साल 2019 भारत के लिए खेलों में कैसा रहा?

    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

हर साल की तरह साल 2019 भी भारतीय खेलों के लिहाज़ से महत्वपूर्ण रहा. क्रिकेट में भारत छाया रहा, बैडमिंटन में पीवी सिंधु विश्व चैंपियन बनीं लेकिन बाकी टूर्नामेंट में उन्होंने उम्मीदों के विपरीत खेल दिखाया.

मुक्केबाज़ी और कुश्ती में ठीक-ठाक प्रदर्शन रहा तो निशानेबाज़ों ने तो कमाल ही कर दिया. फुटबॉल में विश्व कप क्वालिफॉइंग मुक़ाबलों में भारत एक भी मैच नहीं जीत सका और फीफा रैंकिंग में 100 से बाहर हो गया. हॉकी में सिवाय टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के अलावा कुछ ख़ास था भी नहीं.

टेस्ट हो या वन-डे, भारत का बोलबाला

साल 2019 में भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड में आयोजित आईसीसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में न्यूज़ीलैंड से हारने के सिवा सब कुछ शानदार किया. टेस्ट क्रिकेट में उसकी नंबर एक रैंकिंग बरक़रार है तो एकदिवसीय क्रिकेट में भी उसका बोलबाला रहा.

भारत ने साल 2019 में ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज़ से उसी की ज़मीन पर टेस्ट सिरीज़ जीती. इसके बाद भारत ने अपने ही घर में खेलते हुए दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश से भी टेस्ट सिरीज़ जीती.

भारत ने साल की शुरुआत में ही ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिडनी में खेला गया चौथा टेस्ट मैच ड्रा खेला और सिरीज़ 2-1 से अपने नाम की. विराट कोहली की टीम ने इसके साथ ही इतिहास बनाया. यह भारत की ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर पहली टेस्ट सिरीज़ जीत थी.

इसके बाद भारत ने वेस्ट इंडीज़ को उसी के घर में 2-0 से हराया.

वेस्ट इंडीज़ को हराने के बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका को टेस्ट सिरीज़ में 3-0 से एकतरफ़ा मात दी. इस सिरीज़ में भारत ने अनूठा प्रयोग करते हुए अपने ही घर में रोहित शर्मा को सलामी बल्लेबाज़ को तौर पर इस्तेमाल किया.

रोहित शर्मा ने इसका फ़ायदा दोनों हाथों से उठाया. उन्होंने पहले ही टेस्ट मैच में पहली पारी में 176 और दूसरी पारी में 127 और उसके बाद तीसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में 176 रन बनाए. सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर रोहित शर्मा दुनिया के ऐसे पहले बल्लेबाज़ बने जिन्होंने अपने पहले ही टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाया.

दक्षिण अफ्रीका के बाद भारत ने बांग्लादेश को भी बेहद आसानी से टेस्ट सिरीज़ में 2-0 से हराया.

भारत ने बांग्लादेश को इंदौर में खेले गए पहले टेस्ट मैच में एक पारी और 130 रन से हराया. भारत के सलामी बल्लेबाज़ मयंक अग्रवाल ने इस टेस्ट मैच में 243 रन बनाए. वह मैन ऑफ द मैच भी रहे. तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए मैच में सात विकेट अपने नाम किए.

इसके बाद भारत ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में गुलाबी गेंद से खेले गए ऐतिहासिक डे-नाइट मैच में बांग्लादेश को एक पारी और 46 रन से हराया.

विराट कोहली ने इस मैच में अपना 27वां टेस्ट शतक जमाया, लेकिन मैच के हीरो रहे तेज़ गेंदबाज़ इशांत शर्मा जिन्होंने पूरे मैच में 9 विकेट हासिल किए.

एकदिवसीय क्रिकेट में भी भारतीय टीम ने दमदार प्रदर्शन किया. साल 2019 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में पांच मैचों की सिरीज़ में 3-1 से और न्यूज़ीलैंड को 4-1 से हराया. इसके बाद भारत ने वेस्ट इंडीज़ में भी तीन मैचों की एकदिवसीय सिरीज़ 2-0 से अपने नाम की.

वैसे 2019 में भारत ने अपने ही घर में खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पांच मैचों की एकदिवसीय सिरीज़ में 3-2 से हार का सामना भी किया. इसके अलावा भारत ने अपने ही घर में वेस्ट इंडीज़ को तीन मैचों की सिरीज़ में 2-1 से हराया.

