हार जाता तो शायद उबर ना पाता: मरे

- Author, एंडी मरे
- पदनाम, विंबलडन विजेता,2013
मैंने जब विंबलडन की ट्रॉफ़ी देखी तो मुझे लगा कि उस पर मेरा नाम नहीं है. मैं समझ नहीं पाया कि ये क्या हो रहा है.
सेंटर कोर्ट पर उस ऐतिहासिक ट्रॉफ़ी को उठाना एक अद्भुत अहसास था लेकिन जब मैं विजेताओं की सूची देख रहा था तो उसमें मेरा नाम कहीं नहीं दिखा.
ऐसा लगता है कि इतने सालों में विजेताओं के नाम लिखते-लिखते जगह ही नहीं बची है. मेरा नाम सबसे आख़िर में लिखा गया है लेकिन ये तो तय है कि मेरा नाम वहाँ पर है.
चैंपियंस डिनर के बाद मुझे सोने के लिए सिर्फ़ डेढ़ घंटा नसीब हुआ लेकिन सुबह उठकर उस विंबलडन ट्रॉफ़ी के बगल में बैठकर नाश्ता करना यथार्थ से परे जैसा एक अनुभव था.
इस प्रतियोगिता का इतना वृहद इतिहास रहा है, जिसे मैं बचपन में समझ नहीं पाता था. विंबलडन जीतने की चाहत ज़रूर थी लेकिन ये पता नहीं था कि इतने सालों में यहां पर क्या-क्या हुआ है.
जब आप सेंटर कोर्ट की तरफ़ जाते हैं तो तकरीबन 1920 से लेकर अब तक के सभी विजेताओं की तस्वीरें लगी हुई हैं और हर उस मैच को याद करना एक दबाव पैदा करता है. अब ये सोच कर बहुत अच्छा लगता है कि मैं भी उनमें से एक हूं.
यक़ीन जानिए विंबलडन प्रतियोगिता से एक हफ़्ते पहले ही मैं अपनी टीम से विंबलडन म्यूज़ियम के बारे में बात कर रहा था. उन्होंने कहा कि वो मुझे ले जाएंगे क्योंकि वो काफ़ी अच्छा है.
मैंने ट्रॉफ़ी हाथ में लेकर फ्रेडी पेरी के साथ तस्वीर भी खिंचवाई. वो एक महत्वपूर्ण पल था. हम सभी जानते हैं कि वह टेनिस की दुनिया की कितनी बड़ी शख़्सियत हैं और मेरे पूरे टेनिस करियर में मुझे उनकी याद दिलाई जाती रही है.

पेरी निश्चित तौर पर एक महान खिलाड़ी थे लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि हमें नया चैंपियन मिलने में अब उतना वक्त नहीं लगेगा.
फ़ाइनल मुक़ाबला मानसिक तौर पर मेरे लिए अब तक का सबसे ज़्यादा मुश्किल मैच था. मेरे दिमाग़ में बस यही चल रहा था कि यही वो जगह है जहाँ मैं पहले सर्व पर पहला प्वाइंट लूँगा. ये बात मैं बहुत अच्छी तरह से समझता हूं कि आँकड़ों पर उसका क्या असर होता है जब आप सर्व पर पहला प्वाइंट जीतते हैं. मैं सिर्फ़ उसी पर ध्यान लगा रहा था.
जब स्कोर 40-30 पर पहुंचा तब मैं वाकई नर्वस महसूस कर रहा था. ख़ासकर जब नोवाक ने ब्रेक प्वाइंट बनाया तो वो डरावना था. मैं ये ज़रूर कहना चाहूंगा कि अगर मैं हार जाता तो पता नहीं उबर पाता या नहीं.
उससे बाहर निकलना राहत की बात थी और कह नहीं सकता कि मैं दोबारा कभी उस तरह का दबाव महसूस करूंगा या नहीं.
मैं जब से विंबलडन के लिए आने लगा हूं तब से बहुत कुछ बदल चुका है. ज़ाहिर है अपेक्षाएं और दिलचस्पी भी बहुत ज़्यादा बढ़ गई है. इन बातों से निपटना थोड़ा मुश्किल है. जब मैं छोटा था तो ग़ुस्सा आता था क्योंकि उतनी परिपक्वता नहीं थी कि उन बातों को समझ सकूं.
ये बात वाकई परेशान करती है जब अनजाने लोग आपकी बुराई करते हैं. लोग जब आपके, परिवार के बारे में और आपके आस-पास के लोगों के बारे में बातें करते हैं तो ये मानसिक तौर पर चुनौतीपूर्ण होता है.
कई बार आप ख़ुद पर शक़ करने लग जाते हैं. क्या मैं सही लोगों के साथ काम कर रहा हूं क्या मैं सही जगह से ट्रेनिंग ले रहा हूं क्या मेरा कोच सही है ये सब आसान नहीं होता. हालांकि अच्छी बात ये है कि शायद अब मैं अपनी इस टीम के साथ करियर के अंत तक काम कर पाऊंगा.
इस सबके बीच में मुझे एक बात का अहसास और हुआ है कि परिवार बहुत मायने रखता है. जब आप 35 या 40 साल की उम्र के लोगों के साथ काम करते हैं तो वो 40 हफ़्ते तक अपने परिवार से दूर रहना नहीं चाहते.
मैंने अपने कोच मार्क पेची के साथ काम करना शुरू किया तो हमारे बीच एक अच्छा तालमेल बना. वह बहुत अच्छे इंसान हैं और मेरा उनके साथ अच्छा रिश्ता बन गया है. जब मैं लंदन में था तो उनके ही परिवार के साथ रहा और हमने साथ में यात्राएं की लेकिन बाद में वह अपने परिवार के साथ रहना चाहते थे.

मुझे ये समझ आ गया कि जब मेरे साथ के लोगों के बच्चे होते हैं तो वो 40 हफ्ते के लिए बाहर रहना नहीं चाहते. पहले लोगों को लगता था कि मैं अपने आस-पास लोगों की टीम क्यों रखता हूं लेकिन अब बाक़ी खिलाड़ी भी ऐसा ही कर रहे हैं. उम्मीद है हम साथ में मिल कर कुछ और ग्रैंड स्लैम ख़िताब जीत पाएंगे मगर कितने ये नहीं कह सकता.
अगर मैं नंबर एक रैंकिंग हासिल कर पाता हूं तो वो बहुत अच्छा होगा लेकिन मेरी नज़र अब ग्रैंड स्लैम जीतने पर ही टिकी है. मैं बड़े मुकाबले जीतने की कोशिश करूंगा. रैंकिंग अगर आनी होगी तो आ जाएगी.
मैं समझता हूं कि दबाव बहुत ज़्यादा होगा लेकिन शायद पिछले सालों के मुकाबले ये कुछ भी नहीं है.
पूरी उम्मीद है कि दर्शक मुझे वैसा ही हौसला देंगे जैसा उस रविवार को दिया था जब मैने विंबलडन का सबसे बेहतर क्षण महसूस किया. मैं हमेशा से कहता आया हूं कि दर्शकों के हौसले से बहुत मदद मिलती है. मैं सबको धन्यवाद देना चाहता हूं.
उम्मीद है कि अगले साल भी हम इसे दोहरा पाएंगे लेकिन उस सबसे पहले फ़िलहाल वक्त है कुछ आराम करने का है.
(बीबीसी स्पोर्ट्स के पियर्स न्यूबेरी से बातचीत पर आधारित)
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