ओलंपिक: क्यों हुई भारतीय हॉकी टीम की दुर्गति

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- Author, पंकज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन से
भारतीय हॉकी टीम ने लंदन ओलंपिक में अपने सबसे बुरे प्रदर्शन से खुद को और देश को शर्मसार किया है. हालत यह है कि अब उसे खुद को सबसे नीचे 12वें स्थान पर रहने की शर्मिंदगी से बचाना है.
भारत पांच में से एक भी मैच नहीं जीता है. बेल्जियम जैसी टीम ने भी उसे 0-3 से धो दिया है.
हॉकी टीम के शर्मनाक प्रदर्शन के लिए अलग-अलग कारण दिए जा रहे हैं. लेकिन प्रदर्शन और आंकडे़ देखने के बाद साफ हो जाता है कि टीम हॉलैंड के खिलाफ एक मैच को छोड़कर बाकियों में कहीं मुकाबले में नहीं थी.
लगातार पांच मैच हारने वाली यह टीम सिर्फ छह गोल ही कर पाई. जबकि विपक्षी टीमों ने उस पर 18 गोल किए हैं.
इनमें 11 मैदानी गोल थे जो समझने के लिए काफी है कि भारतीय टीम की डिफेंस कैसा खेली. इनमें छह गोल पेनल्टी कॉर्नर से हुए. जबकि भारतीय खिलाड़ी पेनल्टी कॉर्नर से सिर्फ दो ही गोल बना सके.
लेवल ही नहीं था
बीबीसी से बातचीत में कोच माइकल नॉब्स ने माना, “ हमारा स्तर बाकी टीमों के बराबर नहीं था. मेरा मानना है कि सभी को आत्ममंथन करने की जरुरत है. मेरी टीम को गेंद को गोल में डालने की अपनी क्षमता को और मजबूत करना होगा. टीम के सभी खिलाड़ियों को अपने खेल का आंकलन करना चाहिए.”
टीम से स्टार खिलाड़ी सरदार सिंह ने कहा, “ जो गलतियां पहले मैच में हुईं थी, टीम ने वही बार-बार दोहराईं. टीम को इसी का खामियाजा भुगतना पड़ा है. हमारी फिनिशिंग बिलकुल भी अच्छी नहीं थी. ”
फॉरवर्ड की नाकामी
सरदार सिंह ने बताया, “ कोच ने पहले मैच के बाद फिनिशिंग को लेकर हर खिलाड़ी के साथ अलग-अलग सेशन किया था. फॉरवर्ड को बताया गया था कि जो क्रॉस गोलपोस्ट के सामने मिल रहे हैं उन्हें गोल में कैसे बदलना चाहिए है. लेकिन कोई भी फॉरवर्ड इस पर अमल करने में नाकाम रहा.”
वहीं गोलकीपर भरत छेत्री ने कहा, “ हमने कभी नहीं सोचा था कि हम एक भी मैच नहीं जीत पाएंगे. हम पहला मैच अच्छा खेले लेकिन दूसरे में प्रदर्शन डाउन हो गया. टीम एक समर्पित खेल दिखाने में नाकाम रही. हम से गोल ही नहीं हुए. इतने बड़े टूर्नामेंट में गोल नहीं होंगे तो जीतना मुश्किल हो जाता है.”
किस्मत की मार
फॉरवर्ड लाइन की नाकामी टीम के ऐसे प्रदर्शन का सबसे बड़ा कारण रही. इस बारे में पूछे जाने पर शिवेंदर सिंह ने किस्मत की दुहाई दी
शिवेंदर ने कहा, “ हमारे काफी चांस मिस हुए. हमारा आंकलन है कि कई मौकों पर गेंद गोल पोस्ट के पोल से लग कर वापिस आ गई. इसके अलावा कई मौकों पर गोलकीपर भी जबरदस्त बचाव कर गया. ”
शिवेंदर ने कहा, “ हमारे तालमेल में कोई कमी नहीं थी. हमें कई मौके मिले. पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन हम इसे गोल में बदलने में नाकाम रहे. यकीनी तौर पर हमारी तैयारी में कमी रही होगी तभी हम सारे मैच हारे हैं. ”
भारत को अब सबसे आखिरी 12वें स्थान पर रहने की शर्मिंदगी से बचने के लिए 11 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीतना ही होगा.












