मुफ़लिसी ने सिखाई हॉकी की जादूगरी

जूनियर विश्व कप हॉकी में कॉस्य पदक जीतने के बाद रानी राजपाल (बीच में) साथियों के साथ झूम उठीं.
इमेज कैप्शन, जूनियर विश्व कप हॉकी में कॉस्य पदक जीतने के बाद रानी राजपाल (बीच में) साथियों के साथ झूम उठीं.

विश्व कप हॉकी प्रतिस्पर्धा में 38 साल बाद भारत की झोली में कोई मेडल आया है. इस सपने को हकीकत बनाने का काम किया है देश की जूनियर महिला हॉकी टीम ने और <link type="page"><caption> इस जीत का सेहरा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/08/130805_hockey_india_women_dp.shtml" platform="highweb"/></link> रानी राजपाल और नवनीत कौर के सिर बंधा है.

ये दोनों खिलाड़ी कुरुक्षेत्र ज़िले के एक छोटे से कस्बे शाहापुर मकरंडा की रहने वाली हैं. इनकी मुफलिसी ने इनके भीतर संघर्ष के जिस जज़्बे को भरा, उसके आगे टिक पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए मुश्किल है.

रानी रामपाल

वर्ल्ड कप में तीसरे स्थान के लिए इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए में भारत को शुरुआती बढ़त दिलाने के साथ ही दो गोल दागने वाली रानी रामपाल की ज़िंदगी गरीबी और अभाव में बीती है.

इसके बावजूद वह अपने संघर्ष के बलबूते आज भारतीय हॉकी की रानी बन चुकी हैं. कुरुक्षेत्र के शाहबाद मरकंडा की रहने वाली रानी के पिता तांगा चलाकर अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं.

रानी ने इससे पहले <link type="page"><caption> क्वार्टर फाइनल में स्पेन पर जीत दर्ज करने</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/08/130801_junior_hockey_india_pp.shtml" platform="highweb"/></link> में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

रानी के खेल की खासियत उनकी तेज दौड़ और उससे कदम-ताल करते हुए प्रतिपक्षी टीम पर हमले बोलने की काबिलियत है. गेंद पर उनका नियंत्रण गजब का है.

वह आमतौर पर सेंटर फॉरवर्ड पर खेलती हैं, लेकिन टीम की जरूरत के मुताबिक कहीं भी खेल सकती हैं. रानी को रॉजारियो (अर्जेंटीना) में महिला हॉकी वर्ल्ड कप में सात गोल कर सर्वश्रेष्ठ यंग फॉरवर्ड का अवॉर्ड मिल चुका है.

उन्होंने 2009 में एशिया कप के दौरान भारत को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई. वह 2010 के राष्ट्रमंडल खेल और 2010 के एशियाई खेल के दौरान भारतीय टीम का हिस्सा थीं.

नवनीत कौर

जूनियर महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी खुशियाँ मनाती हुईं.
इमेज कैप्शन, जूनियर महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी खुशियाँ मनाती हुईं.

इस मैच में निर्णायक गोल करने वाली नवनीत कौर के बारे में उनके प्रशंसक कहते हैं कि मैदान में उनकी फुर्ती देखकर लगता है कि जैसे वो कोई रोबोट हों.

जीवन के 16 बसंत देख चुकी नवनीत जब पाँच साल की थी, तभी उन्होंने हॉकी को थाम लिया था और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने हाकी प्रशिक्षण शाहाबाद में हॉकी के जानेमाने कोच बलदेव सिंह से लिया.

नवनीत ने जूनियर विश्व कप के लिए जर्मनी जाने से पहले कहा था कि वह सबसे ज्यादा गोल करेंगी.

विश्व कप के दौरान शानदार प्रदर्शन और अपने निर्णायक गोल से टीम को जीत दिलाकर उन्होंने अपने वादे को पूरा किया है.

नवनीत फारवर्ड हॉकी खिलाड़ी हैं और उनके खेल में हॉकी की कलात्मकता का भरपूर समावेश है. अगर उन्हें मैदान पर डी के पास गेंद मिल जाए तो उसे गोल में तब्दील होने से रोकना विरोधी टीम के लिए काफी मुश्किल है. रानी रामपाल और नवनीत कौर दोनों से भारतीय हॉकी को काफी उम्मीदें हैं.

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