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#INDvsNZ: न्यूज़ीलैंड पर भारत की 5-0 से जीत की पांच वजहें
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
साल के पहले विदेशी दौरे में भारतीय टीम ने न्यूज़ीलैंड को पांच मैचों की टी-20 सीरीज़ में एकतरफ़ा 5-0 से मात दी है.
न्यूज़ीलैंड की टीम पूरी सीरीज़ में बेहद दबाव में नज़र आई, जबकि अपने ही घर में वो बेहद मज़बूत मानी जाती है.
भारतीय टीम की गेंदबाज़ी के सामने न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ और भारतीय बल्लेबाज़ों के सामने न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ भीगी बिल्ली से दिखे.
न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास पहली बार अपने ही मैदानों पर खेलते हुए बेहद गिरा हुआ लगा.
दूसरी तरफ़ केएल राहुल, रोहित शर्मा, कप्तान विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने बल्लेबाज़ी में अपना कमाल दिखाया.
तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, नवदीप सैनी और शार्दुल ठाकुर की चौकड़ी के अलावा स्पिनर युज़्वेंद्र चहल और रविद्र जडेजा भी निर्णायक अवसर पर तुरुप के इक्के साबित हुए.
आख़िरकार कैसे भारत ने पहली बार न्यूज़ीलैंड को उसी की ज़मीन पर टी-20 सिरीज़ में हराया. इसकी पांच महत्वपूर्ण वजहें मानी जा सकती हैं.
1. केएल राहुल की दमदार बल्लेबाज़ी
भारत के सलामी बल्लेबाज़ केएल राहुल ने इस सीरीज़ में पांच मैचों में नाबाद 56 फिर 57, 27, 39 और 45 रनों की पारी खेली. उन्होंने 224 रन बनाए और वो भी 144 रन की स्ट्राइक रेट के साथ.
इसका इनाम उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज़ के रूप में मिला. इसके अलावा केएल राहुल ने विकेटकीपर की भूमिका भी कामयाबी के साथ निभाई, इससे कप्तान विराट कोहली को टीम में एक अतिरिक्त बल्लेबाज़ या गेंदबाज़ को खिलाने का अवसर मिला.
इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने पांचवें और अंतिम टी-20 मैच में विराट कोहली की अनुपस्थिति में कप्तानी की और पहला मैच जीतने में भी कामयाब रहे.
2. हिटमैन रोहित शर्मा का धमाल
भारत के सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा हालांकि दो मैचों में ही अपने बल्ले से कमाल कर सके. उन्होंने तीसरे मैच में 65 और पांचवें और आख़िरी मैच में नाबाद 60 रन की पारी खेली.
लेकिन उनकी इन पारियों ने भारत को सीरीज़ जीतने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने हैमिल्टन में खेले गए तीसरे मैच में भारत को तब जीत दिलाई जब मैच टाई रहने के बाद सुपर ओवर में जीत के लिए 17 रनों की ज़रूरत थी.
रोहित शर्मा ने लगातार दो छक्के जमाकर सारा तनाव समाप्त करते हुए भारत को जीत के साथ सीरीज़ में 3-0 की अजेय बढ़त दिलाई.
3. कप्तान विराट कोहली और श्रेयस अय्यर भी चमके
भारत के कप्तान विराट कोहली ने भी अपना दमख़म दिखाते हुए पहले ही मैच में 45 और उसके बाद तीसरे मैच में 38 रन बनाकर भारत को मज़बूती दी. इसके साथ-साथ इस सीरीज़ में उनकी फ़ील्डिंग भी लाजवाब रही.
इसका असर पूरी टीम पर पड़ा. चौथे मैच में तो भारतीय फ़ील्डर्स ने न्यूज़ीलैंड के तीन खिलाड़ियों को रन आउट किया.
विराट कोहली के भरोसे पर श्रेयस अय्यर भी खरा उतरे. श्रेयस अय्यर ने पहले ही मैच में नाबाद 58 रन बनाए और जीत के लिए 203 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करने में मदद की.