भारत के इस प्रदर्शन से कप्तान विराट कोहली काफ़ी ख़ुश हैं लेकिन उन्हें इस बात का मलाल है कि भारत आईसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट के सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड से हारकर बाहर हुआ.

एक पारी के अंतर से लगातार चार टेस्ट मैच जीतने के अलावा बहुत से रिकॉर्ड भारतीय खिलाड़ियों ने बनाए.

पीवी सिंधु ने जीती वर्ल्ड चैंपियनशिप

बैडमिंटन में भारत की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने साल 2019 में वह कर दिखाया जो किसी भारतीय खिलाड़ी ने उनसे पहले नही किया.

पीवी सिंधु ने अगस्त के महीने में स्विट्ज़रलैंड में खेली गई विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता. ख़िताबी मुक़ाबले में उन्होंने जापान की नोज़ोमी आकूहारा को एकतरफ़ा 21-7, 21-7 से हराया.

इससे पहले वह साल 2018 में भी विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचीं लेकिन स्पेन की कैरोलिना मारिन से 21-19, 21-10 से हार गई थीं. साल 2017 में भी फाइनल में उन्हें जापान की नोज़ोमी ओकूहारा से 21-19, 20-22, 22-20 से हार का सामना करना पड़ा था.

इसके अलावा पीवी सिंधु पूरे साल नाकामी से जूझती रहीं.

वो इंडोनेशियन ओपन के फाइनल में पहुंचीं लेकिन जापान की अकाने यामागुची से हार गईं. बाक़ी टूर्नामेंट ऑल इंग्लैंड ओपन, जापान ओपन, चाइना ओपन, डेनमार्क ओपन, फ्रैंच ओपन और हॉन्ग-कॉन्ग ओपन में भी वह कुछ ख़ास नहीं कर सकीं.

संयोग से यही हाल भारत की दूसरी स्टार खिलाड़ी साइना नेहवाल का भी रहा. पूरे साल वह केवल इंडोनेशियन ओपन ही जीत सकीं. वह भी तब जब उनकी विरोधी स्पेन की कैरोलिना मारिन पहले गेम में 10-4 से आगे रहने के बाद चोट के कारण मुक़ाबले से हट गईं.

पुरुष वर्ग में के श्रीकांत जो एक समय कभी दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल थे वह केवल इंडियन ओपन के फाइनल में पहुंचे. फाइनल में उन्हें डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसेन से हार का सामना करना पड़ा.

बीसाई प्रणीत ने ज़रूर कुछ दमख़म दिखाया. उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. इसके अलावा उन्होंने सिंगापुर ओपन जीता और स्विस ओपन के फाइनल में पहुंचे.

पुराने धुरंधर पी कश्यप कनाडा ओपन के फाइनल में पहुंचे लेकिन हार गए.

पुरुष युगल वर्ग में भारत के सात्विक साईराज रैंकी रेड्डी और चिराग सेट्टी की जोड़ी ने थाईलैंड ओपन और ब्राज़ील इंटरनैशनल टूर्नामेंट जीता. यह जोड़ी फ्रैंच ओपन में उपविजेता भी रही.

कुश्ती से ओलंपिक की राह

वैसे तो कुश्ती में भारतीय खिलाड़ी पूरे साल कई टूर्नामेंट में पदक जीतते रहे लेकिन उनका मक़सद तो विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में पदक जीतकर ओलंपिक का टिकट हासिल करना था. भारतीय पुरुष पहलवानों ने रूस में हुई विश्व चैंपियनशिप में एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते.

इनमें दीपक पूनिया में 86 किलो में रजत पदक जीता. उनके अलावा रवि कुमार दहिया ने 57 किलो और बजरंग पूनिया ने 65 किलो में कांस्य पदक जीतकर टोक्यो ओलंपिक के लिए अपनी जगह पक्की की.

61 किलो में राहुल अवारे ने भी कांस्य पदक जीता लेकिन यह वज़न वर्ग ओलंपिक में शामिल नही है. इनके साथ-साथ जापान में हुई महिला विश्व चैंपियनशिप में 53 किलो में भारत की विनेश फोगाट ने कांस्य पदक जीतकर टोक्यो ओलंपिक के लिए टिकट हासिल किया.

निशानेबाज़ी में मनु भाकर और सौरभ का कमाल

साल 2019 में भारतीय महिला और पुरुष निशानेबाज़ छाए रहे. अभी तक भारत के 15 निशानेबाज़ टोक्यो ओलंपिक में जगह बना चुके हैं.

