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#AFGvsNZ T20 World Cup: अफ़ग़ानिस्तान और न्यूज़ीलैंड का मैच जिसके लिए दुआएं कर रहे हैं भारतीय क्रिकेट प्रेमी
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत के करोड़ों देशवासी पांच दिन का ज्योति पर्व धूमधाम से मनाने के बाद एक सुर से यह प्रार्थना कर रहे हैं कि सुपर संडे को खेले जाने वाले टी-20 विश्व कप के ग्रुप-दो मैच में अफ़ग़ानिस्तान किसी तरह न्यूज़ीलैंड को हराने में कामयाब हो जाए.
असल में न्यूज़ीलैंड की इस हार पर ही टीम इंडिया की सारी उम्मीदें टिकी हुई हैं.
अगर इस मैच में अफ़ग़ानिस्तान हार जाता है तो भारत के लिए सोमवार यानी आठ नवम्बर को नामीबिया के साथ खेले जाने वाले मैच के कोई मायने नहीं रह जाएंगे.
आईसीसी चैंपियनशिप्स के इतिहास को उठाकर देखें तो इन मुकाबलों में न्यूज़ीलैंड का प्रदर्शन शानदार रहा है.
वह अक्सर इन टूर्नामेंटों के सेमीफाइनल में खेलती नज़र भी आती रही है. वैसे भी एक टीम के रूप में देखें तो न्यूज़ीलैंड की टीम ज़्यादा संतुलित नज़र आती है.
न्यूज़ीलैंड की बल्लेबाज़ी अफ़ग़ानिस्तान के मुकाबले कहीं बेहतर है. साथ ही अनुभवी होने की वजह से वह जानते हैं कि मुश्किल स्थितियों में कैसे खेला जाए.
नामीबिया के ख़िलाफ़ जब बाउंड्री लगाना मुश्किल हो रहा था, तो उन्होंने एक-एक रन दौड़कर विजय प्राप्त की.
स्पिन के सहारे है अफ़ग़ानिस्तान
अफ़ग़ानिस्तान की टीम खेल के किसी क्षेत्र में न्यूज़ीलैंड से थोड़ी बेहतर नज़र आती है तो वह है स्पिन. राशिद ख़ान और मुजीब उर रहमान जैसे गेंदबाज़ों को खेलना किसी भी बल्लेबाज़ के लिए मुश्किल होता है.
न्यूज़ीलैंड की टीम में कप्तान केन विलियम्सन को छोड़ दें तो ज़्यादातर बल्लेबाज़ क्वालिटी स्पिन खेलने में महारत नहीं रखते हैं. इसलिए अफ़ग़ानिस्तान की यह स्पिन जोड़ी ही उलटफेर करने का माद्दा रखती है.
इस मैच में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मैच अबुधाबी में दिन में खेला जाना है तो इसमें टॉस की भूमिका अहम नहीं रहने वाली है.
इसलिए बाद में गेंदबाज़ी करने वाली टीम के लिए भी जीतने के समान अवसर होंगे.
इस स्थिति में राशिद ख़ान और मुजीब पूरी तन्मयता से गेंदबाज़ी करके मैच पर प्रभाव डाल सकते हैं. देखने वाली बात यह होगी कि न्यूज़ीलैंड के कप्तान विलियम्सन यदि टॉस जीतते हैं तो वह क्या फैसला करते हैं.
अफ़ग़ानिस्तान को जीत पाने के लिए न्यूज़ीलैंड के पेस अटैक टिम साउदी और ट्रेंट बोल्ट का बेहतर ढंग से सामना करना होगा. वह इस तरह ही लड़ने लायक स्कोर बना सकता है.
एक बार यदि वह 150 के पार पहुंच जाती है तो जीत के लिए स्पिन जोड़ी की ओर से हाथ-पैर मारने की उम्मीद की जा सकती है.
लेकिन अगर हम न्यूज़ीलैंड के प्रदर्शन को देखें तो उसने सिर्फ पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ही ढीला प्रदर्शन किया है. बाकी मैचों में वह सफल रही है.
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पिछले दो मैचों में भारत ने सुधारी है स्थिति
टीम इंडिया ने पिछले दो मैचों में स्कॉटलैंड और अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ शानदार प्रदर्शन करके न्यूज़ीलैंड और अफ़ग़ानिस्तान के मुकाबले अपना नेट रन रेट बेहतर कर लिया है.
