पृथ्वी के लिए वनडे टीम में जगह कैसे बनेगी?

पृथ्वी शॉ का जलवा

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    • Author, टीम बीबीसी हिन्दी
    • पदनाम, नई दिल्ली

''किसी ऐसे खिलाड़ी का टीम में होना शानदार है, जो बिलकुल नहीं डरता और वो लापरवाह नहीं हैं. अपने खेल को लेकर आत्मविश्वास से भरे हैं. नई गेंद के ख़िलाफ़ इस तरह का कंट्रोल नायाब गुर है. जब हम 18-19 साल के थे, तो उसका 10% भी नहीं थे.''

ये बात किसी और ने नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कही है. कोहली ख़ुद इतने शानदार और आक्रामक खिलाड़ी हैं, ऐसे में जब वो ये बात किसी खिलाड़ी के लिए कहेंगे तो गौर करना ज़रूरी हो जाता है.

कप्तान कोहली ने ये बात पृथ्वी शॉ के बारे में कही है. वही पृथ्वी, जिन्हें भारतीय क्रिकेट की नई सनसनी कहा जा रहा है. वो 19 साल के हुए नहीं हैं लेकिन अपने पहले टेस्ट की पहली पारी में शतक और दूसरे टेस्ट में आक्रामक 70 रन बनाने वाले पृथ्वी ने धमाकेदार एंट्री की है.

पृथ्वी शॉ

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लगातार शानदार प्रदर्शन

हर बल्लेबाज़ को घर में खेलने का फ़ायदा मिलता है, ये सही है. लेकिन जिस तरह से पृथ्वी शॉ ने अपने पहले टेस्ट मैच में आक्रामकता दिखाई, वो बेहद अलग है.

शॉ अंडर 19 टीम के कप्तान के तौर पर कई आक्रामक पारियां खेल चुके थे, लेकिन सीनियर क्रिकेट में पहला मैच खेल रहे इस 18 साल के लड़के ने वो दिलेरी दिखाई, जो आम तौर पर नहीं दिखती.

और ऐसा नहीं कि शॉ सिर्फ़ जूनियर क्रिकेट में कामयाब रहे हैं. साल 2016-17 के रणजी सीज़न में उन्होंने मुंबई के लिए खेलते हुए अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट का आगाज़ किया था और पहले मैच की दोनों पारियों में शतक लगाकर बताया कि लोग उनकी तुलना महान बल्लेबाज़ों से क्यों करते हैं.

इसके अलावा वो दलीप ट्रॉफ़ी के पहले मैच में भी शतक लगा चुके हैं.

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गवाही देते आंकड़े

मीडिया में जारी सचिन तेंदुलकर से तुलना अगर छोड़ भी दी जाए तो जो लोग पृथ्वी शॉ में सचिन-सहवाग का अक़्स देख रहे हैं, उनके पास वजह भी हैं. शॉ प्रथम श्रेणी में 16 मैचों में 78 की औसत से 1655 रन बनाए हैं, जिनमें आठ शतक और छह फ़िफ़्टी लगा चुके हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं कि आंकड़े इस नौजवान के पक्ष में गवाही दे रहे हैं और साथ ही टैलेंट से भी कोई इनकार नहीं कर सकता. लेकिन भारतीय वनडे टीम का कंपोजिशन कुछ इस तरह का है किसी भी नए खिलाड़ी के लिए जगह बनाना काफ़ी मुश्किल है.

अगले साल की शुरुआत में इंग्लैंड में विश्व कप खेला जाना है, ऐसे में टीम को कमोबेश फ़ाइनल आकार देकर अभ्यास के लिए भी पर्याप्त वक़्त देना ज़रूरी है. महेंद्र सिंह धोनी को खिलाना जारी रखें या फिर ऋषभ पंत को मौक़ा दिया जाए, इस सवाल से पहले से जूझ रहे टीम मैनेजमेंट को अब पृथ्वी शॉ ने नया सिरदर्द दे दिया है.

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लेकिन सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर टेस्ट में शानदारी एंट्री लेने वाले पृथ्वी के लिए वनडे में ये जगह खाली है? जवाब है ना. इसकी वजह ये है कि फिलहाल वनडे टीम में भारत की तरफ़ से रोहित शर्मा और शिखर धवन उतर रहे हैं और दोनों ही क़रीब-क़रीब सेट हैं.

