You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
T-20 World Cup 2020: बड़े मुक़ाबले में बार-बार क्यों हार रही है महिला क्रिकेट टीम?
- Author, कमलेश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
महिला क्रिकेट के टी20 विश्व कप में जब टीम इंडिया पहली बार फ़ाइनल में पहुंची तो लोगों की उम्मीदें आसमान छूने लगी थीं.
फ़ाइनल भले ही मज़बूत ऑस्ट्रेलियाई टीम के साथ था लेकिन भारतीय टीम पूरे जोश में थी क्योंकि इसी टूर्नामेंट के पहले ही मुक़ाबले में वो इस ऑस्ट्रेलियाई टीम को हरा चुकी थी.
लेकिन, भारतीय महिला टीम इतिहास बनाने से चूक गई और ऑस्ट्रेलिया ने पाँचवी बार टी20 विश्व कप का ख़िताब अपने नाम किया.
टॉस जीत कर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं ने पहले चार विकेट पर 184 रनों का बड़ा पहाड़ कर दिया और फिर भारतीय टीम की किसी भी बल्लेबाज़ को पिच पर लंबे वक़्त तक टिकने न दिया. पूरी भारतीय टीम महज़ 99 रनों पर पवेलियन लौट गई.
ऑस्ट्रेलियाई टीम के ख़िलाफ़ पहला मैच और बाद के सभी लीग मैच में जीत दर्ज करने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम को आख़िर क्या हुआ कि फ़ाइनल से पहले तक टूर्नामेंट में गेंदबाज़ी हो या बल्लेबाज़ी, उसके अव्वल प्रदर्शन कर रही खिलाड़ियों की इस ख़िताबी मुक़ाबले में एक न चली.
इसमें कोई शक नहीं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने अनुभव के साथ-साथ ओपनिंग जोड़ी एलीसा हेली और बेथ मूनी की ज़ोरदार पारी की बदौलत फ़ाइनल में जीतने में कामयाब रही लेकिन यह पहली बार नहीं है जब भारतीय महिला टीम जीत के इतने क़रीब पहुंचकर फ़ाइनल मैच में हारी हो.
कब-कब हुआ हार से सामना?
टी20 वर्ल्ड कप 2020 से पहले भी भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन करते हुए फ़ाइनल या सेमीफ़ाइनल तक पहुंची है, लेकिन नॉक आउट मैच में चूक गई.
तीन साल पहले 2017 के एकदिवसीय विश्व कप में ऐसा ही देखने को मिला था. तब भारत के सामने इंग्लैंड की टीम थी. हालांकि, तब भारतीय महिला टीम ने बेहद कड़ा मुक़ाबला किया था.
टीम इंडिया फ़ाइनल भले ही हार गई लेकिन उसने सबका दिल जीत लिया था. तब इंग्लैंड ने 229 रनों का लक्ष्य रखा था और भारतीय टीम ने 48 ओवर में 219 रन बनाए थे.
फिर ऐसा ही एक मौक़ा आया 2018 में जब दो साल पहले इसी टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में भारतीय टीम पहुंची. यहां भी मुक़ाबला इंग्लैंड से ही था लेकिन इस बार टीम इंडिया आसानी से आठ विकटों से हार गई.
टी20 वर्ल्ड कप 2020 के फ़ाइनल में भले ही टीम इंडिया पहुंच गई लेकिन यहां यह भी याद रखना होगा कि सेमीफ़ाइनल मुक़ाबला इंग्लैंड के ख़िलाफ़ बारिश की वजह से रद्द हो गया था और टूर्नामेंट के नियमों के मुताबिक़ इंग्लैंड की टीम को बाहर होना पड़ा क्योंकि लीग दौर में वो एक मैच हार गई थी.
अब जब पहली बार टीम फ़ाइनल में पहुंची हो तो सबकी उम्मीदें उस पर टिक जाती हैं लेकिन सवाल ये उठता है कि आख़िर नॉक आउट मैच में भारतीय महिला क्रिकेट टीम क्यों पिछड़ जा रही है?
बड़े मैच का मानसिक दबाव
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की इस हार पर द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता और पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के कोच रहे राजकुमार शर्मा कहते हैं, "टीम ने अपनी पूरी कोशिश की लेकिन नॉक आउट मैच में दिक्क़त का आना चिंता का विषय है. यह कहीं न कहीं मानसिक दबाव को दर्शाता है. इन खिलाड़ियों को अपनी और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना होता है. जब समूचा भारत इस पर नज़रें जमाए था तो दबाव का बनना लाज़मी है. मुझे लगता है कि भारतीय टीम को उसके मानसिक पक्ष पर काम करना होगा. बड़े मैचों के मानसिक दबाव को झेलना सीखना होगा."
राजकुमार शर्मा कहते हैं कि ये हार काफ़ी निराशाजनक है क्योंकि शुरुआती मैचों में भारतीय टीम का बेहद शानदार प्रदर्शन रहा था. ऑस्ट्रेलिया ने बेहतर क्रिकेट खेला और भारत उसके सामने नहीं टिक पाया.
