करारी हार के बाद भारत की साख दांव पर

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
धुआंधार बल्लेबाज़ क्रिस गेल का चोटिल होकर टीम से बाहर होना और उसके बाद संदिग्ध गेंदबाज़ी एक्शन के कारण जादुई स्पिनर सुनील नारायण का वापस वेस्ट इंडीज़ लौटना.
ये दो ऐसे कारण थे जिसके बाद क्रिकेट के पंडित वेस्ट इंडीज़ को कमतर आंक रहे थे.
लेकिन वेस्ट इंडीज़ ने कोच्चि में खेले गए पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुक़ाबले में भारत को 124 रनों से ऐसी पटखनी दी कि वह चारों खाने चित हो गया.
अब दोनों टीमें शनिवार को दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में दूसरे एकदिवसीय मुक़ाबले में आमने-सामने होंगी.
पांच एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ में वेस्ट इंडीज़ की इस शानदार शुरुआत के बाद शायद ही कोई क्रिकेट पंडित अब उनकी हार की भविष्यवाणी करे.
धमाकेदार खेल

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कोच्चि में जब वेस्ट इंडीज़ ने मार्लोन सैमुअल्स के नाबाद 126 रनों की मदद से 321 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया तो लगा कि इस आसान बैटिंग विकेट पर अब वेस्ट इंडीज़ के गेंदबाज़ो की भी खैर नहीं.
लेकिन हुआ इसका बिलकुल उलटा. एकाएक काग़ज़ पर मज़बूत नज़र आने वाली भारतीय बल्लेबाज़ी रवि रामपाल, ड्वेन ब्रावो, मार्लोन सैमुअल्स और जेरोम टेलर की गेंदबाज़ी के सामने नतमस्तक होकर घुटने टेकती नज़र आई.
शिखर धवन ने सर्वाधिक 68 रन तो बनाए लेकिन उनकी इस पारी में आत्मविश्वास नहीं था. विराट कोहली की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाकामी का सिलसिला थम नहीं रहा है.
दूसरी तरफ़ कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का टॉस जीतकर पहले फ़ील्डिंग करने का फ़ैसला भी किसी को समझ नहीं आया.

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एक टीम जिसके स्टार खिलाड़ी पहले ही मैच से बाहर थे और टीम में अपने अनुबंध को लेकर बोर्ड से लड़ाई कर रहे हैं और आशंका यह भी थी कि वह शायद मैदान पर ही ना उतरे, ऐसे में उनका धमाकेदार खेल सभी क्रिकेट प्रेमियों को लुभा गया.
बुलंद हौसले

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वेस्ट इंडीज़ के फिरकी गेंदबाज़ सुलेमान बेन को भले ही एक भी विकेट नहीं मिला लेकिन उनकी टर्न लेती गेंदों पर हर भारतीय बल्लेबाज़ नाचता हुआ नज़र आया.
इसके बाद कप्तान ब्रावो का आक्रामक फ़ल्डिंग लगाना भी गेंदबाज़ों में नया जोश भर गया.
कोच्चि में भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कई बार अपना पसंदीदा हैलिकॉप्टर शॉट लगाने की कोशिश की लेकिन हर बार गेंद उनके पैड पर लगी अंततः वह भी केवल आठ रन बनाकर चलते बने.
भारतीय गेंदबाज़ इसी दरियादिली से वेस्ट इंडीज़ का स्कोर 300 से ऊपर बनवाते रहें तो टीम की ताक़त माने जाने वाले बल्लेबाज़ ही हर बार कहां तक टीम को बचाएंगे.
अब दिल्ली में भारत की साख दांव पर है, जबकि वेस्ट इंडीज़ के हौसले बुलंद हैं.
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