You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
वेस्ट इंडीज़ बनाम भारत: अक्षर पटेल ने आख़िरी पलों में यूं पलट दिया मैच का रुख़
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, बीबीसी के लिए पोर्ट ऑफ स्पेन से
वेस्ट इंडीज़ के पोर्ट ऑफ स्पेन में रहने वाले पुराने लोगों के ज़ेहन में भारतीय क्रिकेट का ज़िक्र आते ही सुनील गावस्कर का नाम आता है, तो वहीं मध्यम पीढ़ी के लोगों के सामने सचिन तेंदुलकर का.
नई पीढ़ी विराट कोहली और रोहित शर्मा की दीवानी है. लेकिन, इनमें से कोई भी वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ चल रहे दूसरे वन-डे मैच में खेल नहीं रहा था, बावजूद इसके टीम इंडिया को दर्शकों का ज़बरदस्त सपोर्ट मिला.
शायद इसलिए 312 रनों के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए भी अक्षर पटेल के हौसले पस्त नहीं हुए.
भारत को आख़िरी के 10 ओवर में जीत के लिए 100 रन बनाने थे. पिछले मैच में भारत आख़िरी के 15 ओवर में सिर्फ़ 83 रन ही बना पाया था. ऐसे में अगर किसी को ये कहा जाता कि दीपक हुडा और पटेल की जोड़ी इस मैच को पलट देगी तो शायद विश्वास करना मुश्किल होता.
लेकिन, पटेल के इरादे पक्के थे. पटेल जानते हैं कि ये एक मौक़ा, उन्हें कड़ी मेहनत और अच्छी किस्मत के बूते ही मिल रहा है.
अगर रविंद्र जडेजा फिट होते तो पटेल इस मैच का हिस्सा ही नहीं होते. सिर्फ़ एक लेफ्ट ऑर्म स्पिनर के तौर पर उन्हें चुनौती देने के लिए कुलदीप यादव भी क़तार में आ चुके हैं.
लेकिन, रविवार को पटेल इन सभी चिंताओं से बेफ़िक्र नज़र आए. पटेल ने अपने अब तक के करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली और लगभग एक हारे हुए मैच को जीत में तब्दील कर दिया.
पटेल की पारी की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि ऑलराउंडर और आक्रमाक बल्लेबाज़ हुडा जब आउट हुए तो टीम के सामने 36 गेंद पर 56 रन बनाने का लक्ष्य था और पटेल का साथ देने के लिए केवल शार्दुल ठाकुर बचे थे.
श्रेयस अय्यर का भी रहा ख़ास योगदान
पटेल और टीम इंडिया को वेस्ट इंडीज़ के तेज़ गेंदबाज़ अल्ज़ारी जोसेफ से भी मदद मिली, जिन्होंने अपने एक ओवर में 16 रन दे दिए. वहीं दो गेंदें तो बिल्कुल फुलटॉस थीं.
बहराहल, पटेल ने अगर मौक़े पर चौके की जगह छक्का लगाया, तो मुंबई के श्रेयस अय्यर ने भी लगातार दूसरे मैच में निरंतरता का परिचय देते हुए अर्धशतक जड़ा.
2019 वर्ल्ड कप के बाद वन-डे क्रिकेट में भारत के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले टॉप 5 बल्लेबाज़ों में अय्यर भी शुमार हैं, लेकिन इस सिरीज़ से पहले उनके चुनाव को लेकर सवाल उठ रहे थे.
जीत के बाद जब अय्यर आए, तो मैंने उनसे वही सवाल दोहराया.
शायद कोई दूसरा युवा खिलाड़ी होता तो इस सवाल पर विचलित हो जाता और अनमने ढंग से जवाब देता, लेकिन अय्यर आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स जैसी टीम का नेतृत्व कर चुके हैं. उन्हें गंभीरता और सलीके से अपनी बात कहना आता है.
उन्होंने इस बात को मानने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई कि उन्हें दोनों ही वन-डे मैच में अर्धशतक के बाद आउट होने की बजाए उसे बड़ी पारी में बदलने की कोशिश करनी चाहिए थी.
