तो क्या ये ऑस्ट्रेलिया के लिए भारतीय टीम की तैयारी चल रही है?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
पिछले साल ये बात चली थी कि टेस्ट मैच को चार दिन का कर दिया जाए.
इसका कारण ये बताया गया था कि बहुत से टेस्ट मैच पाँचवें दिन तक पहुँच ही नहीं पाते तो क्यों न इस फ़ॉरमेट को ही छोटा कर दिया जाए.
ये चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है क्योंकि अब भारत और वेस्ट इंडीज़ के बीच राजकोट में खेला गया पहला टेस्ट मैच तीसरे ही दिन समाप्त हो गया.
ये पाँच दिवसीय टेस्ट मैचों का एक बेहद ख़राब उदाहरण है.
ये उनके लिए बेहद नुक़सानदायक है जो स्टेडियम के बाहर स्टॉल्स लगाते हैं और ब्रॉडकास्टर की भी दो दिन की कमाई मारी गई.
फिर जो क्रिकेट से जुड़े हुए लोग हैं उनके लिए भी दो दिन कम हो गए.

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जानकार कहते हैं कि रविवार को क्रिकेट दिखाने का सबसे अच्छा दिन माना जाता है. लेकिन भारतीय टीम का हालिया टेस्ट मैच तो रविवार तक पहुँचा ही नहीं.
क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं कि "सबसे बड़ी बात ये रही कि इस टेस्ट मैच का कोई स्तर ही नहीं था."
इन दिनों भारतीय टीम वेस्ट इंडीज़ टीम के साथ दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेल रही है. पहला मैच भारतीय टीम जीत चुकी है.
लेकिन खेल समीक्षकों के अनुसार ज़्यादा बड़ा सवाल ये है कि हाल ही में इंग्लैंड के हाथों पाँच टेस्ट मैचों की सिरीज़ 4-1 से हारने वाली भारतीय क्रिकेट टीम, क्या वेस्ट इंडीज़ के साथ खेलकर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होने वाली टेस्ट सिरीज़ की तैयारी कर रही है.
कितना होगा फ़ायदा
और क्या वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ खेलकर वाकई टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ कोई फ़ायदा मिलेगा?
भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि वो ऑस्ट्रेलियाई मैदानों पर ऑस्ट्रेलिया की टीम के ख़िलाफ़ आज तक कोई टेस्ट सिरीज़ नहीं जीत सके हैं.
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि ये सिरीज़ ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तैयारी के लिए तो नहीं है.

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वो कहते हैं कि अपने घर में वेस्ट इंडीज़ को हराना, कंगारुओं से ऑस्ट्रेलियाई मैदान में भिड़ने की तैयारी बिल्कुल नहीं हो सकती. वहाँ के हालात, मौसम और पिच, सभी एकदम अलग होते हैं.
वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम वेस्ट इंडीज़ से कहीं बेहतर है. भले ही भारत ने आज तक ऑस्ट्रेलिया में कोई टेस्ट सिरीज़ नहीं जीती है लेकिन अब ये कारनामा करने का भारत के पास एक अच्छा मौक़ा है.
पर क्या ये मौक़ा इंग्लैंड में नहीं था? जहाँ भारतीय टीम कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई.
घर में शेर, बाहर...
हालांकि इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दो टेस्ट मैच ऐसे भी थे जिनमें दोनों टीमों के बीच बेहद क़रीबी का मामला रहा था और भारत इसमें हार गया था.
लोकपल्ली कहते हैं, "घर में वेस्ट इंडीज़ तो क्या किसी भी टीम से खेलकर ऑस्ट्रेलिया से भिड़ने की तैयारी नहीं हो सकती. इसके लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया जाकर पहले दो या तीन अभ्यास मैच खेलने होंगे."

