फ़ीफ़ा वर्ल्ड कपः फ़ाइनल को लेकर क्या बोल रहे हैं फ़्रांस और अर्जेंटीना के फैन्स

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- Author, कैटी वाटसन (ब्यूनस आयर्स से) और ह्यूग शॉफिल्ड (पेरिस से)
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
जोश से भरे अर्जेंटीना और फ़्रांस के फ़ुटबॉल प्रशंसक दोहा में इन दोनों टीमों के बीच खेले जा रहे उस फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप फ़ाइनल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं जिसके बारे में कहा जा रहा है कि ये एक यादगार फ़ाइनल होगा. दोनों ही टीमें इतिहास बनाने के मुहाने पर खड़ी हैं.
फ़्रांस वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल के इतिहास के 92 सालों के दरम्यान इटली और ब्राज़ील की बराबरी कर, ऐसी केवल तीसरी टीम बनने के कगार पर है जिसने लगातार दो वर्ल्ड कप जीते हों.
तो फ़्रांस की फ़ुटबॉल टीम के कोच दिए दिदिशौ भी एक नायाब रिकॉर्ड बना सकते हैं.
2018 में फ़्रांस को बतौर कोच वर्ल्ड कप दिलाने के साथ ऐसे तीसरे फ़ुटबॉलर बने थे जिसने पहले बतौर खिलाड़ी और और फिर कोच के रूप में भी अपनी टीम को वर्ल्ड कप में जीत दिलाई.

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अगर रविवार को फ़्रांस जीता तो दिदिए दिशौं ऐसे दूसरे फ़ुटबॉल मैनेजर बन जाएंगे जिसने एक कोच के रूप में अपनी टीम को दूसरी बार वर्ल्ड कप में जीत दिलाई. अब तक इटली के विटोरियो पोज़्ज़ो के नाम ये नायाब रिकॉर्ड है, जो उन्होंने 1938 में बनाया था.
दूसरी ओर, अर्जेंटीना की उम्मीद और उसके सपने लियोनेल मेसी के कंधे पर टिकी है, जो फ़ुटबॉल के सर्वकालीन महान खिलाड़ियों में से एक हैं. निश्चित रूप से 35 साल की उम्र में वो अपने चमकदार करियर का अंत वर्ल्ड कप जीतने के साथ करना चाहेंगे जो वर्ल्ड कप का उनका आख़िरी मैच भी होगा.
अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में ऐसा लग रहा है कि मानों भविष्य में उनकी खुशी इस वर्ल्ड कप के फ़ाइनल पर टिकी है.
अर्जेंटीना में बहुत ज़्यादा आर्थिक तंगी चल रही है. बढ़ती महंगाई से हर महीने इस देश के लाखों लोग जूझ रहे हैं. लेकिन इसी बीच मेसी और अर्जेंटीना की टीम ने अपने शानदार खेल से फ़ाइनल में जगह बनाई और इससे यहां के लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीर मानो कुछ समय के लिए मिट गई है और अब वो सब कुछ भुला कर बस फ़ुटबॉल पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

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एक बार के मालिक लुइस सारनी कहते हैं, "यह देश बहुत कुछ झेल रहा है, इस वर्ल्ड कप ने यहां के लोगों को एकजुट किया है, हमारे पास दुनिया का सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉल खिलाड़ी है और उन्हें चाहने वाले दुनिया के हर कोने में हैं."
हालांकि मेसी के साथ ही अर्जेंटीना की पूरी टीम ही अपने देश का मान बढ़ा रही है.
लुइस बोले, "फ़ुटबॉल के मैदान पर कहते हैं कि यहां दिल धड़कता है. आज अर्जेंटीना का हर व्यक्ति खुद को कोच समझता है और टीम की रणनीति को लेकर उसकी अपनी एक राय होती है लेकिन जब हम जीत का जश्न मनाते हैं तो खुशी में हम रोते भी बहुत हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं."