इसलिए एक बार अफ़ग़ानिस्तान के न्यूज़ीलैंड को फतह कर लेने के बाद उसे अपने आखिरी मैच में नामीबिया पर सिर्फ जीत की ज़रूरत रह जाएगी. इस मैच को बड़े अंतर से जीतने की ज़रूरत नहीं रहेगी.
अफ़ग़ानिस्तान की टीम यह जानती है कि न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ उतरते समय उसे अपने क्रिकेट समर्थकों का ही नहीं सारे भारत का भी समर्थन हासिल होगा.
यह समर्थन खिलाड़ियों का बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मनोबल तो बढ़ा सकता है पर मैच तो मैदान में खिलाड़ियों के प्रदर्शन से ही जीते जाते हैं.
इस कारण अफ़ग़ानिस्तान को न्यूज़ीलैंड को फतह करने के लिए गेंदबाज़ी ही नहीं बल्लेबाज़ी में भी बेहतर प्रदर्शन की भी तैयारी करनी होगी.
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पावरप्ले में बनाना होगा दवाब
न्यूज़ीलैंड के लिए अब तक ओपनर मार्टिन गुप्टिल और डेरिल मिशेल ने अच्छी शुरुआत की है. इसके अलावा कप्तान विलियम्सन भी ग़ज़ब के बल्लेबाज़ हैं.
अफ़ग़ानिस्तान यदि इस मुकाबले को जीतना चाहता है तो उसे पावरप्ले में दो-एक विकेट निकालकर दवाब बनाना होगा.
यह काम वह पेस अटैक के बजाय स्पिन गेंदबाज़ी से ही कर सकता है. एक बार पावरप्ले में विकेट निकल जाएं तो टीम पर दबाव बनना स्वाभाविक है.
अफ़ग़ानिस्तान यदि अपनी क्षमता से खेले तो वह न्यूज़ीलैंड को फंसाने का माद्दा रखती है. उन्होंने इस ग्रुप की नंबर एक टीम पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जिस तरह का प्रदर्शन किया था, उसे दोहराना होगा.
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उन्होंने मैच जीतने के हालात बना लिए थे. लेकिन आखिरी दो ओवर में आसिफ ने छक्कों की बौछार करके मैच का नक्शा बदल दिया था. इसका मतलब है कि उन्हें अपनी डेथ ओवर्स की गेंदबाज़ी को भी कसना होगा.
पहले दो झटकों से संभलना हुआ मुश्किल
टीम इंडिया पाकिस्तान और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ पहले दो मैचों में उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने का ख़ामियाज़ा भुगत रही है. असल में इस ग्रुप में इन तीन टीमों को ही सेमीफाइनल में पहुंचने का दावेदार माना जा रहा था.
इसलिए इन दोनों टीमों में से एक के खिलाफ जीत ज़रूरी थी. लेकिन भारत बल्लेबाज़ी और गेंदबाजी दोनों में ही घटिया प्रदर्शन की वजह से आज अपनी राह बनाने के लिए दूसरी टीम की तरफ तकने को मजबूर है.
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भारतीय कैंप में मिश्रित माहौल
टीम इंडिया के क्रिकेटर जानते हैं कि स्थितियां उनके हाथ में नहीं हैं. वह जानते हैं कि उनके मैदान में कमाल करने के लिए उतरने से पहले अफ़ग़ानिस्तान की जीत ज़रूरी है.
वह यदि नहीं जीतती है तो टीम के खिलाड़ी नामीबिया से आख़िरी मैच खेलने की औपचारिकता निभाकर स्वदेश लौटने के लिए तैयार हैं.
इतना ज़रूर है कि भारत की यदि सेमीफाइनल की राह बन जाती है तो कप्तान विराट कोहली का आईसीसी ट्रॉफी जीतने का सपना भी पूरा हो सकता है.
भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने के चाहने वाले और भी
भारत के क्रिकेट प्रेमी ही नहीं आईसीसी, प्रसारणकर्ता और प्रायोजक भी भगवान से दुआ कर रहे हैं कि किसी तरह टीम इंडिया सेमीफाइनल में पहुंच जाए.
इसकी वजह यह है कि भारत के सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाने पर इन सभी का भारी नुकसान होने की संभावना है.
यही नहीं एक बार भारत के बाहर होने के बाद क्रिकेट प्रेमियों के एक बड़े वर्ग की इस चैंपियनशिप से दिलचस्पी ख़त्म हो जानी है.
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