'रूस, कतर से छिन सकता है विश्व कप'

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रिश्वत देने के सबूत सामने आने पर रूस और क़तर 2018 और 2022 के फ़ुटबॉल विश्व कप गंवा सकते हैं, फ़ीफ़ा के बड़े अधिकारी डोमेनिको स्काला ने ये बात कही है.
दोनों देशों ने मेज़बानी हासिल करने में कोई ग़लत काम करने से इनकार किया है और स्काला भी मानते हैं कि उन्होंने भ्रष्टाचार के सबूत नहीं देखे हैं.
स्काला फ़ीफ़ा की ऑडिट समिति के प्रमुख हैं.
हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा, "अगर ऐसा सबूत सामने आता है कि क़तर और रूस को मेज़बानी सिर्फ़ ख़रीदे गए वोटों से मिली तो मेज़बानी रद्द हो सकती है."
'आज तक सबूत नहीं'

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स्विट्ज़रलैंड के अख़बार ज़ोनटागज़ाइटंग से उन्होंने कहा, "आज तक इस बारे में सबूत नहीं दिया गया है."
स्काला ने ऐसी ही टिप्पणी 2013 के अंत में भी की थी लेकिन हाल ही में फ़ीफ़ा से संबंधित जो घटनाएं हुई हैं उनके संदर्भ में इसे ज़्यादा गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जाएगा.
बीते महीने ज़्यूरिख के होटल पर छापों में फ़ीफ़ा के सात वरिष्ठ अधिकारी गिरफ़्तार हुए, ये अधिकारी वहां अध्यक्ष चुनाव से पहले रह रहे थे.
ये सात अधिकारी उन 14 लोगों में से हैं जिन पर अमरीका ने आरोप लगाए हैं, उन पर आरोप हैं कि उन्होंने 24 सालों में करीब 970 करोड़ रुपए रिश्वत में लिए.
मेज़बानी को लेकर जांच

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स्विस अधिकारियों ने भी 2018 और 2022 की मेज़बानी को लेकर एक अलग जांच शुरू की है.
इससे पहले फ़ीफ़ा ने 2018 और 2022 की मेज़बानी की प्रक्रिया को लेकर अमरीकी वकील माइकल गार्सिया की सेवाएं ली थीं.
नवंबर में उनकी दो साल की जांच के निष्कर्ष का सारांश फ़ीफ़ा ने जारी किया था, उनकी पूरी रिपोर्ट 430 पन्नों की थी. लेकिन गार्सिया ने शिकायत की कि उनके काम को ''ग़लत'' ढंग से पेश किया गया.
'रूस, क़तर दोषी नहीं'

रिपोर्ट में रूस और क़तर को दोषी नहीं ठहराया गया था.
गार्सिया ने फ़ीफ़ा के रवैये से नाराज़ हो कर इस्तीफ़ा दे दिया और उनकी टिप्पणी ने मेज़बानी प्रक्रिया को लेकर बहस को फिर से शुरू कर दिया.
इसके बाद स्काला ने गार्सिया की रिपोर्ट की समीक्षा क़ानून के जानकारों से करवाई है लेकिन वो दोनों विश्व कप की मेज़बानी अब बदलने का आधार नहीं पा सके हैं.
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