यूं ही नहीं बने पुलेला गोपीचंद स्टार कोच

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
"आपका बच्चा ऐसा खिलाड़ी बने जो नेशनल लेवल पर एक दो टूर्नामेंट जीत ले और मौक़ा मिले तो अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल ले? या फिर आप चाहते हैं कि वह दुनिया में नम्बर एक हो? तो फिर इसके लिए अलग तरह की ट्रेनिंग और व्यवस्था करनी होगी और बरसों इंतज़ार भी करना होगा."
यह कहना था पुलेला गोपीचंद का जो रियो जाने से क़रीब एक महीना पहले दिल्ली के स्कूली कोचों को कोचिंग के मंत्र सिखाने-बताने के लिए दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में हुए सेमीनार में आए थे.
छत्रसाल स्टेडियम से ही दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त जैसे पहलवान निकले हैं.

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जैसे ही गोपीचंद थोड़ी देर के ब्रेक में सेमीनार से बाहर आए तो उनके साथ सेल्फी लेने वालों की भीड़ लग गई.
जब मैं उनसे बात करने के लिए आगे बढ़ा तो उन्होंने कहा कि आज तो बातचीत नहीं हो सकेगी.
मैंने कहा कोई बात नहीं फोन पर बात कर लेंगे. पुलेला गोपीचंद अपने कुछ पुराने कोच से बातचीत करते हुए दार्शनिक भाव में नज़र आए.
वो अपनी एक हथेली पर गोला बनाते हुए कह रहे थे कि ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, कभी ऊपर तो कभी नीचे चलता रहता है.

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उनके लिए यह वो समय था जब साइना नेहवाल उनका साथ एक साल पहले ही छोड़ चुकी थीं.
साइना का कहना था कि वह गोपीचंद की ट्रेनिंग में कुछ नया नहीं सीख पा रही हैं.
उन्होंने पूर्व अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी विमल कुमार को अपना कोच बनाया.
इस बीच पीवी सिंधु और के श्रीकांत लगातार हार रहे थे और उनकी रैंकिंग गिर रही थी.
लेकिन रियो में पीवी सिंधु के चांदी के पदक और के श्रीकांत के शानदार प्रदर्शन से पुलेला गोपीचंद और उनकी बैडमिंटन एकेडमी एक बार फ़िर चर्चा में हैं.

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इस दौरान उन पर भारत के ही कई जाने-पहचाने खिलाड़ियों ने भेदभाव का आरोप लगाया.
इसके बावज़ूद आज तक गोपीचंद ने किसी विशेष खिलाड़ी के ख़िलाफ कभी भी खुलकर कुछ नहीं कहा.
ये कुछ उदाहरण बताते हैं कि गोपीचंद ना सिर्फ बुरे हालात से निकलना जानते हैं, बल्कि उन्होंने अपने निजी खेल जीवन से सबक़ भी लिया है.
रियो जाने से ठीक पहले ग्रेटर नोएडा में अपनी कोचिंग एकेडमी के बारे में जानकारी देने के लिए गोपीचंद दिल्ली आए.
तब भी उन्होंने कोई दावा तो नहीं किया, लेकिन इतना ज़रूर कहा कि इस बार लंदन के मुकाबले बेहतर परिणाम आ सकता है.
अब पीवी सिंधू के रजत पदक को लंदन के साइना के कांस्य पदक से बेहतर कहा जा सकता है.

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अब एक बात उनके ट्रेनिंग देने के तरीके पर.
एक बार हमें दिल्ली के सिरी फोर्ट स्टेडियम में गोपीचंद को साइना नेहवाल और दूसरे खिलाड़ियों को अभ्यास कराते देखने का मौका मिला.
हमने देखा कि कोर्ट पर साइना नेहवाल एक तरफ अकेली हैं और दूसरी तरफ दो खिलाड़ी आगे और दो खिलाड़ी पीछे.
यानी एक ही समय में चार खिलाड़ी, एक खिलाड़ी को अभ्यास करा रहे थे.
पुलेला गोपीचंद साल 2001 में एक खिलाड़ी के तौर पर चर्चा में आए थे.
तब उन्होंने चीन के चेन होंग को हराकर ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीती थी.
इसके अलावा उन्होंने साल 1999 में स्कॉटिश ओपन और साल 2004 में इंडिया एशियन सैटेलाइट टूर्नामेंट भी जीता था.

उसके बाद गोपीचंद ने आंध्र प्रदेश सरकार की मदद से अपनी बैडमिंटन एकेडमी के लिए साल 2003 में ज़मीन ली थी.
फिर कुछ लोगों की सहायता से उसे एक नया रूप देते हुए आज उन्होंने वो मुक़ाम हासिल किया है जिसके बल पर देश को चैंपियन खिलाड़ी मिले हैं.
उनकी एकेडमी में आठ कोर्ट, एक स्वीमिंग पूल, वेट ट्रेनिंग रूम, कैफेटेरिया और आराम करने की जगह है.
पुलेला गोपीचंद ने भारत की पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी पीवीवी लक्ष्मी से शादी की है.

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उनके शिष्यों में पी कश्यप, पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, गुरुसाई दत्त और अरुण विष्णु जैसे कामयाब खिलाड़ी हैं.
अब इनकी संख्या और बढ़ सकती है.
पी कश्यप ने तो साल 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीता था.
गोपीचंद वही खिलाड़ी हैं, जिन्होंने केवल इस वज़ह से एक विज्ञापन करने से मना कर दिया था कि शीतल पेय में हानिकारक पदार्थ होते हैं.
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