'गेंदबाज़ फिक्सिंग कर रहे थे, बल्लेबाज़ों का क्या?'

‘अगर गेंदबाज़ को सट्टेबाज़ों ने फिक्स किया हुआ था, तो बल्लेबाज़ क्या कर रहा था?’
ये सवाल उठाया दिल्ली की एक अदालत ने जहां स्पॉट फिक्सिंग के मामले में गिरफ्तार हुए खिलाड़ियों को गुरुवार को पेश किया गया था.
खिलाड़ियों के वकीलों से सवाल करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायधीष विनय कुमार खन्ना ने कहा, “अगर गेंदबाज़ को सट्टेबाज़ों ने फिक्स किया हुआ था, तो बल्लेबाज़ क्या कर रहा था? ऐसा कैसे हो सकता है कि गेंदबाज़ 13 रन दे रहा था और बल्लेबाज़ भी उतने ही रन बना रहा था? तब क्या होता अगर वो बल्लेबाज़ उतने रन नहीं बना पाता?”
इसके बाद उन्होंने पूछा, “जब चव्हाण गेंदबाज़ी कर रहा था, तो बल्लेबाज़ क्या कर रहा था? कुछ तो बल्लेबाज़ के नियंत्रण में भी होगा क्योंकि रन तो उसने ही बनाए. ऐसा कैसे हो सकता है कि बल्लेबाज़ की भूमिका के बिना ही गेंदबाज़ निर्धारित रन दे दे.”
पिछली 16 मई को दिल्ली पुलिस ने श्रीसांत और राजस्थान रॉयल्स टीम के सदस्य अजीत चंडीला के साथ चव्हाण को आईपीएल में स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप में मुंबई से गिरफ़्तार किया था.
सबूत
राजस्थान रॉयल के क्रिकेटर अंकित चव्हाण की ज़मानत पर कोर्ट में चल रही बहस के दौरान न्यायधीष विनय कुमार ने ये टिप्पणी की.
सरकारी वकील राजीव मोहन और दूसरे पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि वे दूसरे खिलाड़ियों या बल्लेबाज़ों की भूमिका पर भी जांच कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि चव्हाण फिक्सिंग में संलिप्त थे.
चव्हाण की ज़मानत का विरोध करते हुए राजीव मोहन ने कहा कि कि उन्होंने 15 मई को मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेले गए मैच में 13 रन देने का वायदा किया था.
उन्होंने अदालत को बताया कि उनके पास ऐसी फोन रिकॉर्डिंग है जिसमें बातचीत से पता चलता है कि अंकित 60 लाख रुपयों के लिए 13 रन देने को तैयार हैं.
राजीव मोहन ने कहा, “जब अंकित ने निर्धारित ओवर में उतने रन दिए, तो अजीत चंडीला ने एक फिक्सर को बधाई देते हुए फोन पर कहा कि अंकित ने अपना काम कर दिया है और अब उसे पैसे मिलने चाहिए.”
उनके इस दावे के बाद अदालत ने उनसे बल्लेबाज़ों की भूमिका के बारे में सवाल किए.
सुनवाई के बाद क्रिकेटर अंकित चौहान को उनकी शादी के लिए छह जून तक के लिए ज़मानत दे दी है.
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