पैरालंपिक खेल: भारत को एक दिन में मिले दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल

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जापान की राजधानी टोक्यो में चल रहे 2020 के पैरालंपिक खेलों में भारत ने रविवार को दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज सहित कुल तीन मेडल जीते.
भारत के विनोद कुमार ने डिस्कस थ्रो की एफ़-52 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है.
इस बारे में भारतीय खेल प्राधिकरण (स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया) ने ट्वीट कर बताया है कि 19.91 मीटर डिस्कस फेंक कर उन्होंने एशिया में एक नया रिकॉर्ड बनाया है.
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इस मुक़ाबले के फाइनल में स्वर्ण पदक पोलैंड के पियोत्र कोसेविच ने जीता, जबकि रजत पदक क्रोएशिया के वेलिमीर सैन्डोर ने जीता.
इससे पहले रविवार को हुए खेलों में निषाद कुमार ने टी-47 हाई जंप में रजत पदक जीता.
वहीं भावनाबेन पटेल ने महिलाओं की एकल टेबल टेनिस प्रतियोगिता में रजत पदक जीता.
भावना पटेल टेबल टेनिस में मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला पैरालंपिक खिलाड़ी हैं. फाइनल में उनका मुक़ाबला वर्ल्ड नंबर वन चीन की ज़ू यिंग से था.
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2020 पैरालंपिक से पहले भारत को मिले थे 12 मेडल
पैरालंपिक खेलों में भारत ने अपना पहला पदक 1972 के हाईडेलबर्ग खेलों में जीता था, जो गोल्ड मेडल भी था. उस समय, पुरुषों के 50 मीटर फ्रीस्टाइल में मुरलीकांत पेटकर ने यह उपलब्धि हासिल की थी.
उस समय से टोक्यो में चल रहे मौजूदा पैरालंपिक खेलों से पहले तक भारत ने चार गोल्ड, चार सिल्वर और चार ब्रॉन्ज के साथ कुल 12 मेडल जीते हैं.
सबसे अच्छा प्रदर्शन 2016 के रियो पैरालंपिक में
प्रदर्शन के लिहाज से भारत का सबसे बढ़िया पैरालंपिक खेल आयोजन पिछले पैरालंपिक खेल (2016 के रियो खेल) थे. इसमें देश को दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज प्राप्त हुए.
उस आयोजन में मरियप्पन थंगावेलु ने पुरुषों के हाई जंप (एफ-42) और देवेंद्र झाझरिया पुरुषों के लिए भाला फेंक (एफ-46) मुक़ाबलों में गोल्ड मेडल प्राप्त किए थे. वहीं दीपा मलिक को महिलाओं के शॉटपुट (एफ-53) में सिल्वर मेडल और वरुण सिंह भाटी को पुरुषों के हाई जंप (एफ-42) में ब्रॉन्ज मेडल मिला था.
सबसे सफल खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया
2016 में गोल्ड मेडल जीतने से पहले देवेंद्र झाझरिया ने 2004 के एथेंस पैरालंपिक खेलों में भी गोल्ड जीता था. इस तरह वे अब तक भारत के सबसे पैरालंपिक खिलाड़ी हैं.

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सबसे ज़्यादा तीन मेडल जोगिंदर सिंह बेदी को
भारत का दूसरा सबसे बढ़िया प्रदर्शन 1984 में न्यूयॉर्क के पैरालंपिक खेलों में रहा था. उस समय देश को दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल हासिल हुए थे.
इसमें जोगिंदर सिंह बेदी ने एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज सहित कुल तीन पदक प्राप्त किए थे. पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए वे अब तक के सबसे ज्यादा मेडल जीतने वाले खिलाड़ी भी हैं. मजेदार बात है कि उन्होंने तीन खेलों में क़िस्मत आज़माई थी. इनमें से भाला और चक्का फेंकने में उन्हें ब्रॉन्ज मिला था, तो गोला फेंकने में उन्होंने सिल्वर मेडल प्राप्त किया था.
1984 में भीमराव केसरकर ने भी भाला फेंकने में मेडल हासिल किया था और वे रजत पदक लेकर आए थे.
इसके अलावा, एथेंस ओलंपिक में भारत ने दो मेडल (एक गोल्ड और दूसरा ब्रॉन्ज) जीते थे. गोल्ड मेडल देवेंद्र झाझरिया को मिला था, जबकि ब्रॉन्ज पर क़ब्ज़ा राजिंदर सिंह रहेलू ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.
2012 के लंदन ओलंपिक में हाई जंप में भारत के गिरिशा एन गौड़ा ने सिल्वर मेडल प्राप्त किया था.
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