धोनी टीम को फ़ाइनल में पहुंचाने के बाद और अगले साल आईपीएल खेलने पर क्या बोले?

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- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मंगलवार की रात चेपॉक मैदान पर केवल गुजरात टाइटंस के डग आउट को छोड़ कर पूरा स्टेडियम पीले रंग से नहाया हुआ था.
बार-बार धोनी-धोनी के शोर से स्टेडियम गुंजयमान हो रहा था.
टॉस से पहले, बैटिंग के दौरान, प्रेज़ेंटेशन के समय - वो हर मौक़ा जब धोनी सामने हों तो उसी चिर परिचित अंदाज में उनके नाम की गूंज हो रही थी.
ये वो गूंज थी जिससे क्रिकेट का हर चाहने वाला भली भांति परिचित है.
इस आईपीएल के दौरान फ़ैन्स धोनी के रिटायरमेंट की अटकलें लगा रहे हैं.
इस बार का टूर्नामेंट होम-अवे फ़ॉर्मेट में खेला गया तो धोनी जहां भी जाते, देश के हर स्टेडियम में धोनी-धोनी की गूंज और पीली जर्सी का सैलाब उमर पड़ता.
बीती रात गुजरात टाइटंस को पहली बार आईपीएल में हराने और इस सीज़न के फ़ाइनल में पहुंचने के बाद जब वे प्रेज़ेंटेशन के दौरान बतौर कप्तान बात करने पहुंचे तो एक बार फिर यही सवाल कमेंटेटर की ज़ुबान पर था और इस बार पूछने वाले हर्ष भोगले थे.
उन्होंने पूछा कि क्या चेन्नई के दर्शक आपको फिर यहां देखेंगे. तो धोनी बोले कि आप ये पूछना चाह रहे हैं कि क्या मैं यहां फिर खेलूंगा या नहीं?

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क्या अगले साल खेलेंगे धोनी?
तो हर्ष भोगले ने पूछा कि क्या आप यहां आकर फिर खेलेंगे?
इस पर धोनी मुस्कुराते हुए बोले, "मैं नहीं जानता हूं. मेरे पास आठ-नौ महीने हैं इस फ़ैसले के लिए. दिसंबर के आस-पास एक छोटा ऑक्शन होगा तो वो सिरदर्दी अभी से क्यों लें. मेरे पास फ़ैसला लेने के लिए पर्याप्त समय है. लेकिन एक बात स्पष्ट है कि चाहे मैं बतौर खिलाड़ी रहूं या कहीं किसी रूप में उनके साथ बैठा रहूं, जो मैं नहीं जानता, मैं सीएसके के साथ बना रहूंगा."
"मैं 31 जनवरी से घर से बाहर हूं. दो या तीन मार्च से प्रैक्टिस कर रहा हूं, तो देखते हैं, फ़िलहाल मेरे पास बहुत समय है ये फ़ैसला लेने के लिए."
इसी आईपीएल के दौरान जब धोनी से अगले साल खेलने को लेकर सवाल पूछा गया था तब उन्होंने क्या कहा था?
इसी सीज़न के (45वें मैच) के दौरान जब टॉस के बाद कमेंटेटर डैनी मॉरिसन ने उनसे उनके रिटायरमेंट पर सवाल पूछा था. उससे पहले मॉरिसन ये भी बोले कि "आख़िरी सीज़न में धोनी को हर एक मैदान पर सपोर्ट मिल रहा है" और फिर माही से पूछे कि आप इसे कैसे एन्जॉय कर रहे हैं तो कैप्टन कूल ने मुस्कुराते हुए कहा था, "यानी आपने तय कर लिया है कि ये मेरा आख़िरी सीज़न है."
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तब मुस्कुरा कर चले गए थे धोनी...
इस पर मॉरिसन ने कहा था कि 'इसका मतलब है आप वापस आ रहे हैं'. वे अपनी दाईं तरफ़ मुड़े और स्टेडियम में बैठे दर्शकों से मुख़ातिब होते हुए बोले, धोनी वापस आएंगे, अगले साल भी.
धोनी मुस्कुरा कर वहां से वापस चले गए.
वैसे ये सवाल न तो धोनी के लिए नया है और ना ही कमेंटेटर्स के लिए. ये सवाल उनसे 2020 में भी पूछा गया था, तब धोनी ने ख़ुद ये कहा था कि उनका आख़िरी आईपीएल मैच चेन्नई में होगा.
उनकी बातों के मुताबिक़ चलें तो ये आईपीएल क़तई उनका आख़िरी आईपीएल नहीं है, लेकिन उनके घुटने में बहुत चोट है, जिसका ज़िक्र इस आईपीएल के दौरान बार-बार होता रहा है. यहां तक कि पूर्व क्रिकेटर इरफ़ान पठान ने तो कमेंट्री के दौरान ये तक कहा है कि उन्हें बहुत तकलीफ़ हो रही है.