इनमें अपूर्वी चंदेला और अंजुम मोदगिल 10 मीटर एयर राइफल में, सौरभ चौधरी, मनु भाकर और यशस्विनी देसवाल 10 मीटर एयर पिस्टल में, राही सरनोबत और चिंकी यादव 25 मीटर एयर पिस्टल में, दिव्यांश सिंह पंवार एयरराइफल मिश्रित टीम में, संजीव राजपूत, तेजस्विनी सांवत और एश्वर्य सिंह तोमर 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन, अंगद बाजवा और मेराज़ अहमद खान स्कीट में और दीपक कुमार 10 मीटर एयर राइफल में पदक पर निशाना साधने की कोशिश करेंगे.

पिछले रियो ओलंपिक में भारत के 12 निशानेबाज़ों ने हिस्सा लिया था लेकिन किसी को भी पदक नहीं मिला था.

केवल 17 साल की मनु भाकर ने साल 2019 में भी आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर पिस्टल में एक व्यक्तिगत और तीन मिश्रित टीम स्वर्ण पदक जीते.

साल 2018 में मनु भाकर ने एक स्वर्ण और एक मिश्रित टीम स्वर्ण पदक जीता था. उन्हीं की तरह 17 साल के ही सौरभ चौधरी ने 10 मीटर एयर पिस्टल में साल 2019 में आईएसएसएफ विश्व कप में दो व्यक्तिगत स्वर्ण, एक रजत और चार मिश्रिट टीम स्वर्ण पदक जीते.

हॉकी: टोक्यो की राह

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम ने भी साल 2019 में देश और विदेश में कई टूर्नामेंट में हिस्सा लिया. इसका नतीजा यह निकला कि आखिरकार दोनों ही टीमों ने अंतिम समय में टोक्यो के लिए क्वालिफाई किया.

भारतीय पुरुष टीम को टोक्यो में ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, स्पेन, न्यूज़ीलैंड और जापान के साथ रखा गया है.

भारतीय महिला टीम को नीदरलैंड्स, जर्मनी, ब्रिटेन, आयरलैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है.

मुक्केबाज़ी: विश्व चैंपियनशिप में मैरी कॉम का आठवा पदक

साल 2019 में भारतीय महिला और पुरुष मुक्केबाज़ों ने अपना दमख़म विश्व चैंपियनशिप में दिखाया.

रूस में हुई महिला विश्व चैंपियनशिप नें भारत ने एक रजत और तीन कांस्य पदक सहित चार पदक जीते.

इनमें मंजू रानी ने रजत और एमसी मैरीकॉम, जमुना बोरो और लवलीना बोरगेहेन ने कांस्य पदक जीते.

एमसी मैरीकोम का विश्व चैंपियनशिप में यह रिकार्ड आठंवा पदक रहा. इनमें छह स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक शामिल हैं.

भारतीय पुरुष मुक्केबाज़ों ने भी एक रजत और एक कांस्य पदक जीता. भारत के अमित पंधाल ने फ्लाईवेट में रजत पदक जीता. ऐसा कारनामा करने वाले वह भारत के पहले मुक्केबाज़ भी बने. मनीष कौशिक ने फ्लाईवेट में कांस्य पदक जीता.

इसके बावजूद इन्हें ओलंपिक के लिए क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेना होगा.

इसके अलावा भी कुछ दूसरे खेलों में भारतीय खिलाड़ी कामयाबी हासिल करते रहे. युवा बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने बांग्लादेश इंटरनेशनल, स्कॉटिश ओपन और बेल्जियन इंटरनेशनल का ख़िताब जीता. नेपाल में हुए सैफ गेम्स में भारत ने 174 स्वर्ण, 93 रजत और 45 कांस्य पदक सहित 312 पदक जीते.

भारतीय फुटबॉल टीम कुछ ख़ास नहीं कर सकी. यहां तक कि उसकी रैंकिंग 108वें पायदान पर पहुंच गई है, जबकि साल 2018 में वह 97वें स्थान पर था.

लेकिन शतरंज की बिसात पर भारत की कोनेरू हम्पी ने साल के जाते-जाते महिला विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का ख़िताब जीता.

साल 2020 खेलों के लिहाज़ से भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सबकी नज़रें आईसीसी वर्ल्ड टी-20, अंडर-19 विश्व कप के अलावा दुनिया के सबसे बड़े खेल मेले टोक्यो ओलंपिक पर भी होंगी.

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