केवल क्रिकेट में ही नहीं होती फ़िक्सिंग

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जिन खेलों में फ़िक्सिंग के आरोप लगते रहे हैं उनमें सबसे नया नाम है टेनिस का.

बीबीसी और वेबसाइट बज़फ़ीड की पड़ताल में टेनिस के शीर्ष 50 खिलाड़ियों में 16 पर मैचों में फ़िक्सिंग का शक़ ज़ाहिर किया गया है. इसमें कई ग्रैंड स्लैम विजेता भी हैं.

हम यहां खेलों में फ़िक्सिंग के कुछ मशहूर मामले पेश कर रहे हैं.

क्रिकेट

हाल के समय में फ़िक्सिंग के मामलों को लेकर सबसे ज़्यादा चर्चा क्रिकेट की रही है.

मैच फ़िक्सिंग की सबसे बड़ी वजह सट्टेबाज़ी है. इस खेल के सबसे छोटे प्रारूप टी-20 में 240 बार बॉल फेंकी जाती है और ये सट्टेबाज़ों के लिए 240 मौक़ों की तरह होती हैं.

इस हिसाब से टेस्ट मैच के एक दिन के खेल में ऐसे 540 मौक़े होते हैं.

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2010 में पाकिस्तानी खिलाड़ी मोहम्मद आमिर, सलमान बट्ट और मोहम्मद आसिफ़ को अब बंद हो चुके अख़बार न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड ने खास तरह के एक्शन के बदले पैसा लेते पकड़ा था.

किसी ख़ास ओवर में किसी विशेष मौक़े पर जान-बूझकर नो बॉल फेंकना जैसे एक्शन इसमें शामिल थे.

तीन साल बाद ऐसा ही एक और मामला इंडियन प्रीमीयर लीग (आईपीएल) में सामने आया. 2013 में अजीत चंडीला पर स्पॉट फ़िक्सिंग के मामले में आजीवन प्रतिबंध लगा.

इससे आईपीएल देखने वाले दर्शकों की संख्या में 14 फ़ीसदी की गिरावट आई. पेप्सी ने इसका प्रायोजन बंद कर दिया.

लेकिन तब भी स्टेडियम खचाखच भरे रहे और दो साल बाद इसने फिर अपनी पुरानी लोकप्रियता वापस पा ली.

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मगर क्रिकेट के इतिहास में फ़िक्सिंग से जुड़ा सबसे कुख्यात मामला दक्षिण अफ़्रीका के भूतपूर्व कप्तान हैंसी क्रोनिए का रहा.

उन पर इल्ज़ाम लगे कि उन्होंने मैच के परिणाम की भविष्यवाणी के बदले में पैसा लिया था और खिलाड़ियों को कम रन बनाने के बदले पैसे की पेशकश की थी, जो सही साबित हुए.

इसके बाद उन पर 2001 में क्रिकेट खेलने और सिखाने को लेकर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया. क्रोनिए की 2002 में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई.

फुटबॉल

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इंग्लैंड प्रीमियर लीग के शुरुआती सालों में ब्रूस ग्रोबेलार, हैंस सेगार्स, जॉन फैशानु और मलेशियाई व्यवसायी पर मैच फ़िक्सिंग के आरोप लगे.

ग्रोबेलार 1980 के दशक के अपने पूरे स्वर्णिम दौर में लिवरपूल के गोलकीपर रहे लेकिन जब वे साउथैम्पटन के लिए खेल रहे थे तब उन पर एक आरोप के तहत मुक़दमा चला.

कोर्ट में हालांकि उन पर दोष साबित नहीं हो पाया लेकिन कुछ साल बाद इटली में जो हुआ, उसकी तुलना में यह कुछ नहीं था.

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2006 में इटली पुलिस को यूरोप की कुछ बड़ी टीमों के ख़िलाफ़ रेफ़रियों की नियुक्ति पर असर डालने के सुबूत मिले.

इनमें जुवेनटस, मिलान, फ़ियोरेंटीना और लैज़ियो की टीमें शामिल थीं.

नतीजतन इन टीमों पर जुर्माना लगा और कई अंक काट लिए गए. जुवेनटस इस मामले में मुख्य आरोपी था. उन्हें दो सिरीज़ ए खिताबों से वंचित कर दिया गया और सिरीज़ बी से बाहर कर दिया गया.

स्नूकर

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हेरफेर की जितनी संभावना इस खेल में है, उतनी शायद ही किसी और खेल में हो.

पॉट और मिस जैसे इस खेल के स्टेप्स में फ़र्क काफ़ी कम होता है. इसलिए हारे हुए खेल को लेकर हमेशा संदेह बना रहता है.

सबसे अच्छे खिलाड़ी भी अक्सर आसान शॉट चूक जाते हैं.

इसके बावजूद आज तक सिर्फ़ एक पेशेवर खिलाड़ी ही इसकी फ़िक्सिंग का दोषी पाया गया है.

2008-09 के दौरान कई मैचों को लेकर उन्हें दोषी पाया गया और उनके खेलने पर 2024 तक प्रतिबंध लगा है.

हालांकि 2010 में स्नूकर के मौजूदा विश्व चैंपियन जॉन हिगिंस पर सट्टेबाज़ी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था.

दूसरे भी कई खिलाड़ियों पर जांच चली हैं, लेकिन कोई आरोप नहीं हैं.

बेसबॉल

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'शिकागो सॉक्स' अमरीका की क़रीब 100 साल पुरानी बेसबॉल टीम है, लेकिन अभी भी यह अमरीकी खेल इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है.

1919 में 'शिकागो व्हाइट सॉक्स' के आठ खिलाड़ियों पर पैसे के बदले विश्व सिरीज़ के अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में सिनसिनाटी रेड्स से हारने के आरोप लगे थे.

इन खिलाड़ियों में तब के स्टार खिलाड़ी जो जैक्सन भी फंसे थे. हालांकि कोर्ट में बाद में उन पर दोष साबित नहीं हो सका.

बेसबॉल खिलाड़ियों पर शायद ही कभी आजीवन प्रतिबंध लगा है.

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