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IND VS NZ: बोल्ट के आख़िरी झटकों से बचेगी टीम इंडिया?
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार बीबीसी हिंदी के लिए
विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने लगातार तीन मैच जीतकर न्यूज़ीलैंड से पांच एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ पहले ही अपने नाम कर ली थी.
इसके बाद विराट कोहली को सिरीज़ के बाकी बचे दो मैचों और आगामी टी-20 सिरीज़ से आराम दिया गया. कोहली भारत लौट आए.
कोहली की ग़ैर मौजूदगी में रोहित शर्मा ने टीम की कमान संभाली.
लेकिन मेज़बान न्यूज़ीलैंड ने हेमिल्टन में खेले गए चौथे मुक़ाबले में भारत को आठ विकेट से हराकर कई सवालों को एक बार फिर ज़िंदा कर दिया.
यह बात भी ख़ूब फैली कि अब लग रहा है कि भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड में खेल रही है. कुछ भी हो इस परिणाम से एकतरफा साबित होती जा रही सिरीज़ में नई जान और रोमांच आ गया है.
गेंदबाज़ों के सामने टेके घुटने
चौथे वनडे में इस सिरीज़ में ऐसा पहली बार हुआ, जब भारतीय टीम ने न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों के सामने घुटने टेके.
उछाल और स्विंग से भरे विकेट पर टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी की दावत पाकर भारतीय टीम 30.2 ओवर में ही महज़ 92 रनों पर सिमट गई.
इससे पहले भारत ने पहला मैच आठ विकेट से जीता तो दूसरा मैच 90 रन से. दूसरे मैच में तो भारत ने चार विकेट खोकर 324 रन बनाए थे. तीसरा मैच भारत ने सात विकेट से जीता था.
ज़ाहिर है कि भारत ने जिस एकतरफा अंदाज़ में शुरूआती तीन मैच जीते, उससे मध्यम क्रम और पुछल्ले बल्लेबाज़ों का अपना दमख़म दिखाने का पूरा मौक़ा नही मिला.
और जब चौथे मैच में अवसर मिला तो उछाल लेते विकेट पर ट्रैंट बोल्ट और कोलिन डि ग्रैंडहोम की गेंदों का सामना नहीं कर सके.
हार और जीत तो चलती रहती है लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ी जैसे लड़खड़ाई, उसने टीम के विश्व कप की तैयारियों के दावों की पोल खोल दी.
कोहली और धोनी कितने ज़रूरी
विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी एकदिवसीय क्रिकेट में भारत के कितने ज़रूरी हैं, यह भी साबित हो गया.
महेंद्र सिंह धोनी के बल्ले से ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ सिडनी में 51, एडिलेड में नाबाद 55 और मेलबर्न में भी नाबाद 87 रनों की पारी ने उनकी अहमियत बता दी.
न्यूज़ीलैंड में भी उन्हें दूसरे एकदिवसीय मुक़ाबले में बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा मिला जहां उन्होंने नाबाद 48 रन बनाए. हालांकि धोनी इसके बाद चोटिल हुए. लेकिन अब वो पांचवें वनडे में मैदान पर लौट रहे हैं. धोनी की मौजूदगी से टीम का मनोबल बढ़ना तय है.
यहां तक कि न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ी भी मान रहे हैं कि धोनी को सस्ते में पवैलियन लौटाए बिना टीम की जीत मुश्किल है.
इससे पहले उनके बल्ले से साल 2017 में श्रीलंका के ख़िलाफ धर्मशाला में खेले गए एकदिवसीय मुक़ाबले में अर्धशतक निकला था.
इस दौरान कई बार उन पर मैच फिनिशर की भूमिका ना निभाने के आरोप भी लगे. यही कारण था कि युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ धवन को मौक़े दिये गए.
ऑस्ट्रेलिया से पहली बार टेस्ट सिरीज़ जीतने के बाद ऋषभ पंत को ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ एकदिवसीय सिरीज़ में आराम दिया गया.
उनकी जगह दिनेश कार्तिक को धोनी के टीम में रहते भी मौक़े मिले और उन्होंने ठीक-ठाक ही प्रदर्शन किया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि अगर टीम का टॉप-ऑर्डर ना चले तो टीम का क्या हो.
अकसर देखा गया है कि अगर विराट कोहली बड़ा स्कोर ना बनाए तो फिर टीम लड़खड़ाने लगती है.
इसी बात को ध्यान में रखकर टीम के बल्लेबाज़ी कोच संजय बांगर ने कहा कि टीम ने क्षमता और अपेक्षाओं से नीचे स्तर का प्रदर्शन किया.
लेकिन अब इसे भूलकर आगे बढ़ना होगा.
