हॉकी वर्ल्ड लीगः दिल्ली में श्रेष्ठ टीमों का जमावड़ा

- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
इन दिनों दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ हॉकी टीमें जमकर अभ्यास कर रही हैं.
इन टीमों में पिछले लंदन ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता जर्मनी और पिछले विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट की विजेता ऑस्ट्रेलिया तो है ही, इनके अलावा मेज़बान भारत, इंग्लैंड, हॉलैंड, बेल्जियम, अर्जेंटीना और न्यूज़ीलैंड भी शामिल है. इन सभी आठ टीमों का उद्देश्य हॉकी वर्ल्ड लीग फ़ाइनल का ख़िताब जीतना है.
दरअसल दिल्ली में 10 जनवरी से 18 जनवरी तक हॉकी वर्ल्ड लीग का चौथा और आख़िरी दौर खेला जाएगा. इससे पहले इस लीग का पहला दौर साल 2012 में दुनिया के नौ देशों में आयोजित किया गया. इसमें 35 देशों की टीमों ने भाग लिया. इनमें से 13 टीमों ने अगले दौर के लिए जगह बनाई. इसके बाद साल 2013 में दूसरे और तीसरे दौर के मुक़ाबले खेले गए.
इसके बाद आख़िरकार इन आठ टीमों ने चौथे और फ़ाइनल दौर में खेलने का हक़ हासिल किया. इसी लीग के माध्यम से विश्व हॉकी संस्था ने इस साल होने वाले विश्वकप के लिए 12 टीमों का चुनाव किया है. इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ये लीग कितनी महत्वपूर्ण है. वैसे इसी तरह की लीग महिला वर्ग में भी आयोजित की गई.
टीम की संभावनाएँ

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए सांत्वना की बात यह रही कि उसे विश्व हॉकी संस्था की मेहरबानी से न सिर्फ़ विश्व कप में जगह मिल गई बल्कि मेज़बान होने के कारण हॉकी वर्ल्ड लीग फ़ाइनल में खेलने का मौक़ा भी मिल गया. अब अगर हॉकी वर्ल्ड लीग की बात की जाए तो इसमें भाग लेने वाली आठ टीमों को दो पूल में बांटा गया है.
'पूल ए' में जर्मनी, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और मेज़बान भारत हैं. 'पूल बी' में ऑस्ट्रेलिया, हॉलैंड, बेल्जियम और अर्जेंटीना हैं. ज़ाहिर है कि भारत को अपने से बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के ख़िलाफ़ खेलना है. भारत अपना पहला मैच 10 जनवरी को इंग्लैंड से, 11 जनवरी को न्यूज़ीलैंड से और 13 जनवरी को जर्मनी से खेलेगा.
भारतीय हॉकी टीम के नए चीफ़ कोच ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध पूर्व खिलाड़ी टेरी वॉल्श ने भारतीय टीम की संभावनाओ को लेकर बेहद ईमानदारी से कहा, "कुछ खिलाड़ी चोटिल हैं जिसका असर प्रदर्शन पर पडेगा. इसी साल विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट और एशियन गेम्स होने हैं और उसकी तैयारी करना हमारा मुख्य लक्ष्य है."
हॉकी का विकास

वॉल्श का कहना है, "विश्व कप से पहले हमें दुनिया की सबसे बेहतरीन टीमों के साथ खेलने का अवसर मिल रहा है. हम धीरे-धीरे आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे. हमारी टीम के खिलाड़ियों में कोई कमी नही है लेकिन विश्व स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए इन्हें तकनीकी रूप से मज़बूत होना ज़रूरी है लेकिन यही बात राष्ट्रीय टीम ही नहीं बल्कि जूनियर स्तर से शुरू होकर पूरे हॉकी सिस्टम पर लागू होती है."
उन्होंने कहा, "हम आने वाले महीनों में इस पर काम करेंगे क्योंकि इसी से आगे बढ़ने का रास्ता खुलेगा. हम परिणाम की चिंता किए बिना हर मैच जीतने की कोशिश करेंगे. ये बेहद महत्वपूर्ण टूर्नामेंट है लेकिन हम किस नंबर पर रहेंगे कहना मुश्किल है. हमारी सबसे बड़ी कमी गोल न कर पाना है और इस आदत को 14 से 16 साल की उम्र के खिलाड़ियों में बनाना ज़रूरी है."
टेरी वॉल्श जहां बातों ही बातों में पूरे भारतीय हॉकी सिस्टम की पोल खोल गए, वहीं उन्होंने गुरु मंत्र भी दे दिया कि भारत में हॉकी का विकास कैसे होगा.
विश्वकप की तैयारी

दूसरी तरफ भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह भी टीम की वास्तविकता से भलीभांति परिचित हैं.
सरदार सिंह ने भी साफ़-साफ़ कहा, "हम इस टूर्नामेंट को केवल सीखने के लिए या फिर बिना किसी दबाव के खेलेंगे. देश की हॉकी की वर्तमान स्थिति को देखकर हमें भी बहुत दुख होता है लेकिन हम पूरी कोशिश करेंगे कि देश को मेडल जीतकर दें. अभी तो विश्व कप की तैयारी करना हमारा मुख्य उद्देश्य है इस लीग से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा."
अब यह तो समय ही बताएगा कि आठ टीमों के बीच भारतीय टीम कहां रहती है लेकिन बिल्ली के भाग्य से छीका टूटा है यानी मेज़बान होने के नाते जब इतने बडे टूर्नामेंट में खेलने का मौक़ा मिला है तो टीम भी कुछ कर दिखाए तभी बात बने.
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