भारत बनाम साउथ अफ़्रीका: दिनेश कार्तिक और ऋषभ पंत ने ऐसा क्यों किया

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, खेल पत्रकार

- साउथ अफ़्रीका बनाम भारत- तीसरा टी-20 मैच
- जगह- इंदौर का होलकर क्रिकेट स्टेडियम
- साउथ अफ्रीका- 20 ओवर में तीन विकेट पर 227 रन, राइली रूसो- 100 रन
- भारत- 18.3 ओवर में 178 रन पर ऑलआउट, दिनेश कार्तिक 46 रन
- साउथ अफ़्रीका ने भारत को 49 रनों से हरा दिया लेकिन भारत ने यह सिरीज़ 2-1 से जीत लिया

भारत ने दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ को 2-1 से ज़रूर जीत लिया. लेकिन आख़िरी मैच हारने से टीम की विश्व कप तैयारियों को थोड़ा झटका लगा है. पर दक्षिण अफ्रीका के लिए यह जीत इस माह शुरू हो रहे टी-20 विश्व कप में टॉनिक का काम कर सकती है.
दक्षिण अफ्रीका की इस जीत में गेंदबाज़ों ने तो अहम भूमिका निभाई ही पर हीरो राइली रूसो रहे. उन्होंने टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक लगाकर अपनी टीम को 227 रनों के विशाल स्कोर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई. इसमें क्विंटन डिकॉक की 68 रन की पारी का भी अहम योगदान रहा.
रूसो ने 48 गेंद में सात चौकों और आठ छक्कों से से 100 रन बनाए. उन्होंने 208.33 के स्ट्राइक रेट से जिस तरह रन बनाए, उससे यह तो तय है कि वह इसी माह ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप में ज़रूर धमाल मचाने वाले हैं.
फील्डिंग में सुधार की ज़रूरत
सही मायनों में इस मैच में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच प्रमुख अंतर फील्डिंग और कैचिंग में रहा. दक्षिण अफ्रीकी पारी की दूसरी ही गेंद पर डिकॉक को रन आउट का मौक़ा नहीं गंवाया होता तो उनके ऊपर शुरू में ही दवाब बनाया जा सकता था. इसके बाद कुछ कैच के मौके गंवाने से स्थिति और बदतर हो गई.
यह कहा जाता है कि कैच जिताते हैं मैच. पर इस मामले में हम सफल होते नहीं दिख रहे हैं. हमारे फील्डरों ने कुछ कैच तो छोड़े ही, साथ ही मोहम्मद सिराज ने कैच पकड़ लिया पर यह ध्यान रखने में सफल नहीं रहे कि वह पीछे हटने पर बाउंड्री लाइन से छूकर छक्का दे बैठे.
दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजी करते समय जब भी कैच निकले तो हमारे फील्डर वहां तक पहुंच ही नहीं सके. वहीं ट्रिस्टियन स्टब्स ने शानदार कैच पकड़कर पंत और सूर्यकुमार यादव की पारी का अंत करके भारतीय उम्मीदों को तोड़ दिया. सही मायनों में भारत ने आठ ओवरों में 86 रनों पर पांच विकेट खोकर मैच खो दिया था.