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तो क्या जो टीम वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ खेल रही है, क्या वही टीम ऑस्ट्रेलिया से टेस्ट सिरीज़ भी खेलेगी? और अगर कुछ बदलाव होने है तो वो बदलाव अभी क्यों नहीं हुए?
इसपर विजय लोकपल्ली का कहना है कि "इस टीम में अधिक बदलाव की ज़रूरत नहीं है. बल्लेबाज़ तो कहेंगे कि हम तो अपनी फ़ॉर्म को टेस्ट कर रहे हैं. तेज़ गेंदबाज़ इशांत शर्मा चोटिल हैं, भुवनेश्वर को आराम दिया गया है. तीनों स्पिनर आर अश्विन, रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव ऑस्ट्रेलिया जाएंगे ही."
"वहीं विकेट कीपर ऋषभ पंत का खेलना भी तय है क्योंकि ऋद्धिमान साहा शायद अभी भी पूरी तरह फ़िट नहीं हैं."
भारत के पूर्व ऑल-राउंडर मदन लाल भी इस मामले में विजय लोकपल्ली से सहमत दिखे.
उन्होंने कहा, "ईशांत शर्मा बेहद अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ हैं और ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर उन्होंने दमदार प्रदर्शन भी किया है."
सलामी जोड़ी को लेकर मदन लाल का मानना था कि मुरली विजय तकनीकी रूप से बेहद सक्षम खिलाड़ी हैं और शायद उन्हें कुछ और मौक़े मिलने चाहिए थे.
विजय लोकपल्ली भी मानते हैं कि ऐसा कोई विशेष खिलाड़ी नहीं है जो छूट रहा है. भारत ने ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए अपने खिलाड़ी चुन रखे हैं, वह दिमाग़ी रूप से तैयार हैं.
उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ियों को वहाँ के अनुरूप ढलने के लिए 15 दिन पहले जाना चाहिए.
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अब एक सवाल खड़ा होता है कि क्या मुरली विजय और शिखर धवन की टेस्ट टीम में वापसी मुश्किल है?
विजय लोकपल्ली के अनुसार मुरली विजय कह रहे हैं कि चयनकर्ताओँ ने उनसे कोई बात नहीं की. शिखर धवन ने तो ख़ैर कुछ कहा ही नहीं. वैसे ऑस्ट्रेलिया की पिचें शिखर धवन को भाती हैं. वो बदक़िस्मत रहे कि इंग्लैंड में वो रन नहीं बना सके. जबकि दुबई में एशिया कप में उन्होंने काफ़ी रन बनाए. उनके बारे में ये कहना ग़लत है कि वो लाल गेंद के मुक़ाबले सफेद गेंद से अच्छा खेलते हैं. वो टेस्ट मैच के खिलाड़ी नहीं हैं, ये भी ग़लत है.
बाउंसी विकेट पर मुक़ाबला
विजय लोकपल्ली को लगता है कि ऑस्ट्रेलिया के बाउंसी विकेट शिखर धवन के लिए बेहतर साबित होंगे क्योंकि वह कट और पुल शॉट शानदार खेलते हैं. मुरली विजय को दक्षिण अफ़्रीका और इंग्लैंड में पूरा मौक़ा दिया गया. पर वो नाकाम रहे. हालांकि उनके बाहर होने से कोई आश्चर्य नहीं हुआ. अब किस आधार पर उनकी वापसी हो, ये तो देखना पड़ेगा.
भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में 21 नवंबर से 25 नवंबर तक तीन टी-20 और उसके बाद 6 दिसंबर से चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेलेगी.
वहीं भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 12 जनवरी से तीन वनडे मैचों की सिरीज़ खेली जाएगी.

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विजय लोकपल्ली कहते हैं, "ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में के एल राहुल के साथ पृथ्वी शॉ को थोड़ा भरोसा देना होगा. पृथ्वी शॉ क्योंकि युवा हैं इसलिए टीम मैनेजमेंट ने उनसे बात भी की होगी कि अगर वो नाकाम भी होते हैं तो उन्हें कोई चिंता नहीं करनी चाहिए."
उन्होंने कहा, "ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि भारत को एक ज़बरदस्त बल्लेबाज़ मिला है. उनके पास तकनीक, शॉट्स और टैंपरामेंट तीनों हैं. अब मुरली विजय और शिखर धवन में से कौन टेस्ट टीम में होगा ये चयन समिति पर है."
पिछली बार साल 2014-15 में ऑस्ट्रेलिया में खेली गई चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ में भारत 2-0 से हारा था.
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