टीम इंडिया में स्थायी जगह बनाने में जुटे अय्यर
बातों ही बातों में अय्यर ने हमें ये भी बताया कि किस तरह से हेड कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौड़ उन पर दबाव बनने नहीं देते.
वैसे भी टीम इंडिया जब से वेस्ट इंडीज़ आई है, हर अभ्यास सत्र में अय्यर सबसे पहले बल्लेबाज़ी के लिए जाते हैं और सबसे आख़िर में वापस लौटतें है.
आलम तो एक दिन ये भी रहा कि हर कोई अपना नेट ख़त्म करके जा चुके थे. राठौड़ अय्यर को बार-बार चलने को कह रहे थे, वहीं अय्यर एक ओवर और, एक ओवर और करते हुए 10 ओवर की अतिरिक्त बल्लेबाज़ी का अभ्यास करके लौटे.
अय्यर को पता है कि जिस दिन विराट कोहली प्लेइंग इलेवन में लौटेंगे उन्हें तीसरे नंबर की जगह खाली करनी पड़ सकती है. इसलिए कोहली की वापसी से पहले वो इतने रन बना देना चाहतें है कि उन्हें बाहर करने के बारे में कोई सोचे ही नहीं.
अय्यर ने रविवार को संजू सैमसन के साथ 99 रनों की साझेदारी की, जिससे मैच फिर से भारत के नियंत्रण में आ सका.
फैंस की ज़ुबान पर शुभमन गिल का नाम
शिखर धवन के जल्दी आउट होने के बाद दूसरे ओपनर शुभमन गिल ने भी लगातार दूसरे मैच में अच्छी लय का परिचय दिया. लेकिन अर्धशतक से चूक गए.
टीम इंडिया के लिए मैच में तीसरा अर्धशतक सैमसन के बल्ले से निकला, जिनके सामने अय्यर और पटेल की तरह ख़ुद को साबित करते हुए हर हाल में टीम इंडिया में बने रहने की चुनौती है.
51 गेंदों पर 54 रन बनाने वाले सैमसन ने शानदार तीन छक्के भी लगाए. इसलिए मैच ख़त्म होने के बाद जब वो टीम बस में जा रहे थे, तो कप्तान शिखर धवन के बाद सबसे ज़्यादा भारतीय फैंस उन्हीं का नाम ले रहे थे.
इस जीत के साथ ही भारत ने वन-डे क्रिकेट में, किसी एक टीम के ख़िलाफ़ लगातार एक दर्जन मौक़े पर सिरीज़ जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया.
मैच के बाद द्रविड़ का अनोखा अंदाज़
वेस्ट इंडीज़ में आख़िरी बार 311 से ज़्यादा रनों के लक्ष्य का पीछा क़रीब दो दशक पहले हुआ था. लेकिन, टीम इंडिया ने इस बार इतिहास रच डाला. पोर्ट ऑफ स्पेन के क्वींस पार्क ओवल में भारत ने आख़िरी बार कोई वन-डे मैच 2007 में गँवाया था.
मैच ख़त्म होने के बाद राहुल द्रविड़ जब टीम बस में बैठे तो वो सबसे आगे वाली सीट पर थे और उनके बगल में बैठे थे कप्तान धवन.
कप्तान और कोच दोनों ही गिल और ईशान किशन के ड्रेसिंग रूम से वापस लौटने का इंतज़ार कर रहे थे, किसी झुंझलाहट की बजाय दोनों ही हंसी-मज़ाक में जुटे थे.
धवन का अंदाज़ तो शायद सबको पता है लेकिन द्रविड़ को इतना रिलैक्स, मैनें उनके करियर में पहले कभी नहीं देखा.
ये गब्बर का ही अनूठा अंदाज़ है, जिससे वो नए खिलाड़ियों से भी शानदार खेल निकाल लेते हैं. वहीं द्रविड़ जैसे गंभीर शख़्स की गंभीरता को उनके होटल के कमरे में छोड़ कर आने के लिए भी मनवा लेना अनोखा है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)