सोची ओलंपिक: क्या चमकेगी रूस की छवि

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- Author, स्टीव रोसेनबर्ग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मास्को
ये जुलाई 1980 था और मॉस्को का सेंट्रल लेनिन स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था. सोवियत नेता लियोनिद ब्रेझनेव ने ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के शुरुआत की घोषणा की.
मज़बूत पहरे और रंगारंग समारोह के बीच ब्रेझनेव ने अपने स्वागत भाषण में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं किय कि कुछ ही साल पहले वह गंभीरता से इस पूरे प्रोजेक्ट को ही ख़त्म करने का विचार कर रहे थे.
साल 1975 में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन महासचिव ब्रेझनेव ने पोलित ब्यूरो में एक सहयोगी को शिकायती लहजे में लिखा था कि अगर मॉस्को ओलंपिक खेलों की मेजबानी करता है तो इस पर बहुत ख़र्च होगा और घोटाले होने की भी संभावना है.
उन्होंने लिखा, ''कुछ कामरेडों ने मुझे सुझाव दिया है कि छोटा सा जुर्माना चुकाकर हम इस झंझट से मुक्ति पा सकते हैं.''
लेकिन व्लादीमीर पुतिन ने अपने ओलंपिक खेलों के लिए एकदम अलग दृष्टिकोण अपनाया.
बढ़ी लागत और स्कैंडल्स
शुरुआत से ही राष्ट्रपति पुतिन पूरे मनोयोग से सोची ओलंपिक में शामिल रहे. रूस को खेलों की मेजबानी दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में लॉबिंग करने से लेकर खेल स्थलों की निगरानी और हाल में विकसित हो चुकी खेल सुविधाओं के परीक्षण तक उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई.

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सोची उनका पसंदीदा प्रोजक्ट है क्योंकि वह इन खेलों के रूस को दुनिया के सामने एक मज़बूत विश्व शक्ति के तौर पर पेश करने और ख़ुद को एक महान नेता के तौर पर दिखाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं.
ब्रेझनेव जिन दो बातों से डर रहे थे वे थीं लगातार बढती लागत और संभावित घोटाले. यही दोनों बातें पुतिन के ओलंपिक खेलों में सामने आई हैं.
इन खेलों के लिए स्थलों और आधारभूत ढ़ांचे पर क़रीब 50 अरब डॉलर की रकम ख़र्च हो चुकी है और इन्हें अब तक का सबसे महंगा ओलंपिक माना जा रहा है.
इन खेलों से जुड़ी गड़बड़ियों की फेहरिश्त, जो पश्चिम में सुर्ख़ियां बनती रही हैं, उतनी ही लंबी है, जितने कि सोची के स्की स्लोप्स.
इनमें भ्रष्टाचार, निर्माण कार्यों से जुड़े मज़दूरों को भुगतान नहीं होने की शिकायत, रूस में समलैंगिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर व्याप्त चिंताएं शामिल हैं.
'पैसे की बर्बादी'
मॉस्को कार्नेगी सेंटर में सीनियर एसोसिएट लिलिया श्वेत्सोवा कहती हैं, ''यह ओलंपिक पहले ही एक स्कैंडल है. ये भ्रष्टाचार, अक्षमता, अविवेक, अत्यधिक घमंड और महत्वाकांक्षाओं से घिरा हुआ है."
उन्होंने कहा, "ये एक ऐसे देश में पैसे की बर्बादी है, जो साधारण जनता के लिए बेहतर ज़िदगी भी नहीं जुटा सकता. ये मुझे मुसोलिनी और चाउशेस्कू की याद दिलाता है. उन्होंने भी ग्लैमरम प्रोजेक्ट्स बनाए, जो अब विसंगितियों के प्रतीक हैं.''

