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ईशान किशन की धुंआधार बल्लेबाज़ी पर बिहार, झारखंड बल्ले बल्ले
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत और इंग्लैंड के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में रविवार को खेले गए दूसरे टी-20 मैच में ईशान ने 32 गेंदों में 56 रन की धुंआधार पारी खेली.
अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच में अर्धशतक बनाने वाले अजिंक्य रहाणे के बाद ईशान दूसरे भारतीय बल्लेबाज़ बने हैं.
कप्तान विराट कोहली भी उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें निडर बता रहे हैं.
अपने इस शानदार प्रदर्शन पर खुद ईशान किशन कहते हैं कि मैं बिना किसी दबाव के खेला, जैसा कि मुझे मैदान में उतरने से पहले सलाह दी गई थी.
ईशान किशन के बल्लेबाज़ी की चर्चा पहले भी होती रही है. वे अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं.
पहले मैच में उनके लाजवाब प्रदर्शन के बाद आईसीसी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप के समय का एक वीडियो शेयर किया जिसमें वे कह रहे हैं कि उन्हें विराट कोहली के जैसा प्रदर्शन करना है.
ईशान पर चर्चा
बीते वर्ष इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस के लिए सर्वाधिक 529 रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे. रविवार को उनके अर्धशतक के साथ ही उनके लगाए चार छक्के की भी चर्चा रही. तो यहाँ यह भी बता दें कि इसी आईपीएल में वो सबसे अधिक 30 छक्के लगाने वाले बल्लेबाज़ भी थे.
घरेलू क्रिकेट में भी ईशान ने झारखंड की तरफ़ से कुछ शानदार पारियां खेली हैं.
मूल रूप से ईशान बिहार के पटना के रहने वाले हैं लेकिन बतौर क्रिकेट उन्हें पहचान झारखंड के लिए खेलते हुए मिली. इसलिए रविवार की रात जब ईशान मोटेरा में आतिशी बल्लेबाज़ी कर रहे थे तब जश्न पटना और राँची दोनों जगह साथ मनाया जा रहा था.
बिहार से छपने वाली मीडिया रिपोर्ट्स कह रही हैं, "ये बिहार के लाल का कमाल है." जबकि झारखंड की मीडिया और पूरा क्रिकेट जगत ईशान किशन की चर्चा "झारखंड के उदयीमान क्रिकेटर" के रूप में है.
ईशान बिहार के हैं या झारखंड के? सोशल मीडिया पर यह भी एक चर्चा है.
ईशान के पिता पेशे से एक बिल्डर हैं और पटना में रहते हैं. ईशान की पहचान को लेकर वे कहते हैं, "अब तो यह चर्चा ही नहीं होनी चाहिए कि वह बिहार का है या झारखंड का, क्योंकि अब भारत के लिए खेल रहा है. बिहार उसकी जन्मभूमि है और झारखंड कर्मभूमि."
पटना से राँची कैसे पहुँचे?
ईशान किशन के पिता बताते हैं कि अपने से चार साल बड़े भाई को क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए जाते देखकर छह साल की उम्र में उनके मन में क्रिकेट खेलने की इच्छा जगी. वे भी भाई के साथ क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए जाने लगे.
ईशान के पहले कोच पटना के संतोष कुमार हैं. राजेंद्र नगर शाखा मैदान में ट्रेनिंग एकेडमी चलाते हैं. इसी मैदान पर ईशान ने क्रिकेट का ककहरा सीखा है.
संतोष कहते हैं, "वह क्रिकेट को लेकर बहुत समर्पित है. यही बात उसे खास बनाती है क्योंकि मेहनती तो सभी होते हैं जो इतने ऊँचे स्तर पर खेल रहे हैं. वह शुरू से ही बाएं हाथ के एक ओपनर बनना चाहता था."
ईशान के कोच संतोष कुमार कहते हैं, "ईशान की सफलता में जितना उनकी मेहनत और समर्पण का योगदान है, उतना ही उनके पिता और परिवार का भी योगदान है जिन्होंने उसे अनकंडिशनल सपोर्ट दिया है. क्योंकि ईशान यहाँ सीखते हुए जहाँ भी ट्रायल देता पास हो जाता और एक मौके पर हमें सोचना पड़ गया कि अब क्या किया जाए!"
तो आखिर जब ईशान में इतना टैलेंट था तो उन्हें राँची क्यों जाना पड़ गया. इस पर कोच संतोष कुमार कहते हैं, "बिहार में क्रिकेट एसोसिएशन की भूमिका के कारण क्रिकेट की हालत ख़राब थी. ऐसे में टैलेंट होते हुए भी उनका कोई भविष्य नहीं दिख रहा था. तो उनके परिवार ने हमारी सलाह पर उन्हें राँची भेजने का फ़ैसला किया."
छोटी उम्र में बड़े बच्चों के साथ खेलना काम आया
ईशान बीते आठ सालों से झारखंड में क्रिकेट खेल रहे हैं.
