You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
विराट कोहली का न्यूज़ीलैंड में फ़्लॉप शो, क्या हैं वजहें
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, बीबीसी के लिए, क्राइस्ट्चर्च, न्यूज़ीलैंड के लिए
क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाज़ डॉन ब्रैडमैन को रोकने के लिए इंग्लैंड के कप्तान डगलस जार्डिन ने अपने खूंख़ार तेज़ गेंदबाज़ हेरल्ड लारवुड से एशेज़ सिरीज़ (1932-33) में ऐसी गेंदबाज़ी करवायी कि दुनिया उसे अब भी बॉडीलाइन सिरीज़ के नाम से जानती है.
क्रिकेट के नियम उसके बाद से बदल गए. लेकिन, कप्तान जार्डिन का फॉर्मूला समय-समय पर हर शातिर कप्तान ने अपने-अपने अंदाज़ में इस्तेमाल किया. चाहे 1970-80 के दशक में वेस्टइंडीज़ की अपराजेय टीम रही हो या 1995-2005 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई टीम रही हो.
विरोधी टीम को पस्त करने के लिए उसके कप्तान पर हमला बोलना और उसको शांत रखना सिरीज़ में जीत की सबसे बड़ी वजह बनता रहा है.
न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन भले ही बेहद ख़तरनाक तेवर वाले नहीं दिखते हैं लेकिन क्रिकेट को लेकर उनकी समझ किसी से कम नहीं है.
विलियम्सन कोहली के अच्छे दोस्त भी हैं और अंडर-19 के दिनों से वो भारतीय कप्तान की खूबियों और खामियों से परिचित हैं.
इत्तेफाक से कीवी टीम में विलियम्सन के साथी तेज़ गेंदबाज़ टिम साउदी भी कोहली को एक दशक से क़रीब से देख रहे हैं. वो आईपीएल में कोहली के साथ भी खेल चुके हैं.
इसे सिर्फ़ संयोग ही तो नहीं कहा जा सकता है कि साउदी ने अतंरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोहली को सबसे ज़्यादा 10 बार आउट किया है. मौजूदा दौरे पर साउदी ने एक मंझे हुए गेंदबाज़ के तौर पर दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज़ को ऐसा परास्त किया कि उनका ताज़ भी छिन गया.
कोहली क्यों हुए असफल, रिचर्ड हेडली ने क्या कहा?
टेस्ट मैच से ठीक पहले न्यूज़ीलैंड के महानतम तेज़ गेंदबाज़ सर रिचर्ड हेडली कुछ भारतीय पत्रकारों के साथ बात कर रहे थे.
ज़ाहिर सी बात है कि कोहली पर बिना सवाल के कोई भी चर्चा कैसे ख़त्म हो सकती थी. हेडली से पूछा गया कि क्या कोहली की नाकामी उन्हें हैरान करती है?
तो उन्होंने कहा, "रफ़्तार के साथ स्विंग कोहली को परेशान करती है और साउदी ने इस बात का जमकर फ़ायदा उठाया है. साउदी के ख़िलाफ़ कोहली अपना फ्रंट फुट बाहर तो लाते हैं लेकिन पूरी तरह से नहीं. ऐसे में अगर गेंद कुछ कमाल करती है तो वे निरुत्तर हो जातें हैं."
न्यूज़ीलैंड दौरे पर 5 टी20, 2 वन-डे (एक मैच में उन्होंने आराम किया था) और 2 टेस्ट मैच खेलने के बाद कोहली सिर्फ़ 218 रन बना सके. 2 टेस्ट की चार पारियों में वो एक बार शतक या अर्धशतक तो दूर की बात, 20 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए.
न्यूज़ीलैंड के कोच क्या कहते हैं?
कोहली ने तो न्यूज़ीलैंड के पुछल्ले बल्लेबाज़ ट्रेंट बोल्ट से भी कम रन बनाए. ऐसे में मैंने न्यूज़ीलैंड के कोच गैरी स्टीड से सीधे पूछा कि क्या उनकी टीम ने कोहली को शांत रखने का आख़िरकार फॉर्मूला निकाल ही लिया.
कोच मुस्कराए और चिर-परिचित कीवी विनम्रता के साथ बोले, "बिल्कुल नहीं. मैं ऐसा कभी नहीं कह सकता. हम भाग्यशाली रहे कि विराट इस सिरीज़ में नहीं चले. हां, इतना ज़रूर कहूंगा कि हम एक ख़ास तरीके से उनके ख़िलाफ़ गेंदबाज़ी करना चाहते थे और हम उसमें सफल रहे. सौ फ़ीसदी तरीके से अपने प्लान में कामयाब होने से हमें खुशी तो है ही लेकिन वो दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज़ बने हुए हैं और जल्द ही ज़बरदस्त वापसी करेंगे."
विदेशी धरती पर कोहली का फ़्लॉप शो
कोहली निस्संदेह दुनिया के सबसे धाकड़ बल्लेबाज़ों में से एक हैं और शायद सिर्फ़ एक सिरीज़ में औसत खेल के बाद उनकी आलोचना सही नहीं है. लेकिन, टेस्ट क्रिकेट की पिछली कुछ पारियों में विदेशी ज़मीं पर कोहली का बल्ला अपनी साख़ के साथ न्याय नहीं कर पाया है. विदेश में पिछली 19 पारियों में उनके बल्ले से सिर्फ़ 1 शतक निकला है. और इस दौरान 9 मौके पर वो 25 से भी कम रन बनाकर आउट हुए हैं.
इतना ही नहीं विदेशी ज़मीं पर पिछले 2 सालों के दौरान 13 मैचों की 25 पारियों में उनका औसत 42 से कम का है जबकि उनका करियर औसत क़रीब 54 का है.
यानी पिछले 2 सालों में कोहली हर पारी में औसतन 12 रन की गिरावट देखने को मिली है जिसे सिर्फ़ यूं ही नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.
उप-महाद्वीप की पिचों पर टेस्ट क्रिकेट और वनडे मैचों में शतकों के अंबार के चलते शायद ऐसे आंकड़ों पर ग़ौर करना मुश्किल होता है लेकिन भारत के सबसे बड़े बल्लेबाज़ के लिए विदेश में एक अहम सिरीज़ में नहीं चलना पूरी टीम को परेशान करता है.
न्यूज़ीलैंड में अब कोहली के नाम 4 मैचों की 8 पारियों में सिर्फ़ 1 शतक और 1 अर्धशतक है. कोहली के लिए ये दौरा उनके 2014 के इंग्लैंड दौरे की ही तरह एक बुरा सपना है.
मौजूदा दौरे पर कोहली का औसत 9.50 का है जो उनके सबसे ख़राब सिरीज़ (ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत में 2017 में 9.20 का औसत) के बेहद क़रीब है.
2014 के इंग्लैंड दौरे पर भी कोहली का औसत इतना बुरा (13.40) नहीं था जितना कि इस दौरे पर रहा.
तसल्ली की बात सिर्फ़ ये है कि भारत को अब अगली सिरीज़ ऑस्ट्रेलिया में खेलनी है जहां पर बल्लेबाज़ कोहली और कप्तान कोहली दोनों का रिकॉर्ड बहुत ही अच्छा है.
बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)