इंग्लैंड का तुरुप का इक्का हैं मोईन अली

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- Author, जोनाथन एगन्यू
- पदनाम, बीबीसी क्रिकेट संवाददाता
इंग्लैंड के पाकिस्तानी मूल के स्पिनर मोईन अली ने भारत के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में शानदार गेंदबाज़ी की है.
मोईन अली ने चार मैचों में 22.94 के औसत से 19 विकेट लिए हैं और पूरी सिरीज़ में जेम्स एंडरसन के बाद सबसे कामयाब गेंदबाज़ साबित हुए हैं.
बीबीसी के क्रिकेट संवाददाता जोनाथन एगन्यू मानते हैं कि इंग्लैंड की सफ़लता के पीछे मोईन अली हैं और अब उन्हें टेस्ट में ज़्यादा सम्मान मिलेगा.
पढ़ें जोनाथन एगन्यू का पूरा विश्लेषण
भारत के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में इंग्लैंड ने शानदार वापसी और जीत के पीछे मोईन अली का वो कमाल है जिसमें वो एक पार्ट टाइम स्पिनर से इंग्लैंड को जीत दिलाने वाले मुख्य किरदार बन गए.
मोईन अली ने <link type="page"><caption> साउथैम्पटन टेस्ट की दूसरी पारी में</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/28586510" platform="highweb"/></link> छह विकेट लिए और <link type="page"><caption> ओल्ड ट्रैफ़र्ड में चार विकेट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/28726701" platform="highweb"/></link>. ये दोनों ही टेस्ट इंग्लैंड ने जीते.
गर्मियों की शुरुआत में जब मोईन अली को टीम में लिया गया था तब उनकी गेंदबाज़ी से कम उम्मीदें थीं और बल्लेबाज़ी से ज़्यादा.

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कप्तान कुक को भी ग्रैम स्वान जैसे शानदार स्पिनर को खिलाने की आदत पड़ गई थी इसलिए उन्होंने इस नए खिलाड़ी पर पूरा भरोसा नहीं दिखाया.
ऐसे बढ़ा आत्मविश्वास
जब मोईन ने गेंदबाज़ी की तब भी ये नहीं दिखाई दिया कि वो अपने कप्तान के भरोसे के काबिल हैं. वो काफ़ी महंगे साबित हुए.
कुछ हफ़्ते आगे चलिए, अब मोईन न सिर्फ़ कसी हुई गेंदबाज़ी कर रहे हैं बल्कि विकेट भी ले रहे हैं.
वो इयान बेल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, बेल स्पिन अच्छे से खेल लेते हैं.

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मोईन की गेंदबाज़ी में बदलाव शानदार रहा है. उन्हें ये समझ आ गया है कि टेस्ट में गेंद थोड़ी तेज़ फेंकनी होती है.
कभी-कभी भारत ने भी थोड़ी ढिलाई बरती. आसानी से अपना विकेट उनके हवाले कर दिया, लेकिन इससे मोईन का आत्मविश्वास बढ़ा ही है.
बल्लेबाज़ी से चुनौती
अब टेस्ट बल्लेबाज़ मोईन का सम्मान करेंगे. उन पर शुरुआत से ही प्रहार नहीं होंगे और शायद उन्हें भी विकेट के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़े.

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उन्होंने बतौर टेस्ट स्पिनर शानदार शुरुआत की है और अगली चुनौती इस सफलता को बल्लेबाज़ी में दोहराना है.
उन्हें शॉर्ट बॉल खेलने में दिक्क़त होती है लेकिन मेहनत करने पर ये समस्या भी दूर की जा सकती है.
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