You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
#INDvsNZ : टी-20 में धोया पर वनडे में न्यूज़ीलैंड से क्यों हार रही भारतीय टीम?
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
मेज़बान न्यूज़ीलैंड ने ऑकलैंड में खेले गए दूसरे एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में भारत को 22 रन से मात दी.
इसके साथ ही न्यूज़ीलैंड ने तीन मैचों की सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त भी हासिल कर ली.
इसके पहले न्यूज़ीलैंड ने भारत को हैमिल्टन में खेले गए पहले एकदिवसीय मुक़ाबले में चार विकेट से हराया था. लगातार दो जीत ने भारत के जीत के रथ को भी रोक दिया है.
भारत ने न्यूज़ीलैंड से जिस अंदाज़ में इससे पहले पांच मैचों की टी-20 सीरीज़ में एकतरफ़ा 5-0 की जीत हासिल की थी उसे देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि न्यूज़ीलैंड ऐसा पलटवार करेगा.
हालांकि टी-20 सीरीज़ जीतने के बाद भारत के कप्तान विराट कोहली ने टीम को चेताया भी था कि न्यूज़ीलैंड को कम ना आंके.
दूसरी तरफ़, न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियमसन भी कह चुके थे कि टीम टी-20 में हार को भूलकर आगे बढ़ना चाहती है, और उसने ऐसा कर भी दिखाया.
दोनों मैचों में विलियमसन नहीं थे कप्तान
अब ये बात अलग है कि चोटिल होने के कारण केन विलियमसन शुरुआती दो मैच नहीं खेल सके.
उनकी अनुपस्थिति में विकेटकीपर बल्लेबाज़ टॉम लैथम ने शानदार कप्तानी कर न्यूज़ीलैंड को टी-20 सीरीज़ में मिली हार के सदमे से उबार लिया.
दूसरे मुक़ाबले में एक समय जब न्यूज़ीलैंड के पांच विकेट केवल 175 और आठ विकेट महज़ 197 रन पर गिर चुके थे तब लग रहा था कि न्यूज़ीलैंड बमुश्किल 220-230 रन बना सकेगा.
ऐसे में उसके सबसे अनुभवी बल्लेबाज़ रोस टेलर सकंटमोचक बनकर सामने आए. उन्होंने 74 गेंदो पर छह चौके और दो छक्कों की मदद से नाबाद 73 रन बनाए.
शुरुआत में तो वो बेहद संयम से खेले, लेकिन अपना अर्धशतक पूरा करने के बाद उन्होंने आक्रामक रुख़ अपनाया.
रोस टेलर ने नौवें विकेट के लिए कायल जेमीसन के साथ नाबाद 76 रनों की साझेदीरी की जो निर्णायक साबित हुई. इस जोड़ी ने न्यूज़ीलैंड को आठ विकेट पर 273 रन तक पहुंचाया.
ऑकलैंड का विकेट था तेज़
वैसे तो ऑकलैंड का मैदान काफ़ी छोटा है लेकिन उसका विकेट बहुत ही तेज़ और बाउंसी था. उस पर भारत के तेज़ गेंदबाज़ अपनी लाइन और लैंग्थ को सही दिशा नहीं दे सके. वे लगातार पटकी हुई गेंद करते रहे.
यही कारण था कि शार्दुल ठाकुर और जसप्रीत बुमराह महंगे भी साबित हुए. स्पिनर युज़्वेंद्र चहल ने तीन विकेट ज़रूर लिए लेकिन इसके लिए उन्होंने 58 रन ख़र्च कर दिए. सिर्फ़ रवींद्र जडेजा ने किफ़ायती गेंदबाज़ी की.
क्रिकेट समीक्षकों का ये भी मानना है कि अब वो पहले जैसे आक्रामक गेंदबाज़ नहीं रह गए हैं, इसलिए वो रन तो कम देते है लेकिन उन्हें विकेट कम मिलते हैं.
बल्लेबाज़ी करते समय भारत के लिए ख़तरे की घंटी तभी बज चुकी थी जब उसके छह बल्लेबाज़ 129 रन तक पैवेलियन लौट चुके थे. वो तो बाद में रवींद्र जडेजा ने 55 और नवदीप सैनी ने जैसे-तैसे 45 रन बनाकर भारत को बड़ी हार से बचाया.
