फ़ीफ़ा: भ्रष्टाचार पर जांच रिपोर्ट का होगा विश्लेषण

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फ़ीफ़ा के नैतिक मामलों के जज हंस योयाहिम एकर्ट और वकील माइकल गार्सिया विश्व कप की मेज़बानी देने में कथित भ्रष्टाचार की जांच की पूरी रिपोर्ट संगठन की अनुपालन समिति के प्रमुख को देने पर सहमत हो गए हैं.
फ़ीफ़ा के लेखा परीक्षण और अनुपालन समिति के स्वतंत्र अध्यक्ष डोमेनिको स्काला फ़ीफ़ा की कार्यकारी समिति के सामने चुने हुए सबूतों को पेश करेंगे.
इसके बाद यह संस्था इस बात का मूल्यांकन करेगी कि कौन से क़दम उठाए जाएं, पुनर्मतदानका विकल्प भी खुला हुआ है.
फ़ीफ़ा पर दबाव

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फ़ीफ़ा ने 13 नवंबर को गार्सिया की रिपोर्ट का 42 पेज का सार जारी किया था. इसके बाद से ही उस पर पूरी रिपोर्ट प्रकाशित करने का दबाव है.
इस रिपोर्ट में रूस और को 2018 और 2022 के विश्वकप की मेज़बानी हासिल करने में भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी कर दिया है. इससे उनके मेज़बान बने रहने का रास्ता साफ़ हो गया है.
गुरुवार को आयोजित एक बैठक में एकर्ट और गार्सिया इस बात पर सहमत हुए कि नैतिक समिति की ओर से किए गए कार्यों का कार्यकारी समिति द्वारा मूल्यांकन महत्वपूर्ण है.

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स्वीट्ज़रलैंड में जन्में स्काला की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी कि अपने पास मौजूद सूचनाओं में से कितनी सूचनाएं वो कार्यकारी समिति को उपलब्ध कराते हैं.
स्काला या कार्यकारी समिति के किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए एकर्ट और गार्सिया उपलब्ध रहेंगे.
रिपोर्ट का सार जारी होने के कुछ घंटे बाद ही गार्सिया ने एक बयान जारी कर रिपोर्ट पर सवाल उठाया था. उन्होंने रिपोर्ट को आधा-अधूरा और भ्रामक बताया था.
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