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अर्जेंटीना के एक युवक मार्टिन रोजा जो फ़्रांस में रहते हैं लेकिन अभी वो छुट्टियों में अपने घर आए हैं और कहते हैं कि रविवार का ये फ़ाइनल बहुत महत्व रखता है.
वे कहते हैं, "ये मेरा सपना है, 1990 में मेरा जन्म हुआ है और तब से मैंने अर्जेंटीना को चैंपियन बनते नहीं देखा है. निश्चित तौर पर मेसी का ये अंतिम वर्ल्ड कप होगा- तो उनके पास ये ज़बरदस्त आख़िरी मौक़ा है."
और ये अर्जेंटीना के लोगों के पास मौक़ा है कि वो अपने देश पर गर्व महसूस करें, जो फिलहाल संकट के दौर से गुज़र रहा है.

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पेरिस के लोगों में आत्मविश्वास
वहीं पेरिस में फ़ुटबॉल फीवर अपने चरम पर है.
रिकॉर्ड के लिहाज़ से बीते सात वर्ल्ड कप में फ़्रांस चौथी बार फ़ाइनल में पहुंचा है. वहीं फ़्रांस के प्रशंसकों के बीच एक आंकड़ा ये भी शेयर किया जा रहा है बीते 10 वर्ल्ड कप में फ़्रांस इस फ़ाइनल के अपने दक्षिण अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी से कभी नहीं हारा.
अर्जेंटीना ने फ़्रांस को आख़िरी बार 1978 वर्ल्ड कप में हराया था.
ये किलियन एमबापे के इस साल की शुरुआत में दिए गए उस बयान की याद दिलाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि दक्षिण अमेरिकी फ़ुटबॉल यूरोपीय फ़ुटबॉल की तरह आधुनिक नहीं है क्योंकि वहां प्रतिस्पर्धा निम्न स्तरीय है.
वे इस तथ्य को बता रहे थे कि वर्ल्ड कप जीतने वाली आख़िरी दक्षिण अमेरिकी टीम ब्राज़ील है जिन्होंने 2002 में ये टूर्नामेंट जीता था, जबकि अर्जेंटीना ने 1986 में यह ख़िताब आख़िरी बार अपने नाम किया था.
और संभवतः वो फ़्रांस और अर्जेंटीना के बीच हुए आखिरी मुक़ाबले की बात भी कर रहे थे जो 2018 में रूस में खेले गए वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ़ 16 (प्री-क्वार्टर फ़ाइनल) में हुआ था, जिसे फ़्रांस ने 4-3 से जीता था और एमबापे ने खुद उसमें दो गोल किए थे. फ़्रांस के आत्मविश्वास की एक वजह यह भी है.
वहीं अर्जेंटीना के नज़रिए से देखें तो यह मैच उनके लिए उस हार का बदला लेने जैसा भी है.

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अब जब कि कुछ ही देर में यह फ़ाइनल शुरू होने वाला है, फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजेट क़तर की राजधानी दोहा के स्टेडियम में बैठ कर यह मुक़ाबला देख रहे होंगे.
उनके साथ खेल के दिग्गजों का एक शिष्टमंडल भी होगा, जिसमें रेफ़री स्टेफनी फ्रापार्ट भी शामिल होंगी, जो इसी महीने पुरुष वर्ल्ड कप मैच में रेफ़री की भूमिका निभाने वालीं पहली महिला बनी हैं.
यह फ़्रांस के राष्ट्रपति का चार दिनों में क़तर का दूसरा दौरा है. इस वर्ल्ड कप की शुरुआत से पहले उन्होंने एक वादा किया था और उसी के तहत वो मोरक्को के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में भी स्टेडियम में मौजूद थे.
वहीं मानवाधिकार के मामले में क़तर के रिकॉर्ड को देखते हुए कुछ लोग फ़्रांस के राष्ट्रपति की आलोचना भी कर रहे हैं, लेकिन ये भी देखा गया कि जैसे-जैसे फ़्रांस इस टूर्नामेंट में आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे बॉयकॉट की यह बात धूमिल पड़ती गई.
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