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IPL 2019, MI vs CSK: 42 रन लुटाने वाले मलिंगा ने कैसे बाजी पलटी
- Author, शिवकुमार उलगनाथन
- पदनाम, बीबीसी तमिल
हर तरह के खेलों में आश्चर्य, झटके और नामुमकिन के मुमकिन होने जैसी चीज़ें होती हैं. क्रिकेट भी ऐसा ही खेल है जहां हार और जीत सेकंडों में तय होती है. यही वजह है कि क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल भी कहा जाता है.
इसी अनिश्चितता के खेल में एक अप्रत्याशित मोड़ रविवार को हैदराबाद में चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच आईपीएल फ़ाइलन में देखने को मिला.
चेन्नई सुपरकिंग्स जीत के लिए 150 रनों का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मज़बूती से आगे बढ़ रही थी और उसे 12 गेंदों में 18 रन की दरकार थी और उसके पास छह विकेट थे.
शेन वॉटसन दूसरे क्वालियफ़ायर मैच की तरह ही फ़ॉर्म में थे और यह समझा जा रहा था कि इस सीज़न में मुंबई इंडियंस से तीन हार का बदला चेन्नई ले ही लेगी.
19वें ओवर की आख़िरी गेंद पर विकेटकीपर क्विंटन डीकॉक ने हाथ में आई आसान डॉट बॉल को छोड़ दिया और वह सीधा बाऊंड्री के पार गई. इसने चेन्नई सुपरकिंग्स को और ताक़त दी और उसे सिर्फ़ छह गेंदों में नौ रन बनाने थे और और शेन वॉटसन अभी भी क्रीज़ पर थे.
आख़िरी ओवर मलिंगा को
लेकिन इसके बाद जो छह गेंदें डाली गईं, उसकी कल्पना ही की जा सकती है. 20वें ओवर की आख़िरी गेंद पर जब चेन्नई को जीत के लिए दो रन की ज़रूरत थी तब लसिथ मलिंगा ने शार्दुल ठाकुर को एलबीडब्ल्यू आउट किया.
आईपीएल में सबसे अधिक विकेट लेने वाले लसिथ मलिंगा ने अब तक 100 से अधिक मैच खेले हैं. हालांकि, प्रतिभा या अनुभव के बावजूद भी आख़िरी ओवर का दबाव किसी भी गेंदबाज़ पर बहुत होता है.
साथ ही लसिथ मलिंगा आख़िरी ओवर तक बहुत बढ़िया गेंदबाज़ी नहीं कर पा रहे थे. शेन वॉटसन और ब्रावो ने उनकी गेंदों को ख़ूब पीटा था. उन्होंने पिछले तीन ओवरों में 42 रन दिए थे.
कई फ़ैन्स सोच रहे थे उनको आख़िरी ओवर नहीं दिया जाएगा. कई यह मानकर चल रहे थे कि पंड्या बंधुओं में से कोई एक आख़िरी ओवर डालेगा लेकिन कप्तान रोहित शर्मा ने अनुभव को तरज़ीह देते हुए मलिंगा को गेंद दी और उनका फ़ैसला सही भी साबित हुआ.
इस सीज़न के 12 मैचों के अंतिम ओवरों में मलिंगा ने 16 विकेट लिए हैं और असल में उनका विकेट लेने, औसत और इकॉनमी रेट का प्रदर्शन साल 2017 के प्रदर्शन से थोड़ा बेहतर था.
उन्होंने कुल चार ओवर डाले और उनमें 49 रन देकर सिर्फ़ एक विकेट लिया.
अगर मलिंगा ने आख़िरी गेंद पर विकेट नहीं लिया होता तो उन्हें सोशल मीडिया और फ़ैन्स से काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता. लेकिन भाग्य ने उनका साथ दिया और वह विजेता बनकर उभर गए.
हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं है जब मलिंगा ऐसे उभरकर सामने आए हों. इससे पहले श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम और पिछले आईपीएल सीज़न में खेलते हुए भी उन्होंने कई बार अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाया है.
ऐसा भी नहीं है कि मुंबई इंडियंस ने आख़िरी ओवर में 10 से कम रन का बचाव पहली बार किया है. 2017 में पुणे सुपराजयंट्स के ख़िलाफ़ मिचेल जॉनसन मुंबई इंडियंस के लिए पहले भी यह कारनामा कर चुके हैं.
अंतिम ओवरों के यादगार लम्हे
1997 में कराची में खेले गए एक बेहद दबाव भरे मैच में सक़लैन मुश्ताक़ की गेंद पर राजेश चौहान ने छक्का लगाया था. सक़लैन को आज भी अपने उस ओवर के लिए याद किया जाता है.
इसी तरह भारतीय गेंदबाज़ चेतन शर्मा की आख़िरी गेंद पर जावेद मियांदाद के छक्का मारने को कौन भारतीय फ़ैन भूला होगा. जब लगभग जीती हुई बाज़ी पलट गई थी और ख़ुशी ग़म में तब्दील हो गई थी.
इसके अलावा 2011 विश्व कप और 2007 टी-20 विश्व कप के हीरो समझे जाने वाले युवराज सिंह को श्रीलंका के ख़िलाफ़ 2014 के टी-20 विश्व कप फ़ाइनल में हार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.
युवराज ने संघर्ष करते हुए 21 गेंदों में 11 रन बनाए थे. वह ऐसी पिच थी जिस पर कई खिलाड़ियों को रन बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था लेकिन इस बात को भुला दिया गया.
लांस क्लूज़नर 1999 विश्व कप के हीरो थे लेकिन एलन डोनल्ड ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ी का सामना नहीं कर सके और रन आउट हो गए. मैच टाई हो गया जिसके कारण दक्षिण अफ़्रीका विश्व कप फ़ाइनल में नहीं पहुंच पाई.
2015 विश्व कप सेमी फ़ाइनल में एक बार फिर दक्षिण अफ़्रीका को बुरे लम्हे का सामना करना पड़ा. रॉस टेलर का विकेट गिरने के बाद दक्षिण अफ़्रीका सोचकर चल रही थी कि वह फ़ाइनल में पहुंच जाएगी लेकिन ग्रेंड एलिएट ने शानदार खेल दिखाते हुए अंतिम ओवर में न्यूज़ीलैंड की टीम को जीत दिलाई.
हालांकि, क्रिकेट ऐसा खेल है जिसमें हर लम्हा कुछ न कुछ उतार-चढ़ाव आता है. लसिथ मलिंगा और मुंबई इंडियंस ने भी रविवार को ऐसे ही उतार-चढ़ाव का सामना किया और साथ ही उन्होंने खेल में हर समय उम्दा प्रदर्शन करने और विश्वास बनाए रखने को भी दर्शाया.
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