श्रेयश अय्यर ने भी 52 रन की पारी खेली. लेकिन न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों की तारीफ़ करनी होगी जिन्होंने सधी हुई गेंदबाज़ी की. उन्होंने नई सलामी जोड़ी मयंक अग्रवाल और पृथ्वी शॉ के अलावा कप्तान विराट कोहली को जमकर रन बनाने को मौक़ा ही नहीं दिया.
टिम साउदी, हेमिश बेनेट, कॉलिन डी ग्रांडहोम और कायल जैमीसन की तेज़ गेंदबाज़ों की चौकड़ी ने 2-2 विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाज़ों की नाक में दम कर दिया.
पहले वनडे में भारत ने बनाए थे 347 रन
इसके पहले खेले गए पहले एकदिवसीय मुक़ाबले में तो दोनों टीमों के गेंदबाज़ विकेट के मिज़ाज को पढ़ ही नहीं सके.
पहले तो न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों ने 27 अतिरिक्त रन दिए. जिसकी मदद से भारत ने चार विकेट खोकर 347 रन बनाए. इसके बाद ऐसा लगा कि भारत इसका बचाव कर लेगा.
श्रेयश अय्यर ने एकदिवसीय क्रिकेट में अपना पहला शतक जमाते हुए 103 रन बनाए. केएल राहुल ने भी नाबाद 88 और कप्तान विराट कोहली ने 51 रन बनाए.
लेकिन इनकी मेहनत पर गेंदबाज़ो ने पानी फेर दिया. भारत ने 29 अतिरिक्त रन दिए. इनमें से 24 गेंद तो वाइड थीं. अपनी यॉर्कर के लिए मशहूर जसप्रीत बुमराह ने सबसे अधिक 13 गेंद वाइड कीं. नतीजा उन्होंने 10 ओवर में 53 रन लुटाए और उन्हें कोई विकेट भी नहीं मिला.
बेहद अनुभवी मोहम्मद शमी का हौसला भी दूसरे छोर पर टूटने लगा. उन्होंने भी 63 रन ख़र्च किए, लेकिन शार्दुल ठाकुर को तो न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों ने जैसे निशाना बना रखा था. 80 रन देकर एक विकेट लेना बताता है कि उन्हें अनुभव की कमी खली.
कुछ यही हाल स्पिनर कुलदीप यादव का रहा. उनकी धीमी फ्लाइटेड गेंदों का जादू रोस टेलर और कप्तान टॉम लैथम के अलावा हैनरी निकॉल्स पर नहीं चला. कुलदीप यादव ने 80 रन दिए.
भारत की गेंदबाज़ी बनी विलेन
न्यूज़ीलैंड के रोस टेलर ने अपने करियर का 21वां एकदिवसीय शतक लगाया. टी-20 सीरीज़ में भी उन्होंने दो अर्धशतक लगाए थे. एक तरह से वह इस मैच के हीरो रहे.
उन्होंने अपने ही अंदाज़ में जमकर खेलते हुए जब चाहा गेंद को बाउंड्री लाइन के पार पहुंचाया. उन्हें भारत की कमज़ोर फिल्डिंग का भी लाभ मिला. वो जब 10 रन पर थे तब रवींद्र जडेजा की गेंद पर उनका कैच कुलदीप यादव ने छोड़ा. ये कैच मैच को भारत के हाथ से ले गया.
मैच के बाद निराश श्रेयश अय्यर ने कहा कि अगर जीत जाते तो शतक की ख़ुशी अधिक होती, लेकिन जब न्यूज़ीलैंड की बल्लेबाज़ी आई तो विकेट अच्छा हो चुका था. जीत के लिए 348 रन बहुत अधिक है लेकिन न्यूज़ीलैंड शानदार खेला. विकेट में असमान उछाल था ओर ओस से भी फ़र्क पड़ा.
अब लगातार दो हार से भारत के आत्मविश्वास पर भी असर पड़ेगा और दूसरी तरफ़ न्यूज़ीलैंड को जीत की झप्पी मिल गई है जिसके बाद वो एक बार फिर अपने मैदान पर दमदार नज़र आ रही है.
मयंक अग्रवाल और पृथ्वी शॉ की जोड़ी वैसी शुरुआत नहीं दे रही है जैसा रोहित शर्मा और केएल राहुल देते थे. वैसे पहले मैच में 347 रन बुरे नहीं थे लेकिन दोनों मैच में भारत की गेंदबाज़ी कमज़ोर लगी. ये वही गेंदबाज़ी है जिसके दम पर भारत साल 2019 में लगातार जीतता रहा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)