एलबीडब्ल्यू फ़ैसलों पर पुनर्विचार नहीं

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आगामी भारत-इंग्लैंड टेस्ट सिरीज़ के दौरान डीआरएस के तहत माने जाने वाले नियमों पर बीसीसीआई और इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) सहमत हो गए हैं. डीआरएस अंपायरों के फ़ैसले की समीक्षा करने वाली प्रणाली है.

<link type="page"><caption> भारत-इंग्लैंड सिरीज़ पर विशेष</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/india_englandseries_va.shtml" platform="highweb"/></link>

इस टेस्ट और वनडे श्रृंखला के दौरान खिलाड़ी एलबीडब्ल्यू से संबंधित फ़ैसलों पर पुनर्विचार के लिए अंपायर से अपील नहीं कर पाएँगे. लेकिन हाल ही में पारित हुए आईसीसी के निर्णय के मुताबिक इंग्लैंड सिरीज़ में इन्फ़्रा रेड तकनीक और स्टंप माइक्रोफ़ोन इस्तेमाल किए जाएँगे.

डीआरएस के तहत कई नए प्रावधानों को लागू किया गया है लेकिन भारत सब पहलुओं को मानने पर राज़ी नहीं है. जबकि ईसीबी डीआरएस के पूर्ण इस्तेमाल के लिए तैयार है जिसमें बॉल ट्रेकिंग तकनीक भी शामिल है.

आईसीसी बोर्ड कह चुका है कि बॉल ट्रेकिंग तकनीक तभी इस्तेमाल की जा सकती है अगर दोनों पक्ष इसके लिए तैयार हो जाते हैं.

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी हारून ल ने इस बारे में कहा, हम इस बात को लेकर निराश हैं कि अंपायर की मदद के लिए डीआरएस का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं किया जाएगा लेकिन हमें ख़ुशी भी है कि ईसीबी और बीसीसीआई डीआरएस के कुछ पहलुओं को अपनाने के लिए तैयार हैं.

पिछले महीने जून में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड आईसीसी के डीआरएस के संशोधित मसौदे को अनिवार्य रुप से अपनाने पर सहमत हुआ था

वर्ष 2008 से ही डीआरएस के तहत कई तकनीकों को शामिल किया गया था लेकिन भारत इस पर राज़ी नहीं हो रहा था..