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इन सब के बावजूद इरफ़ान बार-बार ये कहते रहे हैं कि अब तो आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर का नया रूल आ गया है तो धोनी अगले साल भी खेल सकते हैं.
तो धोनी के रिटायरमेंट को लेकर कयास लगाए जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है और ये हर उस मैच में होता है जिसमें धोनी होते हैं.

धोनी की कप्तानी का नमूना इस मैच में भी दिखा जब...
धोनी की ये चर्चा इसलिए होती रही है कि बहुत बड़ी संख्या में उनके चाहने वाले हैं.
उनकी क्रिकेट खेलने और कप्तानी के फ़ैसले के दीवाने हैं लोग.
यही कप्तानी चेपॉक पर बीती रात भी दिखी जब हार्दिक पंड्या की मज़बूत गुजरात टाइटंस के सामने केवल 173 रनों का लक्ष्य रख सकी चेन्नई सुपर किंग्स.
रिद्धिमान साहा के आउट होने के बाद जब हार्दिक पंड्या आ गए थे और कुछ रन जुटा लिए थे, तो विकेट के पीछे से धोनी ने अपने खिलाड़ियों की फ़ील्डिंग पोज़िशन में बदलाव किया.
अचानक एक फ़ील्डर को ऑन साइड से बुला कर ऑफ़ साइड पर लगा दिया. बल्लेबाज़ी कर रहे विपक्षी कप्तान पर दबाव बना और वो विकेट गंवा बैठे.
मैच के बाद अपनी फ़ील्डिंग प्लेसमेंट पर धोनी बोले भी, "आप विकेट और कंडीशन को देखकर फ़ील्डिंग में बदलाव करते रहते हैं. मैं बहुत परेशान करने वाला कप्तान हो सकता हूं क्योंकि मैं अपने फ़ील्डर्स को एक दो फ़ीट इधर-उधर बदलता रहता हूं."
"तो मैं अपने खिलाड़ियों को बोलता हूं कि मुझ पर नज़र रखें. मैं हर दो-तीन गेंद पर उन्हें उनके दाएं-बाएं खिसका देता हूं. मैच के दौरान मैं अपनी गट-फ़ीलिंग से अपने फ़ील्डर्स को एडजस्ट करता हूं और कई बार इससे सकारात्मक नतीजे भी आते हैं."

फ़ाइनल में पहुंचने पर पूछे गए सवाल पर धोनी क्या बोले?
टीम को दसवीं बार फ़ाइनल में पहुंचाने के बाद धोनी से पूछा गया कि क्या ये सिर्फ़ एक और फ़ाइनल की तरह है तो उन्होंने कहा, "ये सिर्फ़ एक और फ़ाइनल की तरह नहीं है. पहले यहां दुनिया भर के बेहतरीन क्रिकेटर्स से सजी आठ टीमें होती थीं अब 10 हैं तो अब पहले से अधिक मुश्किल है.''
''मैं इसे एक और फ़ाइनल जैसा नहीं कह सकता हूं, लेकिन ये दो से अधिक महीने की कठिन मेहनत का नतीजा है. जिसकी वजह से हम आज यहां खड़े हैं. जब से हमने ये सफ़र शुरू किया है तब से अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग किरदारों में टीम के लिए भूमिका अदा की है."
"इसमें हर व्यक्ति ने अपना योगदान दिया है. मध्यक्रम को बहुत मौक़ा नहीं मिला, लेकिन सभी को प्रदर्शन करने का मौक़ा मिला और उन्होंने बख़ूबी किया भी. तो हम जहां पहुंचे हैं उससे बेहद ख़ुश हैं."
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जडेजा पर क्या बोले माही?
धोनी से पूछा गया, "आज आप पहले गेंदबाज़ी करना चाहते थे."
इस पर धोनी बोले, ''क्योंकि गुजरात टाइटंस चेज़ करने में बहुत अच्छी टीम है, लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि ये टॉस हारना अच्छा था क्योंकि अंतिम कुछ ओवरों में थोड़ी ओस थी तो गेंद थोड़ी अच्छी डाली जा रही थी.''
''लेकिन मिडिल ओवर्स में जड्डू ने मैच बदल दिया. अगर जड्डू को वो कंडीशन मिल जाए जिससे उनको मदद मिलती है तो उनकी गेंद पर रन बनाना बहुत मुश्किल होता है."
"मैं कहना चाहूंगा कि मैच के मिडिल ओवर्स के उस आधे घंटे की उनकी बॉलिंग ने वाक़ई मैच को बदल दिया. हमें जड्डू और मोइन के बीच बल्लेबाज़ी के दौरान हुई साझेदारी को नहीं भूलना चाहिए. धीमी विकेट पर हर रन ज़रूरी है."
मैच के बाद हार्दिक ने कहा, "धोनी जिस तरह से कप्तानी करते हैं, उससे टारगेट 10 रन अधिक हो जाता है. मैं उनके लिए ख़ुश हूं, उम्मीद है हम रविवार को फ़ाइनल में उनसे भिड़ेंगे."

