फीफा ने आयरिश संघ को दिए 50 लाख यूरो

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फ़ीफ़ा पर लगे आरोप एक के बाद एक, परत-दर परत खुलते जा रहे हैं.

अब फ़ुटबॉल एसोसिएशन ऑफ़ आयरलैंड (एफ़एआई) ने ये माना है कि फ़ीफ़ा ने उसे करीब पचास लाख यूरो दिए थे.

आरोप है कि फ़ीफ़ा ने ये पैसा इसलिए दिया था ताकि फ़ुटबॉल एसोसिएशन ऑफ़ आयरलैंड उस पर 2010 के विश्वकप के क्वॉलिफ़ायर में एक ग़लत फ़ैसले को लेकर क़ानूनी कार्रवाई न करे.

आयरलैंड की स्वीकारोक्ति

आयरलैंड के ख़िलाफ़ मैच में फ़्रांस के स्ट्राइकर थिएरी हेनरी का हाथ लग जाने के बावजूद रेफ़री ने एक गोल माना था.

फ़ीफ़ा कार्यालय में पहुंची पुलिस

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एक ग़लत फ़ैसले की वजह से आयरलैंड की टीम विश्वकप में जगह नहीं बना सकी थी.

एफ़एआई के मुख्य कार्यकारी जॉन डेलनी ने कहा कि दोनों पक्षों में इसे लेकर समझौता हो गया था.

डेलनी कहते हैं, "हमें लगा कि फ़ीफ़ा के ख़िलाफ़ हमारा क़ानूनी मामला बनता है. तो उस दिन मैं सेप ब्लेटर के पास गया और उन्हें भला-बुरा कहा. फिर हमारा समझौता हो गया. ये बात गुरुवार की है और सोमवार तक तो समझौते पर दस्तखत तक हो चुके थे. ये समझौता हमारे लिए अच्छा था. क़ानूनी कार्रवाई के साथ आगे न बढ़ने के लिए बहुत जायज़ समझौता."

फ़ी़फ़ा का कर्ज

फ़ीफ़ा के पूर्व अध्यक्ष सैप ब्लैटर

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फ़ीफ़ा के एक प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि आयरलैंड को ये रकम दी गई थी. हालांकि उनका दावा है कि ये स्टेडियम बनाने के लिए दिया गया कर्ज़ था. इस कर्ज़ को बाद में फ़ीफ़ा ने माफ़ कर दिया था.

फ़ीफ़ा जिन मुश्किलों का सामना कर रहा है ये उनका सिर्फ़ एक उदाहरण है. असल में दुनिया भर में फ़ुटबॉल पर नियंत्रण और नज़र रखने वाली संस्था फ़ीफ़ा के लिए बीते दस दिन अच्छे नहीं गुज़रे हैं.

उस पर ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबे रहने के आरोप हैं.

अमरीका के अनुरोध पर स्विट्ज़रलैंड में फ़ीफ़ा के सात अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार कर लिए गए हैं. इस मामले में चौदह लोगों को अभियुक्त बनाया गया.

विश्व कप की मेज़बानी

साल 2022 के विश्व कप फ़ुटबाल के मेजबानी की घोषणा

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स्विट्ज़रलैंड सरकार 2018 और 2022 के विश्व कप की मेज़बानी देने की प्रक्रिया की भी जांच कर रही है.

इन आरोपों के बाद फ़ीफ़ा के अध्यक्ष सेप ब्लैटर इस्तीफ़ा दे चुके हैं. ब्लैटर चार दिन पहले ही अध्यक्ष चुने गए थे.

ब्रिटेन ने कहा है कि वो 2022 के विश्व कप की मेज़बानी को तैयार है.

फ़ीफ़ा के पूर्व उपाध्यक्ष जैक वॉर्नर भी दोषी ठहराए गए हैं. उन्होंने कहा है कि फ़ीफ़ा के वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत जारी करेंगे.

सवाल 2010 के विश्व कप की मेज़बानी को लेकर भी है. दक्षिण अफ़्रीकी पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है कि वहां की फ़ुटबॉल एसोसिएशन ने मेज़बानी हासिल करने के लिए एक करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी.

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