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रूसी अधिकारी इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं कि ओलंपिक के फंड में चोरी की गई या ग़लत तरीक़े से ख़र्च किया गया.
रूसी ओलंपिक कमेटी के अध्यक्ष अलेक्जेंडर झुकोव ने बताया, ''रूस के ऑडिट चैंबर और रूस के टैक्स सर्विस डिपार्टमेंट ने सोची से संबंधित भ्रष्टाचार के कोई मामले नहीं पाए हैं.''
झुकोव ये भी कहते हैं कि संरचना परियोजनाओं की लागत को ओलंपिक बिल में जोड़ना गलत होगा.
उन्होंने कहा, ''सोची के लिए कभी केवल एक सड़क इस्तेमाल होती थी. अब वहां 20 नई सड़कें बन गई हैं. वहां नया सीवेज सिस्टम, नया पॉवर स्टेशन और नई गैस पाइप लाइनें हैं. लेकिन ये ओलंपिक के ख़र्चे से अलग है. पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सोची को इन सारी संरचनाओं की ज़रूरत थी. ये आख़िरकार रूस का मुख्य रिजॉर्ट है.''
पश्चिम की खिड़की
जब सोवियत संघ ने साल 1980 में ग्रीष्मकालीन ओलिंपक की मेज़बानी की थी तब 60 से भी ज़्यादा देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत मौजूदगी के कारण इन खेलों का बहिष्कार किया था.
इस बार राष्ट्रपति पुतिन की इस 'ओलंपिक पार्टी' को कोई अंतरराष्ट्रीय बॉयकाट नहीं हो रहा है. हालांकि बहुत पश्चिम नेताओं ने सोची नहीं जाने का फ़ैसला किया है.
रूस के सरकारी टेलीविज़न के प्रस्तोता व्लादीमीर सोलोवयोव कहते हैं, ''ये हैरानी की बात होगी अगर सभी अंतरराष्ट्रीय नेता किसी एक ओलंपिक में शिरकत करें.''
उन्होंने कहा, "उनके पास कोई बेहतर काम नहीं है. यह राजनीति या राजनेताओं का अखाड़ा नहीं है. ये खेल हैं. अगर राष्ट्रपति ओबामा एथलीट होते और इन खेलों में हिस्सा नहीं लेते तो सोची ओलंपिक की छवि खराब होती."

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शुक्रवार को रूसी टेलीविज़न सोची ओलंपिक में पुतिन के व्यक्तिगत योगदान पर एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित करेगा.
इस सप्ताह इसके प्रीव्यू में राष्ट्रपति ने खुलासा किया कि किस तरह व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने ओलंपिक स्थल का चयन किया था.
क्या सेतु बनेगा सोची
इसने मुझे जार पीटर महान की याद दिला दी, जिन्होंने 300 साल पहले अपनी नई राजधानी के लिए सेंट पीटर्सबर्ग का चयन किया था.
पीटर का राजधानी को मॉस्को से सेंट पीटर्सबर्ग ले जाने का मकसद रूस को यूरोप के क़रीब लाने की कोशिश थी. नया शहर पश्चिम के लिए उनकी खिड़की थी.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोची ओलंपिक पश्चिम के साथ सेतु का काम करेगा. लेकिन लगता नहीं कि ये ओलंपिक खेल आधुनिक रूस को पश्चिम के क़रीब ला पाएगा.
लिलिया श्वेत्सोवा कहती हैं, "पुतिन ख़ुद को बनाए रखने के अपने तौरतरीक़े नहीं बदल सकते और उनका सिद्धांत पश्चिम पर नियंत्रण और रूस को परंपरागत सभ्यता के केंद्र स्थापित करना है."
वह कहती हैं, ''पश्चिमी सभ्यता के विरोध के उनके तरीक़े से हम पश्चिम से दूर ही हो रहे हैं. सोची कुछ नहीं बदल सकता.''
मैं मॉस्को से उत्तर में कुछ मील दूर मितिशी कस्बे में पहुंचता हूं, जहां एक सड़क 1980 के नाम पर 'ओलंपिक प्रॉस्पेक्ट' कही जाती है.''
दिलचस्पी

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यहां सफाई कर्मचारी सड़क पर इकट्ठा बर्फ साफ कर रहा है और स्थानीय निवासी फर के कोटों में लिपटे हुए पूर्व सोवियत दौर के अपार्टमेंट ब्लॉक्स से गुजरते हुए दुकानों या ऑफिसों की ओर आवाजाही कर रहे हैं.
मैं यहां लोगों से बातचीत करता हूं और ये पाता हूं कि उनकी सोची स्कैंडल्स में बहुत कम दिलचस्पी है.
विक्टर कहते हैं, ''मैं खेलों के शुरू होने का इंतजार नहीं कर सकता. मैं जानता हूं कि उन पर काफी धन ख़र्च हुआ है, लेकिन ये तो स्वाभाविक ही है, ओलंपिक एक अच्छी भावना है.''
राष्ट्रपति पुतिन जानते हैं कि उनके ओलंपिक ने विदेशों में विवाद पैदा किए हैं. वह अच्छी तरह वाकिफ़ हैं कि बहुत से पश्चिमी नेता इसमें शिरकत नहीं करने वाले.
लेकिन उन्हें ये भी मालूम है कि ज़्यादातर रूसी लोग टीवी सेटों से चिपके रहेंगे. उन्हें ये चिंता रहेगी कि उनका देश कितने पदक जीतेगा न कि इस शो पर कितना पैसा ख़र्च हुआ.
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