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भारतीय बल्लेबाजों में ज़िम्मेदारी की कमी दिखी
भारत के सामने 228 रन का लक्ष्य होने पर रन गति रखने के साथ विकेट भी बचाकर खेलना था. लेकिन बल्लेबाज़ अपनी जिम्मेदारी को निभाने में एकदम असफल रहे. इस सिरीज़ में पहले दो मैचों में बल्लेबाजी का मौक़ा नहीं पाने वाले ऋषभ पंत को पारी की शुरुआत करने का मौक़ा मिला और वह अच्छी लय में दिखने पर भी मौक़े का फ़ायदा उठाने में एकदम से असफल रहे.
पंत की तरह ही बल्लेबाज़ी में प्रमोट किए गए दिनेश कार्तिक ने अपने ताबड़-तोड़ अंदाज़ में खेलकर प्रभावित किया. लेकिन यह मौक़ा था, टीम को लक्ष्य की तरफ़ बढ़ाने का पर वह इस ज़िम्मेदारी को नहीं उठा सके. वह केशव महाराज के ओवर में 14 रन ठोंकने के बाद आख़िरी गेंद पर बेवजह रिवर्स शॉट खेलने के प्रयास में बोल्ड हो गए. भारत की जो स्थिति थी, उसमें इस तरह का शॉट खेलना कतई नहीं बनता था.
दिनेश आउट होने से पहले 21 गेंदों में 46 रन बना चुके थे. इसमें उन्होंने चार छक्के और चार चौके लगाए. उन्होंने यदि बल्लेबाज़ी करते समय दिमाग़ का भी इस्तेमाल किया होता तो वह इस मैच में हीरो बन सकते थे. लेकिन उन्होंने मौका गंवा दिया. इतना ज़रूर है कि विश्व कप में बल्लेबाजी में उनके ऊपर भरोसा किया जा सकता है, यह ज़रूर उन्होंने दिखा दिया है.
इससे पहले ऋषभ पंत भी ज़िम्मेदारी निभाने में असफल रहे. वह एनगिडी के पांचवें ओवर में पहली पाँच गेंदों पर दो छक्कों और दो चौकों से 19 रन बना चुके थे. लेकिन आख़िरी गेंद के विकेट से काफ़ी बाहर होने पर बिना नियंत्रण के जबर्दस्ती शॉट खेलने की वजह से स्टब्स के हाथों कैच हो गए. पंत ने 14 गेंदों में तीन चौकों और दो छक्कों से 27 रन बनाए.
पुछल्ले बल्लेबाज़ों दीपक चाहर और उमेश यादव ने जिस जज्बे के साथ बल्लेबाज़ी करके भारत के स्कोर को 178 रनों तक पहुंचाया. उससे यह तो साफ़ है कि पंत और दिनेश कार्तिक ने बल्लेबाजी में थोड़ी होशियारी दिखाकर विकेट पर कुछ ज़्यादा रुकने का प्रयास किया होता, तो भारत इस विशाल लक्ष्य तक पहुंच सकता था.

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भारत की कमज़ोर शुरुआत
भारत के सामने बड़ा लक्ष्य होने पर कप्तान रोहित शर्मा से बड़ी परी खेलने की उम्मीद की जाती है. वैसे भी इंदौर के इस विकेट को बल्लेबाज़ों के अनुकूल माना जाता है. पर कगिसो रबाडा ने पहले ही ओवर में क्रास सीम से फेंकी गेंद को थोड़ा अंदर लाए और गेंद रोहित के बल्ले का किनारा लेकर विकेट में चली गई. रोहित ने यह गेंद बिना पैरों को चलाए खेली थी.
भारत पहले झटके से अभी उबरा भी नहीं था कि श्रेयस अय्यर पार्नेल की गेंद पर एलबीडब्ल्यू हो गए. श्रेयस के लिए विश्व कप से पहले अपनी क्षमता साबित करने का अच्छा मौक़ा था. वह विश्व कप के सुरक्षित खिलाड़ियों में शामिल हैं.
लेकिन उन्होंने इस मौक़े का गँवा दिया. वह तो भारतीय हीरो सूर्यकुमार यादव की जगह चौथे नंबर पर खेलने आए दिनेश कार्तिक का रबाडा की गेंद पर कैच नहीं लपका जा सका. अगर यह कैच पकड़ जाता तो भारत बहुत ही ख़राब स्थिति में पहुंच जाता, क्योंकि उस समय स्कोर दो विकेट पर 13 रन था.

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गेंदबाज़ी में है सुधार की ज़रूरत
जसप्रीत बुमराह के बाहर होने के बाद से गेंदबाज़ी प्रभावित हुई है. इसके अलावा हर्षल पटेल के पूरी रंगत में नहीं होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं. हर्षल को असल में गेंदों की रफ्तार में विभिन्नता लाने और यॉर्कर गेंदों के लिए जाना जाता है.
वह अक्सर स्लोअर गेंद से यॉर्कर डालते हैं. पर गेंद फुलटॉस होने से उस पर छक्का या चौका लगने की संभावना बनी रहती है. वह काफ़ी समय बाद लौटे हैं, इसलिए यॉर्कर को सही से नहीं डाल पा रहे हैं.
दीपक चाहर ने अपनी गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी का जिस तरह से प्रदर्शन किया है, उससे वह बुमराह की टीम में जगह लेने के मज़बूत दावेदार बन गए हैं. इस मैच में उमेश यादव और मोहम्मद सिराज़ को सिरीज़ में पहली बार खिलाया. उमेश अपनी गेंदबाज़ी से प्रभावित करने में सफल रहे. पर वह ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिरीज़ में और इस सिरीज़ के पहले दो मैचों में नहीं खेले, इससे लगता है कि वह शायद टीम प्रबंधन की योजना के हिस्सा नहीं हैं.
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