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चेन्नई सुपर किंग्स की सफलता की कहानी
चेन्नई सुपर किंग्स चार बार की चैंपियन है. पहली बार चेन्नई सुपर किंग्स ने 2010 में इस ट्रॉफ़ी को हासिल किया था.
इसके अगले साल 2011 में एक बार फिर वो चैंपियन बनी. टीम ने 2018 और 2021 में तीसरी और चौथी बार आईपीएल का ख़िताब हासिल किया.
कुल मिलाकर चेन्नई सुपर किंग्स चार बार तो मुंबई इंडियंस पांच बार आईपीएल जीती हैं.
लेकिन बीते वर्ष यही चेन्नई सुपर किंग्स की टीम टीम 9वें पायदान पर रही थी, जबकि मुंबई इंडियंस 10वें स्थान पर थी.
इस साल मुंबई इंडियंस जहां फ़ाइनल के मुहाने पर खड़ी है, वहीं चेन्नई सुपर किंग्स को फ़ाइनल का टिकट मिल गया है.
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आख़िर इस साल उनके प्रदर्शन में निखार कैसे आ गया?
दरअसल चेन्नई सुपर किंग्स के टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ों ने इस आईपीएल के लगभग हर मैच में प्रदर्शन किया है.
ख़ास कर इसकी सलामी जोड़ी ने आख़िरी लीग मैच में दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ शतकीय साझेदारी निभाई और एक हफ़्ते से भी कम समय में इसने गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ अर्धशतकीय साझेदारी निभा दी.
डेवन कॉनवे और ऋतुराज गायकवाड़ अच्छी शुरुआत देते हैं. दोनों आईपीएल में अब तक चार शतकीय साझेदारी निभा चुके हैं. जबकि इस मैच में दोनों ने पहले विकेट के लिए 87 रन जोड़े, जो इनकी 21वीं अर्धशतकीय साझेदारी है.
कॉनवे 15 मैचों में 52.08 की औसत से 625 रन बना चुके हैं तो गायकवाड़ ने इतने ही मैचों में 43.38 की औसत से 564 रन जुटाए हैं.
इसके अलावा शिवम दुबे 384 रन तो अजिंक्य रहाणे 299 रन बना चुके हैं.
दुबे तो सबसे अधिक छक्के जड़ने के मामले में डुप्लेसी (36 छक्के) के बाद दूसरे स्थान (33 छक्के) पर हैं.
डुप्लेसी (आठ) के बाद कॉनवे ने सबसे अधिक छह अर्धशतक जमाए हैं.

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इस मुक़ाबले में अपनी 60 रनों की पारी की बदौलत 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' रहे गायकवाड़ से जब पूछा गया कि वो पहले डुप्लेसी के साथ और अब कॉनवे के साथ इतनी अच्छी साझेदारी निभा कैसे लेते हैं?
इस पर गायकवाड़ ने कहा, "हम एक-दूसरे की ताक़त और कमी को बख़ूबी जानते हैं."
यही इन दोनों की बल्लेबाज़ी के दौरान देखने को भी मिलता है. गुजरात के साथ प्लेऑफ़ के इसी मैच में जब शमी की गेंदों पर डेवन कॉनवे शुरुआती ओवरों में परेशान होते दिख रहे थे तो ऋतुराज गायकवाड़ ने आगे बढ़ कर कमान संभाल ली.
इन दोनों के बाद शिवम दुबे, रहाणे और कुछ मैचों में रायुडु ने कमान संभाली है तो अंत में धोनी और जडेजा रन गति को अचानक बढ़ा दे रहे हैं.

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टीम को लेकर धोनी ने क्या प्रयोग किए
वहीं इस सीज़न में चेन्नई सुपर किंग्स की गेंदबाज़ी भी अच्छी रही.
अन्य टीमों की तुलना में चेन्नई सुपर किंग्स के प्रदर्शन में एकरूपता अधिक दिखी है. टूर्नामेंट के 10 मैचों में धोनी ने वही प्लेइंग इलेवन रखा. इससे खिलाड़ियों का टीम में बने रहने को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा.
अगर ओपनर्स की बात करें तो वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. यहां तक कि रहाणे ने भी शुरू के मैचों में कुछ विस्फोटक पारियां खेलीं.
इस टीम ने पावरप्ले के बाद के 10 ओवरों में बहुत बेहतरीन गेंदब़ाजी का प्रदर्शन किया है. यानी 7 से 16 ओवरों के दौरान इनकी गेंदबाज़ी का औसत साढ़े सात के आसपास रहता है जो टी20 के लिहाज से बहुत अच्छा माना जाएगा.
वहीं अंतिम पांच ओवरों में भी चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाज़ महंगे नहीं साबित हुए हैं, जहां इनकी इकोनॉमी 10 रन प्रति ओवर से कम है.
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