पिता प्रणव पांडे बताते हैं, "साल 2013 में हमने उन्हें राँची भेजने का फ़ैसला किया. उम्र बहुत छोटी थी. लेकिन ईशान के साथ हमेशा यही बात रही कि उसे हमेशा अपने से बड़ी उम्र के बच्चों के साथ खेलने का मौका मिला."
ईशान किशन आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए सचिन तेंदुलकर और रिकी पोटिंग जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर कर चुके हैं.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पहले ही मैच में "मैन ऑफ़ द मैच" बनने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा, " मैच से पहले रोहित शर्मा ने कहा था कि आज मुझे ओपनिंग करनी है और मुझे उसी तरह की बल्लेबाज़ी करनी चाहिए जैसा आईपीएल के मैचों में किया है. उनकी ये सलाह काम आयी."
उसको पता है कि गलत है, लेकिन वो वही करेगा
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टी20 मैच में बेन स्टोक्स के हाथों जीवनदान मिल चुका था लेकिन वो जिस तरह खेल रहे थे तो एक वक्त ऐसा लग रहा था कि पहले ही मैच में शतक बना लेंगे लेकिन रिवर्स स्वीप करने में वे एलबीडब्ल्यू आउट हो गए.
उनके आउट होने पर कमेंटेटर भी चर्चा कर रहे थे कि जब एक ही ओवर में दो छक्के वो लगा चुके हैं और गेंद सीधे बल्ले पर आ रही है तो रिवर्स स्वीप खेलने की ज़रूरत नहीं थी.
ईशान के पिता प्रणव जो खुद भी क्रिकेट में बहुत दिलचस्पी रखते हैं, कहते हैं, "उसके आउट होने पर मेरा भी पहला रिएक्शन यही था, मगर वो इस तरह नहीं सोचता है. इस तरह खेलना उसके स्वभाव का हिस्सा है. पूछिएगा तो कहेगा कि "ग़लत था तो क्या हुआ, उस वक्त लगा कि रिवर्स स्वीप मारना चाहिए तो मार दिया."
बीसीए की वज़ह से जाना पड़ा झारखंड
ईशान के बिहार से झारखंड का रुख करने की वज़ह उनके पिता प्रणव और कोच संतोष कुमार बीसीए यानी बिहार क्रिकेट एसोसिएशन की भूमिका को बताते हैं.
प्रणव के मुताबिक़, "बिहार क्रिकेट एसोसिएशन अब बीते एक डेढ़ सालों से तो थोड़ा एक्टिव हुआ है. मगर उसके पहले सालों तक अंदरूनी राजनीति का शिकार रहा. यहाँ के एसोसिएशन की मान्यता ही रद्द हो चुकी थी."
दरअसल, यह सच्चाई भी है कि 90 के दशक के बाद से बिहार की तरफ से अंतरराष्ट्रीय फलक पर कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं पहुँचा.
ईशान के कोच संतोष कहते हैं, "1983 की वर्ल्ड कप विनिंग टीम में बिहार से कीर्ति आज़ाद थे. उस समय बिहार घरेलू क्रिकेट खेलता था. लेकिन झारखंड बनने के साथ ही यहाँ क्रिकेट की हालात ख़राब होती गई."
संतोष के मुताबिक़, "शुरू में बीसीए के समानान्तर एसोसिएशन ऑफ़ बिहार क्रिकेट (एबीसी) बना, फिर उनके बीच खींचतान शुरू हुई. फ़िर खिलाडिय़ों ने बिहार प्लेयर्स एसोसिएशन बनाकर बीसीसीआई से दो-दो हाथ कर लिया. हालाँकि साल 2018 से एक बार फिर से यहाँ के एसोसिएशन को मान्यता मिल गई और अब बिहार की टीम छोटे घरेलू टूर्नामेंट्स में भाग भी लेने लगी है."
ईशान जैसे कई खिलाड़ी बिहार से चले गए
अभी हाल ही संपन्न विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में बिहार की क्रिकेट टीम ने भी हिस्सा लिया था. लेकिन ग्रुप राउंड में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई.
वहीं इस टूर्नामेंट में कई ऐसे भी खिलाड़ी थे जो बिहार से थे लेकिन अपने राज्य की टीम के ख़िलाफ़ मैदान में उतरे थे.
ईशान किशन जो इस टूर्नामेंट में अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय टीम में जगह बनाने में कामयाब हुए थे, उन्हीं खिलाड़ियों में से एक थे.
ईशान के अलावा इस वक्त अनुकूल आशीष, शाहबाज़ नदीम, केशव कुमार, शशीम राठौर, समर कादरी, बाबूल जैसे युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी झारखंड की रणजी टीम की ताक़त बने हुए हैं.
ये खिलाड़ी बिहार क्रिकेट टीम की ताकत हो सकते थे, अगर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन की मान्यता नहीं रद्द हुई होती.
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