श्रेयस अय्यर का बल्ला यहीं नही रुका. उन्होंने दूसरे मैच में 44 और पांचवें और आख़िरी मैच में नाबाद 33 रन बनाकर दिखाया कि उनके रहते मध्यम क्रम में अब चिंता की कोई बात नहीं है, ख़ासकर नम्बर चार की उलझन उन्होंने सुलझा दी है.
4. भारतीय गेंदबाज़ छाए रहे
न्यूज़ीलैंड के तेज़ और उछाल लेते विकेट पर गेंदबाज़ी करना आसान नहीं होता लेकिन सभी भारतीय गेंदबाज़ों ने इस बार ऐसी गेंदबाज़ी की जैसे उन्हें वहां के विकेट का बरसों का अनुभव हो.
जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी के अलावा नवदीप सैनी और शार्दुल ठाकुर ने अपनी बेहतरीन लाइन और लैग्थ के साथ गेंदबाज़ी की.
मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह ने शॉर्ट पिच और बाउंसर जैसे हथियार का मोह त्यागकर यॉर्कर लैंग्थ पर गेंद की और न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों को बैकफ़ुट पर रखा.
मोहम्मद शमी ने तीसरे मैच में आख़िरी 20वें ओवर में न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियमसन और रोस टेलर के विकेट लेकर मैच को टाई करवा दिया. इसके बाद भारत सुपर ओवर में जीता.
चौथे मैच में अविश्वसनीय गेंदबाज़ी की शार्दुल ठाकुर ने. न्यूज़ीलैंड के सामने जीत के लिए 166 रन का लक्ष्य था. 19वें ओवर में उसका स्कोर तीन विकेट खोकर 158 रन था, यानि जीत लगभग तय थी, लेकिन शार्दुल ठाकुर ने आख़िरी ओवर की पहली ही गेंद पर रोस टेलर का विकेट चटकाया.
इसी ओवर में उन्होंने डेरेल मिचेल का विकेट भी लिया जबकि टिम सेफ़र्ट और मिचेल सैंटनर रन आउट हुए. नतीजा न्यूज़ीलैंड सात विकेट खोकर 165 रन बना सकी और मैच टाई रहा.
यह मैच एक तरह से भारतीय टीम ने अपने गेंदबाज़ों और फ़ील्डर्स के दम पर न्यूज़ीलैंड के जबड़े से निकाला क्योंकि सुपर ओवर में भारत जीता.
स्पिनर के तौर पर वॉशिंग्टन सुंदर, रविंद्र जडेजा और युज़्वेंद्र चहल को जितने अवसर मिले उसे उन्होंने हाथ से नहीं जाने दिया.
5. दबाव में बिखरे न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़
अब ऐसा भी नहीं है कि न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ बिलकुल नहीं चल सके. कप्तान केन विलियमसन के अलावा कोलिन मुनरो, टिम सेफ़र्ट, रोस टेलर ने अच्छी पारियां तो खेली लेकिन वो टीम को जीत नहीं दिला सके. शुरुआती तीन मैच बेहद नज़दीकी रहे.
भारतीय टीम के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी साल ऑस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप होना है, और वहां के विकेट न्यूज़ीलैंड जैसे ही हैं.
कहां तो भारत इससे पहले न्यूज़ीलैंड में खेले गए चार टी-20 मैच में से केवल एक ही जीत सका था और कहां अब 5-0 से उसका सफ़ाया ही कर दिया.
वैसे भारत के लिए यह सीरीज़ एक सबक़ भी दे गई कि पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारतीय टीम बड़ा स्कोर नहीं बना सकी. वो तो उसके गेंदबाज़ों का कमाल था कि टीम जीत की राह पर बढ़ती रही.
इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अब न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ होने वाली तीन मैचों की सीरीज़ में भी भारत का ही पलड़ा भारी रहने वाला है. इस सीरीज़ का पहला मैच बुधवार को खेला जाएगा.
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