टीम पर दबाव की बात करें तो इस बार फ़ाइनल मैच से पहले ही महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगीं थी. रविवार को जहां एक तरफ़ फ़ाइनल मुक़ाबला था और साथ ही विश्व महिला दिवस भी तो वहीं दूसरी तरफ़ कप्तान हरमनप्रीत सिंह का जन्मदिन भी था.
सोशल मीडिया पर लोग पहले से ही इसे दोगुनी ख़ुशी का दिन बता रहे थे. लोगों को फ़ाइनल मैच जीतने की पूरी उम्मीद थी.
फ़ाइनल में हार के बाद कप्तान हरमनप्रीत ने भी कहा कि टीम को फ़ील्डिंग में और मेहनत करने की ज़रूरत है और वो ग़लतियों से सीखेंगे.
उन्होंने कहा, "हमें केवल यह सोचने की ज़रूरत है कि हम मुख्य खेलों में किस तरह फ़ोकस करते हैं. कभी-कभी हम ये मैनेज नहीं कर पाते हैं."
हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि उनकी टीम ने लीग मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन किया और उन्हें टीम पर पूरा विश्वास है.
पूर्व क्रिकेटर रीमा मल्होत्रा भी हरमनप्रीत सिंह की इस बात से सहमति जताती हैं.
वे कहती हैं, "ये साफ़तौर पर दिख रहा था कि भारतीय टीम दबाव में थी. लेकिन, ये एक युवा टीम है. आज जीती नहीं लेकिन सीखा ज़रूर होगा कि प्रेशर कैसे हैंडल करना है. थोड़े नवर्स दिख रहे थे. मिस फ़ील्ड हुए हैं. कहीं न कहीं मानसिक दबाव बड़ी वजह रही है. ख़ासतौर पर जब आप पावरप्ले में ही चार विकेट खो देते हैं. पहले ही दो ओवर में दो कैच छोड़ देते हैं तो ये दिखाता है कि जो 87 हज़ार से ज़्यादा लोग वहां मौजूद थे उनका दबाव टीम पर ज़रूर हावी हुआ है."
लेकिन, रीमा मल्होत्रा ये भी कहती हैं कि हमें उम्मीद खोने की ज़रूरत हैं. पिछले साल टी20 में भारतीय टीम सेमीफ़ाइनल में पहुंची थी और इस बार फ़ाइनल पहुंची है. ये भी देखना होगा कि हम एक कदम आगे बढ़े हैं.
'रणनीति में बदलाव ज़रूरी'
ग्रुप मैच में ऑस्ट्रेलिया को हरा चुकी भारतीय टीम से फ़ाइनल में ग़लती कहां हुई.
ऑस्ट्रेलिया ने जो 184 रन बनाए इसमें उसकी सलामी बल्लेबाज़ों का योगदान 83 फ़ीसदी (153 रन) का था. ऑस्ट्रेलियाई सलामी जोड़ी एलीसा हेली ने 75 और बेथ मूनी ने 78 (नॉट आउट) रन बनाए. वहीं जब भारत की युवा सलामी जोड़ी शेफ़ाली वर्मा पहले ही ओवर में महज़ 2 रन बनाकर तो जेमिमा रोड्रिग्स बिना खाता खोले ही आउट हो गईं. इसके बाद स्मृति मंधाना भी केवल 11 रन ही बना सकीं.
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टूर्नामेंट के पहले मैच में शेफ़ाली वर्मा ने 49 रन और स्मृति मंधाना ने 55 रन बनाए थे.
इतना ही नहीं कप्तान हरमनप्रीत सिंह का बल्ला टूर्नामेंट के बाक़ी मैचों की तरह इस बडे़ मैच में भी ख़ामोश ही रहा.
भारतीय टीम के प्रदर्शन को लेकर राजकुमार शर्मा का कहना है कि, "टीम इस मैच में गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी दोनों ही डिपार्टमेंट फ़ेल हुई हैं. भारतीय टीम पिछले मैच की तरह इस बार भी ऑस्ट्रेलिया को हरा सकती थी. लेकिन, टीम अपने स्पिनर्स पर बहुत ज़्यादा निर्भर थी और जब ऑस्ट्रेलिया की टीम ने आक्रामक बल्लेबाज़ी की तो हमारे स्पिनर्स टिक नहीं पाए."
वे कहते हैं, "इस टूर्नामेंट में हमारे स्पिनर्स को किसी टीम ने अटैक नहीं किया था, बल्लेबाज़ बचाव में खेल रहे थे. लेकिन, ऑस्ट्रेलियाई ओपनर्स ने इस मैच का रुख़ ही बदल दिया और भारतीय गेंदबाज़ घबरा गईं."
वे कहते हैं, "वहीं, प्रबंधन की ये कमी रही कि उसने स्थिति के अनुसार टीम की रणनीति में बदलाव नहीं किया. बड़ा स्कोर देखते हुए हमारी बल्लेबाज़ भी दबाव में आ गईं. सीनियर खिलाड़ हरमनप्रीत और स्मृति मंधाना भी कुछ ख़ास नहीं कर पाईं जिन पर बैटिंग पूरी तरह निर्भर थी. लेकिन, उम्मीद है कि टीम अगली बार ज़रूर इन ग़लतियों को नहीं दोहराएगी."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)