चेन्नई की जीत के बाद भी धोनी को इस बात का मलाल

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- Author, नवीन नेगी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में 'धोनी-धोनी' की गूंज उठ रही थी, मैच ख़त्म हो चुका था, लेकिन जनता अपनी जगह से टस से मस नहीं हो रही थी.
हाथों में 'वी लव माही' का पोस्टर थामे कई फैंस हसरत भरी निगाहों से कैमरे की तरफ देख रहे थे.
इस बीच धोनी ने माइक थामा और कहा- 'मैं अपने करियर के अंतिम पड़ाव में हूं, और खेल का लुत्फ़ उठा रहा हूं.'
उनके इतना कहते ही मैदान में शोर का डेसिबल प्वाइंट और ऊपर उठ गया.
वैसे ये शोर यूं ही नहीं था, सनराइजर्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ शुक्रवार को 41 साल के धोनी ने अपनी चालाक कप्तानी का शानदार मुज़ाहिरा पेश किया.
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धोनी ने बताया उन्हें किस बात का मलाल
हैदराबाद के ख़िलाफ़ मैच में धोनी बैटिंग करने के लिए मैदान में नहीं उतर सके, कई क्रिकेट प्रेमियों को इस बात का मलाल रह गया होगा.
लेकिन मैच में एक चीज़ का मलाल धोनी को भी रहा, जिसका ज़िक्र उन्होंने मैच के बाद किया.
प्रेजेंटेशन सेरेमनी में धोनी ने मज़ाकिया लहज़े में कहा कि वो इस बात से खुश नहीं हैं कि उन्हें 'कैच ऑफ़ द मैच' का अवॉर्ड नहीं मिला, जबकि उन्होंने विकेट के पीछे हैदराबाद के कप्तान एडन मारक्रम का कैच पकड़ा था.
धोनी ने पूरी बात कुछ इस अंदाज़ में कही, 'उन्होंने मुझे बेस्ट कैच का अवॉर्ड नहीं दिया. बस इसलिए क्योंकि हम ग्लव्स पहनते हैं तो लोगों को लगता है कि यह काम आसान है. मुझे लगता है कि मैंने वो शानदार कैच पकड़ा था. मुझे एक बहुत पुराना मैच आज भी याद है, तब राहुल द्रविड़ कीपिंग कर रहे थे और उन्होंने भी ऐसा ही कैच पकड़ा था. '

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इसके बाद धोनी से विकेट के पीछे उनकी तेज़ी और उम्र से जुड़ा सवाल किया गया तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर का ज़िक्र करते हुए कहा, 'जब आप बूढ़े होने लगते हैं तो आप अनुभवी होते जाते हैं. बस आप सचिन पाजी ना हों जिन्होंने 16-17 साल से खेलना शुरू कर दिया था. हां मैं बूढ़ा हो रहा हूं और यह बोलने में मुझे कोई शर्म नहीं है.'
कैच ऑफ़ द मैच का अवॉर्ड दरअसल ऋतुराज गायकवाड़ को दिया गया, जिन्होंने हैरी ब्रूक और हेनरिक क्लासेन के दो कैच पकड़े थे.
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धोनी की चाल और बेबस हैदराबाद
टॉस हारने के बाद हैदराबाद की टीम इस उम्मीद से मैदान में उतरी कि वो एक बड़ा स्कोर खड़ा करके चेन्नई के गढ़ में सेंध मारने में कामयाब रहेंगे.
सलामी बल्लेबाज़ हैरी ब्रूक और अभिषेक शर्मा ने इसकी शुरुआत भी कर दी थी. शुरुआती चार ओवर में उन्होंने चार चौके और एक छक्के के साथ 34 रन बना लिए थे.
लेकिन विकेट के पीछे खड़े महेंद्र सिंह धोनी कुछ अलग ही रणनीति बना रहे थे.
पांचवा ओवर डालने आए युवा गेंदबाज़ आकाश सिंह से उन्होंने कुछ बात की, फिर बैकवर्ड प्वाइंट पर एक फील्डर लगाया और इस ओवर की दूसरी ही गेंद पर ख़तरनाक बैटर हैरी ब्रूक महज़ 18 रन बनाकर ठीक उसी जगह पर कैच आउट हो गए.

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जडेजा का जादू चला
धोनी की कप्तानी के साथ मैच में जडेजा की फिरकी का जादू भी देखने को मिला.
टाइम आउट के दौरान धोनी ने जडेजा से लंबी बात की और उन्हें विकेट टू विकेट गेंद डालने के लिए कहा.
इसका असर भी तुरंत दिखा और टाइम आउट के तुरंत बाद अभिषेक शर्मा लॉन्ग ऑन पर 34 रन बनाकर चलते बने.
जडेजा ने इसके बाद टिककर खेल रहे राहुल त्रिपाठी को 21 रनों के निजी योग पर आउट किया. और फिर धोनी के हाथों मयंक अग्रवाल को स्टम्प आउट किया.
मैन ऑफ़ द मैच बने जडेजा ने बताया कि उन्होंने सोच रखा था कि वो फुल गेंद नहीं डालेंगे.
हैदराबाद की पारी की आखिरी गेंद पर भी धोनी ने अपनी तेज़ी और चालाकी दिखाई जब उन्होंने एक हाथ के दस्ताने को पहले ही निकालकर रख लिया और जैसे ही गेंद उनके हाथों में आई उन्होंने सटीक निशाना लगाकर विपक्षी टीम को जाते-जाते भी झटका दे दिया.
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कॉनवे की क्लाकिस पारी
इस मैच में सीएसके के लिए उसकी सलामी जोड़ी भी शानदार साबित हुई.
ऋतुराज गायकवाड़ और डेवन कॉनवे ने 11 ओवर में 87 रन जोड़कर यह सुनिश्चित किया कि यहां से टीम अब हारने वाली नहीं है.
ऋतुराज दुर्भाग्यशाली रहे और 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि कॉनवे अंत तक टिके रहे और उन्होंने नाबाद 77 रनों की पारी खेली.

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प्वाइंट टेबल हुआ मजेदार
चेन्नई की इस जीत के साथ ही अब टॉप-4 की रेस और मज़ेदार हो गई है.
टॉप की चार में से तीन टीमों के छह मैचों में आठ-आठ अंक हो गए हैं.
इसमें सबसे ऊपर राजस्थान रॉयल्स है, उसके बाद लखनऊ सुपर जायंट्स और तीसरे नंबर पर चेन्नई सुपर किंग्स है. चौथे नंबर पर गुजरात की टीम है जिसने पांच मैच खेले हैं और तीन जीत के साथ उसके छह अंक हैं.
हैदराबाद की बात करें तो उन्होंने छह मैचों में दो जीत के साथ महज़ चार अंक ही हासिल किए हैं. प्वाइंट टेबल में यह टीम 9वें स्थान पर है और उनके लिए आगे की राह आसान नहीं दिखती.
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