काफी मज़बूत हैं और दृढसंकल्प भी. कुछ कर गुजरने की तमन्ना है, "किलर इंसटिक्ट" हममे है. हमें उतनी सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं जितनी भारत से बाहर की एथलीटों को मिलती हैं. फिर भी हम संघर्ष कर रहे हैं और संघर्ष करने की हममे अद्वितीय क्षमता भी है. आपके लिए प्रेरणा के स्रोत कौन-कौन लोग थे बचपन से ही मेरे पिता जो स्वयं एथलेटिक्स के प्रशिक्षक हैं और फिर मेरे पति जो मेरे प्रशिक्षक भी रहे हैं. कब आपको ऐसा लगा कि ओलंपिक में पदक जीतने के लिए आप छलाँग लगा सकती हैं? पिछले साल से ही मैं चोटी की यूरोपीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हूँ और दुनिया की सर्वश्रेष्ट महिला एथलीटों के साथ मुक़बले में उतर रही हूँ. सर्वश्रेष्ट छह या चार स्थानों पर हमेशा ही मेरा नाम आता रहा है और फिर पेरिस में, विश्व चैम्पियनशिप में मैंने कांस्य पदक भी जीता. तभी मुझे लगने लगा कि मैं सबसे बड़ी प्रतियोगिता में (ओलंपिक) भी पदक जीत सकती हूँ. अब कितनी आशावान हैं आप? क्या उम्मीदें हैं आपकी? हम एक पदक के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अगर ईश्वर ने चाहा तो पदक लेकर ही घर लौटेंगे. अभी मेरा प्रदर्शन चरमोत्कर्ष तक नहीं पहुँचा है. एथेंस के लिए मैंने उसे बचाकर रखा है. मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन ओलम्पिक में ही देखने को मिलेगा. |
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