भारतीयों की पहुंच से कितना दूर 'एनबीए'?

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- Author, राखी शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
एनबीए का नाम सुनते ही ज़हन में आते हैं साढ़े छह फुट लंबे क़द के विदेशी खिलाड़ी, बेशुमार पैसा और अमेरिका. इस लीग में भारतीय खिलाड़ियों के लिए पहुंचना सपने जैसा है.
लेकिन हाल ही में भारतीय मूल के सिम भुल्लर ने इस लीग में पदार्पण किया, तो वहीं भारत के सतनाम सिंह भामरा एनबीए ड्राफ़्ट में चुन लिए गए.
..तो सतनाम होंगे एनबीए में खेलने वाले पहले भारतीय

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एनबीए की टीम सेक्रोमेंटो किंग्स के कनाडियाई खिलाड़ी सिम भुल्लर हाल ही में भारत आए थे. सिम भारतीय मूल के हैं, लेकिन भारत में जन्मा कोई भी खिलाड़ी अब तक एनबीए के कोर्ट पर नहीं उतर पाया है.
पंजाब के सतनाम सिंह भामरा ऐसा करने के बेहद करीब हैं. 7 फुट 2 इंच लंबे सतनाम सिर्फ 19 साल के हैं, और उनका नाम इस साल के एनबीए ड्राफ़्ट में आया है.

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एनबीए की तीस टीमें हर साल कुछ खिलाड़ियों का नाम ड्राफ़्ट करती है जो इस लीग में खेलने के योग्य होते हैं.
भारत में बास्केटबॉल के भविष्य पर सतनाम कहते हैं, “पिछले 4-5 साल से मैं देख रहा हूं भारत में बास्केटबॉल में काफी सुधार आया है. एनबीए का भारत में आगमन हो गया है. मुझे विश्वास है भारत में बास्केटबॉल का नाम क्रिकेट से ज़्यादा होगा.”
पहचान बना रहे हैं भारतीय खिलाड़ी

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सतनाम के साथ जुड़ने में इंडियाना पेसर्स, शिकागो बुल्स, सेक्रोमेंटो किंग्स, सेन एंटोनियो स्पर्स और डेनवर नगेट्स ने दिलचस्पी दिखाई है. सतनाम बताते हैं कि अब एनबीए में भारतीयों को भी पहचाना जा रहा है.
वो बताते हैं, ''कई खिलाड़ी आकर मुझसे पूछते हैं कि मैं किस देश से हूं. जब मैं उनसे कहता हूं कि मैं भारत से हूं वो पूछते हैं कि क्या भारत में भी इतने लंबे व्यक्ति होते हैं. अगर मैं एनबीए में चुना जाता हूं तो भारतीयों के लिए इस लीग में आने का रास्ता खुल जाएगा."
सिम भुल्लर, सतनाम से कुछ साल सीनियर हैं. ऐसे में भुल्लर से मिल रहे मार्गदर्शन पर सतनाम कहते हैं.

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“सिम भुल्लर से मेरी मुलाकात एक महीने पहले हुई थी. उनसे मुझे काफी सीखने को मिला है. उन्होंने मुझे वर्कआउट करने का सही तरीका बताया. वो मुझे बताते रहते हैं कि मुझे किन-किन जगहों पर खेलने जाना चाहिए.”
भारत की पहुंच से कितना दूर एनबीए
1946 में एनबीए के गठन के बाद से अब तक कोई भी भारतीय इस अमेरिकन लीग में नहीं पहुंचा है. ऐसे में अब भी ये भारत के लिहाज़ से दूर की कौड़ी नज़र आती है.
1982 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला खिलाड़ी जेसेंसा एब्राहम पाउलोस कहती हैं कि हालात धीरे-धीरे बेहतर हो रहे हैं.

वो कहती हैं, "शुरुआत तो हो चुकी है. लेकिन अभी वक्त लगेगा. बच्चे टीवी पर एनबीए देखकर प्रेरित हो रहे हैं. अगर सतनाम का चयन होता है तो बच्चों को अपना रोल मॉडल मिलेगा."
एनबीए के ड्रॉफ्ट में आए खिलाड़ियों के टीम की घोषणा अगले महीने होगी.
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