क्रिकेट मैदान पर क्या कहता है पृथ्वी शॉ और ऋषभ पंत का पराक्रम

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
ट्वेंटी-20 की पीढ़ी टेस्ट क्रिकेट खेले तो क्या हो सकता है? जवाब पृथ्वी शॉ के बल्ले ने दिया.
उस हैदराबाद शहर में जो चारमीनार के लिए मशहूर है. इस शहर में कलाई के जादूगर पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरूद्दीन और वीवीएस लक्ष्मण की जादुई बल्लेबाज़ी कहानियां सुनाई जाती हैं.
लेकिन, पृथ्वी शॉ के बल्ले ने इस ऐतिहासिक शहर को सुनाने के लिए कुछ किस्से और दे दिए.
मुंबई के तेज़तर्रार ओपनर ने सिर्फ़ 53 गेंदों में 70 रन बनाए. स्ट्राइक रेट था 132. महज दूसरा टेस्ट खेल रहे अठारह बरस के इस युवा ने अपनी बल्लेबाज़ी से बताया कि क्रिकेट के सबसे पुराने फ़ॉर्मेट को नई पीढ़ी नया कलेवर देने को तैयार है.

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हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में युवा जोश के जलवे की झलक विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत और तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव ने भी दिखाई और भारतीय क्रिकेट के भविष्य की तस्वीर में उम्मीदों के नए रंग भरते दिखे.
वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ यहां खेले जा रहे दूसरे और आखिरी टेस्ट मैच के दूसरे दिन मेहमान टीम की पहली पारी 311 रन पर समाप्त हुई. मौजूदा सिरीज़ में ही नही बल्कि बीते कई सालों में वेस्ट इंडीज़ के बल्लेबाज़ों ने भारत में पहली बार सौ से अधिक ओवर खेले.
दूसरे दिन के पहले सत्र में उमेश यादव की गेंद क़हर न ढातीं तो वेस्ट इंडीज का स्कोर कहीं ज़्यादा होता. उमेश यादव ने 26.4 ओवर में 88 रन देकर 6 विकेट झटके.
ये कामयाबी कितनी अहम इसकी जानकारी आंकड़े देते हैं. भारतीय ज़मीन पर भारत के किसी तेज़ गेंदबाज़ ने करीब 20 साल बाद टेस्ट की एक पारी में छह विकेट लिए हैं.

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आक्रामक पारी
उमेश यादव से पहले तेज़ गेंदबाज़ जवागल श्रीनाथ ने 10 अक्तूबर साल 1999 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ 45 रन देकर 6 विकेट अपने नाम किये थे.
उमेश यादव ने ये कामयाबी तब हासिल की जब दूसरे छोर से अपना टेस्ट करियर शुरू करने वाले शार्दुल ठाकुर महज एक ओवर और चार गेंद करने के बाद ही मांसपेशियों में खिचाव आने के बाद मैदान से बाहर चले गए.
इसके बाद भारतीय टीम बल्लेबाज़ी करने के लिए मैदान में उतरी.
पृथ्वी शॉ ने 11 चौकों और एक छक्के की मदद से 70 रन बनाकर वेस्ट इंडीज़ को दबाव में ला दिया.
पृथ्वी शॉ ने अपनी पारी की शुरूआत इस अंदाज़ में की जैसे उन्होंने पिछली पारी में समाप्त की थी.
अपने पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में उन्होंने 134 रनों की शतकीय पारी खेली थी. उस दौरान उन्होंने 14 चौके तो लगाए लेकिन कोई छक्का नही लगाया था. इस कमी को उन्होंने इस टेस्ट मैच में पूरा कर दिया, वो भी पहले ही ओवर में.
उनसे पहले साल 2000 में टेस्ट मैच के पहले ही ओवर में वीरेंद्र सहवाग ने ये कमाल किया था. दिलचस्प है कि आज उनकी तुलना भी वीरेंद्र सहवाग से ही की जा रही है.

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टेस्ट क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत
यहाँ तक कि क्रिकेट समीक्षक वीरेंद्र सहवाग की तरह की पृथ्वी शॉ की तकनीक में भी कमी तलाश रहे है.
अब अगर कोई बल्लेबाज़ अपने पहले टेस्ट मैच में 87.01 और दूसरे टेस्ट मैच में 132.07 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए तो ज़ाहिर है कोई तो तकनीक उसके पास होगी ही. और अगर कोई कमी है भी तो वह दूर हो सकती है.
वैसे भी वीरेंद्र सहवाग, के श्रीकांत, एडम गिलक्रिस्ट, मैथ्यू हैडन, गॉर्डन ग्रीनिज़, रॉय फैडरिक्स, ब्रैंडन मैक्कुलम और सनत जयसूर्या जैसे बल्लेबाज़ अपनी तकनीक से अधिक अपनी धुआंधार बल्लेबाज़ी के लिए जाने जाते रहे.
पृथ्वी शॉ की बल्लेबाज़ी को लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली का मानना है कि उनकी असली परीक्षा आगामी ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर होगी. वहां के उछाल लेते विकेट, अलग मौसम, दर्शकों का अनोखा समर्थन यानि सब कुछ अलग और जुदा.
वैसे कुछ और हो या ना हो लेकिन वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन हैदराबाद में काफ़ी संख्या में दर्शक भी नज़र आए.
हो सकता है वह पृथ्वी शॉ और कप्तान विराट कोहली की बल्लेबाज़ी देखने आए हो. जो भी हो यह टेस्ट क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत है ख़ासकर भारत के लिए.

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एक से बढ़कर एक स्ट्रोक
पृथ्वी शॉ के बाद जलवा दिखा दूसरे युवा बल्लेबाज़ ऋषभ पंत का. वो शनिवार को खेल ख़त्म होने तक 120 गेंदो पर 10 चौकों और दो छक्कों की मदद से 85 रन बनाकर नाबाद रहे.
टेस्ट क्रिकेट में लगातार तीसरे मैच में उनके बल्ले से पचास से ज़्यादा रन निकले हैं.
भारत ने दूसरे दिन की समाप्ति तक चार विकेट खोकर 308 रन बना लिए थे.
उनका साथ उपकप्तान अजिंक्य रहाणे 75 रन बनाकर दे रहे थे. उस दौरान वह 174 गेंदो का सामना कर चुके है. अनुभवी रहाणे और अपना पांचवा ही टेस्ट मैच खेल रहे ऋषभ पंत के स्ट्राइक रेट में बड़ा अंतर रहा.
ऋषभ पंत ने भी दिखा दिया है कि कप्तान के भरोसे पर वो भी खरा उतर सकते है.
पृथ्वी शॉ और ऋषभ पंत ने बेहद कम समय में ही अपनी जगह टीम में तो पक्की की ही है साथ ही पुराने धुरंधरों की वापसी भी मुश्किल भरी कर दी है.
दोनों के पास एक से बढ़कर एक स्ट्रोक है. कट, पुल, हुक और कवर से लेकर स्ट्रेट, ग्लांस, फ्लिक यानि क्रिकेट का हर शॉट. और सबसे बढ़कर बेफ्रिक अंदाज़. ऋषभ पंत में महेंद्र सिंह धोनी की तरह मैच फिनिशर की भूमिका निभाने की भी क्षमता है.
क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन मानते है कि धोनी से अब पहले जैसी उम्मीद करनी भी नही चाहिए. ऋषभ पंत को बस ठीक से संभाला जाए.

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