रोहित दाएं हाथ से खेलते हैं जबकि धवन बाएं, ऐसे में ये भी टीम के लिए फ़ायदा है. दोनों खिलाड़ी ऐसे हैं कि किसी भी पल गियर बदल सकते हैं. एक जूझ रहा होता है तो दूसरा आक्रामक होकर हालात संभाल लेता है. दोनों के बीच 13 बार शतकीय साझेदारी हो चुकी हैं.

ऐसे में दोनों में से किसी एक को हटाकर पृथ्वी को मौक़ा देना शायद सही नहीं होगा. जानकारों का कहना है कि पृथ्वी को वनडे टीम में जगह दी जा सकती है लेकिन ज़रूरी नहीं कि वो सलामी बल्लेबाज़ के रूप में उतरें.

रोहित और शिखर के अलावा विराट कोहली आते हैं, जिनकी जगह मिलने का कोई सवाल ही नहीं है. इन तीन के अलावा के एल राहुल हैं, जिन पर टीम मैनेजमेंट काफ़ी भरोसा दिखा रहा है. लेकिन शॉ की शुरुआती तीन टेस्ट पारियों ने चयनकर्ताओं को हिला ज़रूर दिया है.

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'वनडे क्रिकेट में मिले मौक़ा'

वरिष्ठ खेल पत्रकार धर्मेंद्र पंत का कहना है कि पृथ्वी शॉ ने जिस तरह टेस्ट क्रिकेट में शुरुआत की है, उन्हें वनडे क्रिकेट में ज़रूर मौक़ा दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ''टेस्ट टीम के बजाय भारतीय टीम को वनडे टीम में बल्लेबाज़ की ज़रूरत ज़्यादा है. टीम में मध्यक्रम में जगह खाली है और कोई भी बल्लेबाज़ अभी तक ख़ुद को इसके लिए साबित नहीं कर सका है.''

ये बात सही भी दिखती है. राहुल हो, रहाणे, मनीष पांडे या फिर दिनेश कार्तिक, सभी खिलाड़ियों ने एक-दो पारियों से ध्यान ज़रूर खींचा है, लेकिन कोई भी ऐसा नहीं जो निरंतरता साबित कर पाया हो.

लेकिन पृथ्वी शॉ सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर ज़्यादा कामयाब नहीं दिख रहे क्योंकि उनका रुख़ काफ़ी आक्रामक है, ''वनडे क्रिकेट में अब दोनों छोर से नई गेंद का इस्तेमाल होता है. इसका मतलब ये हुआ कि 50 ओवर बाद भी गेंद 25 ओवर पुरानी होती है.''

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''ऐसे में अगर पृथ्वी को बीच में बैटिंग के लिए उतारा जाता है, तो वो टीम के काफ़ी काम आ सकते हैं. वो निडर होकर खेलते हैं, स्ट्रोक प्लेयर हैं, ऐसे में गेंद पर प्रहार कर सकते हैं.''

लेकिन जो बल्लेबाज़ पहले नंबर पर आकर इतना अच्छा खेल रहा है, उसे बाद में उतारना नाइंसाफ़ी नहीं होगी, पंत ने कहा, ''टेस्ट टीम के बजाय वनडे क्रिकेट में रोहित शर्मा और शिखर धवन के रूप में सलामी बल्लेबाज़ सेटल दिख रहे हैं.''

''शर्मा पहले निचने क्रम में खेल रहे थे लेकिन उनसे ओपनिंग कराई और वो बेहद फ़ायदेमंद साबित हो रहे हैं, ऐसे में अब इस पार्टनरशिप को तोड़ना ठीक नहीं होगा. शॉ को मध्यक्रम में खिलाया जाए, तो आगामी विश्व कप के लिहाज़ से अच्छा रहेगा.''

लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि शॉ को लेकर जल्दबाज़ी दिखाई जा रही है और सिर्फ़ भारतीय पिचों पर खेली गई पारियों के आधार पर फ़ैसला नहीं होना चाहिए?

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भारतीय टीम को जल्द ही ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है और वहां खेले गए टेस्ट मैच बता देंगे कि पृथ्वी शॉ सिर्फ़ घर में अच्छा खेल सकते हैं या फिर इस नौजवान ने उछाल भरी पिचों से भी निपटना सीख लिया है.

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