शुभमन गिल से उम्मीदें और प्रदर्शन
पिछले मैच में अंडर-19 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के अहम खिलाड़ी रहे शुभमन गिल को भी अपना पहला एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेलने का मौक़ा मिला.
वह केवल नौ रन बना सके.
लेकिन रोहित शर्मा और शिखर धवन के अलावा अंबाती रायडू, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव और हार्दिक पांड्या भी जिस अंदाज़ में आउट हुए उससे पता चल गया कि विश्व कप में अगर हेमिल्टन से मिलता जुलता विकेट मिला तो क्या होगा.
इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली का मानना है कि शुभमन गिल की अभी आलोचना नहीं की जा सकती क्योंकि वह तो अपना पहला ही मैच खेल रहे थे.
लेकिन दिनेश कार्तिक, केदार जाधव और अंबाती रायडू तो काफी समय से भारतीय टीम के साथ हैं.
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि जब इतना कम स्कोर हो तो गेंदबाज़ भी क्या कर सकते हैं. भारतीय गेंदबाज़ो ने तो पिछले कुछ समय से देश और विदेश में बहुत शानदार प्रदर्शन किया है.
कुलदीय यादव और चहल की स्पिन जोड़ी ने तो आर अश्विन और रविंद्र जडेजा जैसी स्थापित जोड़ी की वापसी भी मुश्किल कर दी है.
मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार भी विरोधी टीम पर भारी पड़े हैं.
5वें वनडे में क्या होगा
वैसे विजय लोकपल्ली इस हार से बहुत निराश नही हैं.
उनका मानना है, ''सिरीज़ भारत जीत ही चुका है. हैमिल्टन में बोल्ट ने जो स्पैल डाला वो उनका शानदार प्रदर्शन था. खिलाड़ियों को वहां विकेट पर पहले जमने और उनके बाद आक्रामक बल्लेबाज़ी करने की ज़रूरत थी.''
लोकपल्ली कहते हैं, ''लंबे समय बाद भारत ने इतना खराब प्रदर्शन किया है. अगले मैच में ज़रूर भारतीय टीम सबक लेकर मैदान में उतरेगी.''
दोनों टीमों के बीच 5वां और आख़िरी एकदिवसीय मुक़ाबला रविवार को वेलिंग्टन में खेला जाएगा.
टीम में धोनी की वापसी के साथ ही भरोसा भी लौट आएगा. वेलिंग्टन में मिली हार के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने भी खुले दिल से माना कि यह बल्लेबाज़ी के साथ बहुत खराब हार थी.
दूसरी तरफ पहले ही सिरीज़ गंवा चुकी न्यूज़ीलैंड अगर रविवार का मुक़ाबला जीतती है तो 3-2 का आंकड़ा बुरा नही है.
लेकिन अगर हारी तो 4-1 से अपनी ही ज़मीन पर हारना उन्हें मायूस ही करेगा.
जो भी हो भारत को वेलिंग्टन में भी ट्रैंट बोल्ट के झटकों से बचना होगा. बोल्ट ने केवल 21 रन देकर पांच विकेट लेकर पूरी भारतीय टीम को हिला कर रख दिया.
यह विश्व कप से पहले भारत का विदेशी ज़मीन पर आख़िरी एकदिवसीय मुक़ाबला है.
इस मैच में न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियमसन, रोस टेलर और मार्टिन गप्टिल के अलावा हैनरी निकोलस बड़ी पारियां खेलकर अपना खोया आत्मविश्वास और लय पाना चाहेंगे.
विदेशी ज़मीन पर पिछले साल एकदिवसीय मुक़ाबलों में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को छह मैचों की सिरीज़ में 5-1 से हराया.
लेकिन इसके बाद इंग्लैंड से तीन मैचों की सिरीज़ 2-1 से हार गया.
इसके बाद भारत ने रोहित शर्मा की कप्तानी में एशिया कप जीता और उसके बाद हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से भी एकदिवसीय सिरीज़ 2-1 से जीती.
न्यूज़ीलैंड से भी भारत अभी तो इस सिरीज़ में 3-1 से आगे है. रविवार की जीत चिंता मिटाएगी और हार चिंता बढ़ा जाएगी.
वैसे वैलिंग्टन में पिछली बार साल 2014 में न्यूज़ीलैंड ने भारत को 87 रन से हराया था.
तब न्यूज़ीलैंड ने रॉस टेलर के 102 रनों की मदद से निर्धारित 50 ओवर में 5 विकेट खोकर 303 रन बनाए. जवाब में भारत 216 रन पर सिमट गया.
भारत पांच मैचों की वो सिरीज़ 4-0 से हारा था.
अब देखना है कि अंतिम मैच किसके नाम रहता है.
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