INDvsNZ: न्यूज़ीलैंड में क्या है भारतीय क्रिकेटरों को सबसे पसंद?- न्यूज़ीलैंड से क्रिकेट डायरी

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, वेलिंगटन से
वेलिंग्टन में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट से पहले टीम इंडिया अभ्यास कर रही थी तो क़रीब डेढ़ घंटे तक एक बुज़ुर्ग क्रिकेट फ़ैन हाथ में एक डायरी लेकर इंतज़ार कर रहा था.
जैसे ही टीम इंडिया का कोई खिलाड़ी अभ्यास करके वापस लौट रहा होता तो ये फ़ैन उनके पास पहुंचता और ऑटोग्राफ़ लेने की गुज़ारिश करता.
दरअसल, ये कोई मामूली क्रिकेट फ़ैन नहीं हैं. ये दस साल की उम्र से हर टेस्ट मैच के दौरान विदेशी टीम के हर खिलाड़ी के ऑटोग्राफ़ अपनी डायरी में लेते हैं. पिछले 50 सालों से डेविड पार्सन्स अपने इस जुनून के साथ मैदान में आ रहे हैं.
उन्हें मायूसी इस बात से हुई कि विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी समेत शुभमन गिल और हनुमा विहारी के ऑटोग्राफ़ लेने से वो चूक गए क्योंकि वो गुरुवार को अभ्यास करने के लिए नहीं पहुंचे थे.

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रॉस टेलर का 100वां टेस्ट
न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ी बेहद विनम्र और सहज हैं. अक्सर भारतीय प्रेस के साथ वो हसी मंज़ाक़ करते हुए नज़र आ जाते हैं. मैं जब एक वीडियो शूट कर रहा था तो वहां मैं रॉस टेलर का ज़िक्र करने लगा क्योंकि इस मैदान में वो अपना सौवां टेस्ट खेलने वाले हैं.
अपना नाम सुनते ही टेलर कैमरे के पीछे जाकर खड़े हो गए और मुझे देखकर मुंह बनाने लगे. जब मेरी हंसी नहीं रुकी तो उन्होंने कहा- सब ठीक है न! मैं और ज़ोर से हंसने लगा तो उन्होंने कहा कि मैं आपसे इटंरव्यू भी हिंदी में करूंगा और फिर चल दिए.
न्यूज़ीलैंड का अलग अंदाज़
न्यूज़ीलैंड में क्रिकेट और ख़ास-तौर पर टेस्ट क्रिकेट को लेकर बिल्कुल एक अलग ही अंदाज़ है. टेस्ट मैच से एक दिन पहले बेसिन रिज़र्व मैदान में और मैदान के बाहर माहौल को देखकर आपको महसूस ही नहीं होगा कि दुनिया की नंबर-1 टेस्ट टीम यहां मैच खेलने वाली है.
न टिकटों को लेकर मारा-मारी, न फ़ैंस का शोरगुल और न ही नेट्स सेशन को देखने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग.

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भारतीय क्रिकेटरों को क्या सबसे पसंद?
स्टेडियम के आस-पास न तो किसी तरह के बड़े-बड़े साइनबोर्ड या फिर ग्राउंड में पोस्टर, जिससे ये लगे कि टेस्ट सिरीज़ शुरू होने वाली है.
आलम ये कि मैदान के बगल से बेहद व्यस्त सड़क जाती है लेकिन कोई भी विराट कोहली और उनके साथियों की झलक लेने के लिए रुकता नहीं है.
भारतीय खिलाड़ियों को न्यूज़ीलैंड में ये बात सबसे अच्छी लगती है कि उन्हें यहां कोई रोकता-टोकता नहीं है. भारतीय फ़ैंस भी उनकी निजता का सम्मान करते हैं.
हमलोगों को अक्सर रेस्तरां में कभी रवि शास्त्री कभी रविंद्र जडेजा तो कभी नवदीप सैनी खाना खाते टकरा जाते हैं.

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शास्त्री ने की थी अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत
एक दिन तो हमने अश्विन और पुजारा को सड़क के बाहर एक रेस्तरां में इत्मिनान से लंच करते देखा. बिल्कुल आम जनता की तरह. ये नज़ारा भारत तो क्या आपको ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड में भी देखने को नहीं मिलता है.
इस मैदान से भारतीय कोच रवि शास्त्री की बेहद शानदार यादें जुड़ी हैं. शास्त्री ने इसी मैदान से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी. नेट्स ख़त्म होने के बाद जब कोच अपने साथी और बॉलिंग कोच भरत अरुण के साथ मैदान की तरफ़ जा रहे थे तो किसी स्थानीय अधिकारी ने उनका ध्यान इस बात की तरफ़ दिलाया तो वे मुस्करा पड़े.
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