दो साल बाद मिला मौका भुनाएंगे भज्जी?

हरभजन सिंह

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    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

आईपीएल-8 के पहले क्वालिफायर में चेन्नई की पारी का 11 वां ओवर हरभजन सिंह के लिए 'अच्छे दिन' की वापसी के संकेत जैसा था.

ये मैच में हरभजन सिंह का तीसरा ओवर था. पहले दो ओवरों में बीस रन दे चुके हरभजन बेअसर दिख रहे थे.

लेकिन, इस ओवर की दूसरी और तीसरी गेंद पर सुरेश रैना और महेंद्र सिंह धोनी को पैवेलियन भेजकर हरभजन ने मैच का नक्शा ही पलट दिया.

मुंबई को फाइनल का टिकट मिलने के बाद हर तरफ हरभजन के कमाल की चर्चा थी. वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे थे.

तारीख बदली तो पता चला कि बीसीसीआई के सलेक्टर भी उनकी गेंदबाज़ी के कायल हो चुके हैं.

टीम में वापसी

हरभजन सिंह

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संदीप पाटिल की अगुवाई वाली चयन समिति ने दो साल से राष्ट्रीय टीम में वापसी की राह दिखते हरभजन सिंह को हरी झंडी दिखा दी.

मार्च 2013 में भारत के लिए आखिरी टेस्ट खेले हरभजन सिंह बांग्लादेश के खिलाफ 10 जून से होने वाले टेस्ट मैच की टीम में शामिल हैं.

पाटिल कहते हैं कि बांग्लादेश के बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के छह बल्लेबाजों के होने की वजह से हरभजन को टीम में जगह मिली है.

'रंग लाई मेहनत'

हरभजन सिंह

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लेकिन, हरभजन इसे अपनी कड़ी मेहनत का नतीजा मानते हैं.

टेस्ट टीम में चुने जाने के बाद हरभजन ने कहा, "मैं बीते दो साल से इस दिन के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था."

चौंतीस साल के हरभजन सिंह फिट हैं. उनमें जोश की भी कमी नहीं दिखती. आईपीएल-8 के 14 मैचों में 16 विकेट के लेकर वो फॉर्म में होने का सबूत भी दे चुके हैं.

लेकिन, क्या हरभजन सिंह की गेंद में अब भी वो जादू बाकी है, जिसके बूते उन्होंने क्रिकेट पिच पर एक दशक से ज्यादा वक्त तक बल्लेबाजों को नचाया?

बांग्लादेश के खिलाफ हरभजन का रिकॉर्ड खास नहीं है. उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 3 टेस्ट मैचों में सिर्फ 6 विकेट हासिल किए हैं. हालांकि, हरभजन रिकॉर्ड बदलने का हुनर जानते हैं.

3 मैच, 32 विकेट

हरभजन सिंह 2001 का फाइल चित्र

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साल 1998 में पहली बार भारतीय टीम का हिस्सा बने हरभजन सिंह ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में रिकॉर्ड बदलकर ही नई पहचान बनाई थी.

स्टीव वॉ की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलिया की चैंपियन टीम को हरभजन ने अपनी फिरकी के जाल में ऐसा उलझाया कि वो सीरीज़ गंवा बैठे.

हरभजन ने उस सीरीज के तीन मैचों में 17.03 के शानदार औसत से 32 विकेट लिए. इस सीरीज़ के बाद अगले दस साल तक हरभजन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

टेस्ट ही नहीं वनडे क्रिकेट में भी वो भारत के नंबर 1 स्पिनर बने रहे.

बीच में हरभजन विवादों में घिरे. साल 2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एंड्रयू सायमंड्स के साथ 'मंकीगेट' विवाद उनके करियर के लिए खतरा बनता दिखा. इसी साल पूर्व गेंदबाज श्रीशांत को सरे मैदान थप्पड़ मारने को लेकर भी हरभजन मुश्किलों में घिरे, लेकिन, भारतीय टीम में उनकी जगह बदस्तूर बनी रही.

नाकामी का दौर

हरभजन सिंह

हरभजन साल 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे. इसी साल वेस्ट इंडीज दौरे पर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में चार सौ विकेट पूरे किए.

ये कामयाबी हासिल करने वाले हरभजन भारत के तीसरे गेंदबाज बने. तब हरभजन की उम्र 31साल थी.

उस वक्त हरभजन ने दावा किया था कि उन्हें अगले दो सौ विकेट लेने में ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा.

लेकिन, वक़्त ने ऐसी करवट ली कि हरभजन का करियर ही ख़तरे में पड़ गया. साल 2011 के इंग्लैंड दौरे में वो अनफिट हो गए. हरभजन साल 2012 में एक और 2013 में दो टेस्ट खेल सके. इसके बाद राष्ट्रीय टीम से उनकी छुट्टी हो गई.

'नई शुरुआत'

हरभजन सिंह

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दो साल बाद टीम में लौटे हरभजन अगले पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के इरादे में हैं.

हरभजन कहते हैं , "ये मेरे लिए नई शुरुआत है. मैं भरोसे के साथ शुरुआत करना चाहता हूं और खुद को मिले मौके का भरपूर इस्तेमाल करना चाहता हूं "

हरभजन के अंतरराष्ट्रीय करियर की दिशा इस बात से तय होगी कि वो इस मौके को कैसे भुनाते हैं.

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