अदिति अशोक: सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा- पहली बार गोल्फ़ देखा, आज समझ में आए नियम

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भारत की युवा गोल्फ़र अदिति अशोक टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बावजूद मेडल जीतकर इतिहास बनाने से चूक गईं.
आख़िरी राउंड में वो चौथे स्थान पर रहीं और मेडल की रेस से बाहर हो गईं.
अदिति शुरुआत से ही लगातार दूसरे और तीसरे स्थान पर बनी रहीं, जिसे देखकर उनसे मेडल की उम्मीदें बढ़ गई थीं.
हालाँकि आख़िरी वक़्त आते-आते वो संयुक्त रूप से तीसरे और फिर चौथे स्थान पर खिसक गईं.
मेडल से चूकने के बाद अदिति अशोक ने टोक्यो में पत्रकारों से कहा, "मैंने अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश की लेकिन इसके बावजूद मेडल न मिलना बुरा लगता है.''

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उन्होंने कहा, ''ओलंपिक में चौथे या पाँचवें स्थान पर रहने के असल में कोई मायने नहीं होते. यहाँ हर कोई मेडल के लिए ही आता है.''
हालाँकि अदिति ने साथ ही यह भी कहा कि ओलंपिक में टॉप-5 या टॉप-10 में होना भी अपने आप में बड़ी बात होती है.
उन्होंने कहा, ''अगर कोई चौथे या पाँचवें स्थान पर फ़िनिश करता है तो ज़ाहिर है उसमें मेडल लाने की क्षमता है.''
अदिति अशोक ने उम्मीद जताई कि उनके यहाँ तक पहुँचने से गोल्फ़ के बारे में लोग ज़्यादा जानने-समझने की कोशिश करेंगे और ज़्यादा युवा इस खेल को चुनने के बारे में सोचेंगे.
सोशल मीडिया पर लोग अदिति की इस बात से सहमत नज़र आए. कई लोगों ने लिखा कि वो पहली बार इस गेम को देख और समझ रहे थे.

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सोशल मीडिया पर बधाई
अदिति को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत राजनीति, खेल और बिज़नेस से जुड़े लोगों के अलावा आम लोगों ने सोशल मीडिया पर बधाई दी.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अदिति को बधाई देते हुए लिखा, "अदिति आपने बहुत खेला. भारत की एक और बेटी ने अपनी पहचान बनाई. आप भारतीय गोल्फ़ को नई ऊँचाइयों पर ले गईं. आपने बहुत शांति और धैर्य के साथ खेला. आपको अपनी स्किल और हिम्मत के लिए बधाई."
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, "अदिति आपने बहुत अच्छा खेला, आपने शानदार स्किल और संकल्प का परिचय दिया. एक मेडल बहुत पास आकर छूट गया लेकिन आप कई भारतीयों से आगे निकल गईं और कई लोगों के लिए प्रेरणा बनीं, आपको भविष्य के लिए शुभकामनाएं."
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भारत टेनिस स्टार भहेश भूपति ने लिखा कि वो जीवन भर के लिए अदिति के फ़ैन बन गए. उन्होंने ट्वीट किया, "मैं चौथे स्थान पर आने का दर्द समझता हूं, लेकिन पिछले चार दिनों में आपने सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों के सामने जो प्रदर्शन किया है, वो शानदार है. मैं जीवनभर के लिए आपका फ़ैन हो गया."
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भारत के मशहूर गोल्फ़र जीव मिल्खा सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि अदिति ने इतिहास रच दिया है. उन्होंने कहा, "उन्होंने युवा खिलाड़ियों की उम्मीदें जगाई हैं. भारत में गोल्फ़ को इससे बहुत बढ़ावा मिलेगा. हमें आप पर नाज़ है. दिल छोटा न करें, आपको आगे बहुत मौके मिलेंगे."
इसके अलावा खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, केंद्रीय मंत्री और पूर्व खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने भी अदिति को बधाई दी.
'पहली बार देखा गोल्फ़'
गोल्फ़ को लेकर भारत में सोशल मीडिया पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती लेकिन शनिवार को ट्विटर पर #Aditiashok ट्रेंड करता रहा. प्रदीप कृष्णा नाम के व्यक्ति ने लिखा, "मैंने पहले कभी भी एक मिनट से ज़्यादा गोल्फ़ नहीं देखा था, लेकिन आज मैं चार घंटे तक चिपका रहा. मुझे लगता है 90 प्रतिशत लोगों का यही हाल है. इससे ज्यादा एक खिलाड़ी क्या कर सकता है, जो अदिति अशोक ने पिछले चार दिनों में किया है, वो बेहतरीन है.
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मौलिक वदारिया नाम के ट्विटर यूज़र ने लिखा, "मैं अदिति का शुक्रिया कहना चाहता हूं क्योंकि अब मुझे गोल्फ़ के सभी नियम पता हैं. इस खेल के बारे में जानकारी देने के लिए शुक्रिया, दिल टूटा है, लेकिन निराश नहीं हैं.
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पिछले दो दिनों से ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर अदिति के खेल को लेकर चर्चा हो रही थी. कयास लगाए जा रहे थे कि वो ओलंपिक में पहली बार गोल्फ़ में भारत को मेडल दिलाएंगी.
कई लोगों ने ये भी लिख रहे थे उन्हें गोल्फ़ समझ में नहीं आता, लेकिन अदिति की उपलब्धि से वे खुश हैं और उन्हें खेलते देखना उन्हें अच्छा लग रहा है.
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मेडल नहीं जीता लेकिन फिर भी इतिहास बनाया
भले ही अदिति ने टोक्यो ओलंपिक में मेडल के बेहद करीब आकर चूक गई हों लेकिन उन्होंने इतिहास रच दिया है.
अदिति ऐसी खिलाड़ी बन गई हैं, जिनके यहाँ तक पहुँचने के बारे में शायद भारतीय ओलंपिक दल के अधिकारियों ने भी नहीं सोचा होगा.
अब तक किसी भी दूसरी भारतीय महिला गोल्फ़ खिलाड़ी ने दो बार ओलंपिक में क्वॉलिफ़ाई नहीं किया.

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कौन हैं अदिति अशोक?
अदिति अशोक का जन्म 29 मार्च 1998 को बेंगलुरू में हुआ था. उन्होंने पाँच साल की उम्र से ही गोल्फ़ खेलना शुरू कर दिया था. उस समय बेंगलुरू में तीन गोल्फ़ कोर्स ही थे.
लेकिन अदिति के पिता ने उनका समर्थन किया और गोल्फ़ की ट्रेनिंग कराने लगे.
अदिति ने 2016 के रियो ओलंपिक में भी हिस्सा लिया था, उस समय वे सिर्फ़ 18 साल की थीं और ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली वे सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई थीं.
हालाँकि रियो ओलंपिक में वो कुछ ख़ास नहीं कर पाईं.
इसके अलावा अदिति पहली भारतीय महिला गोल्फ़र हैं, जिन्होंने एशियन यूथ गेम्स (2013), यूथ ओलंपिक गेम्स (2014), एशियन गेम्स (2014) में हिस्सा लिया.
वे लल्ला आइचा टूर स्कूल का टाइटल जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय हैं. इस जीत की वजब से ही उन्हें 2016 सीज़न के लिए लेडीज़ यूरोपियन टूर कार्ड के लिए एंट्री मिली.
2017 में वे पहली भारतीय महिला प्रोफ़ेशनल गोल्फ एसोसिएशन (LPGA) खिलाड़ी बनीं.
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