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हिना सिद्धू से मेरी मोहब्बत किसी फ़िल्म से कम नहीं: रौनक पंडित
- Author, सूर्यांशी पांडे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ऑस्ट्रेलिया के गोल्डकोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में हिना सिद्धू ने शूटिंग में सोने का तमगा अपने नाम किया.
25 मी. एयर पिस्टल में जैसे ही हिना सिद्धू ने गोल्ड मेडल जीता, वो पीछे मुडीं और अपने कोच और पति रौनक पंडित को गले लगा लिया. फिर रौनक पंडित ने उन्हें ख़ुशी से गोदी में उठा लिया.
इस पल को वहां खड़े फ़ोटोग्राफ़र्स ने ख़ूबसूरती से क़ैद किया तो हर किसी के मन में एक सवाल उठा- आख़िर इस रिश्ते की कहानी क्या है.
उस समय ये तस्वीर ख़ूब वायरल हुई थी.
तो बस, हमने रौनक पंडित और हिना सिद्धू को फ़ोन घुमाया और रौनक पंडित ने कहा - 'हाहाहाहा...हमारी कहानी किसी बॉलीवुड मसाला फ़िल्म से कम नहीं है.'
एक दूसरे से करते थे नफ़रत
2006 में रौनक पंडित अपने शूटिंग के करियर में शिखर पर थे. 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में समरेश जंग के साथ 25 मी. स्टैंडर्ड पिस्टल के टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता.
फिर उसी साल हुए एशियन गेम्स में 25 मी. स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में रजत पदक हासिल किया.
महाराष्ट्र के रौनक पंडित पुणे के बालेवाडी शूटिंग रेंज में ट्रेनिंग करते थे.
शूटिंग में पदक हासिल करके लौटे 21 साल के रौनक पंडित अपनी ही धुन में थे कि पुणे के बालेवाडी शूटिंग रेंज में अपने सपनों की गठरी लेकर आती हैं 17 साल की हिना सिद्धू.
शूटिंग में अपने निशाने में सटीक, तीखी और सपने को पूरे करने की ज़िद, कुछ इस अंदाज़ में रौनक पंडित ने हिना सिद्धू को पहली नज़र में समझा.
दोनों ही ज़िदी और नखरेल थे तो भला एक बार में बात कैसे बनती.
रौनक पंडित बताते हैं कि दोनों एक-दूसरे से नफ़रत करने लगे थे. हिना सिद्धू रौनक पंडित को देखना पसंद नहीं करती थीं तो रौनक पंडित भी कन्नी काटते थे.
रौनक पंडित कहते हैं 'क़रीब डेढ़ साल तक हमने एक-दूसरे से बात नहीं की'
विदेशी कोच की फ़ीस'ने बनाईबात!
रौनक पंडित बताते हैं कि अपनी तैयारियों को और पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक यूक्रेनियन कोच, अन्नाटोली को कोच के तौर पर रखने का सोचा.
लेकिन विदेशी कोच की फ़ीस अकेले भरना आसान नहीं था. तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना हिना सिद्धू से दोस्ती कर ली जाए और फ़ीस दो लोगों में बट भी जाएगी.
रौनक पंडित ने बीबीसी से से बताया कि 2009-10 में उनकी और हिना सिद्धू की दोस्ती हो गई और इसका सारा श्रेय उन्होंने यूक्रेनियन कोच की 'फ़ीस' को दिया!
घुटने के बल बैठकर किया इज़हार-ए-इश्क़
दोनों जब एक साथ एक कोच के अंदर सीखने लगे तो एक-दूसरे को जानने भी लगे. हिना सिद्धू और रौनक पंडित को एक-दूसरे में अपना अक्स दिखने लगा.
फिर ट्रेनिंग के बाद भी दोनों समय बिताने लगे. रौनक पंडित बताते हैं कि दोनों ने कभी भी एक-दूसरे से दिल की बात नहीं कही, लेकिन दिल की बातों को महसूस ज़रूर करते रहे.
फिर एक शाम, रौनक पंडित और हिना सिद्धू दिल्ली के एक मॉल में फ़िल्म देखने गए.
फ़िल्म देखने के बाद, जब एक रेस्टोरेंट में पहुंचे तो रौनक पंडित बताते हैं कि 'मुझे लगा कि इससे अच्छा मौक़ा नहीं होगा. बिना कुछ सोचे मैं घुटने के बल बैठ गया बिना कोई अंगूठी हाथ में लिए और हिना से दिल की बात कह दी'
हिना सिद्धू एकदम हैरान रह गईं और मुस्कुराने लगीं और फिर रौनक पंडित को हां कहा.
2012 लंदन ओलंपिक में हो जाता ब्रेककप लेकिन...
2010 में कॉमनवेल्थ में हिना सिद्धू ने 10 मी. एयर पिस्टल के टीम मुक़ाबले में गोल्ड मेडल जीता.
2011 के समय सभी शूटर्स 2012 लंदन ओलंपिक की तैयारियों में लगे थे. हिना सिद्धू को लगा कि वह रौनक पंडित से कोचिंग लेंगी.
उस समय रौनक पंडित भी अपने करियर से असंतुष्ट थे और उन्होंने सोचा कि हिना सिद्धू को मदद करना सही फ़ैसला होगा.
तो रौनक पंडित हिना सिद्धू के 2011 से कोच बन गए.
उस दौरान दोनों का एक रिश्ता निजी तौर पर शुरू ही हुआ था कि अब रौनक और हिना कोच और स्टूडेंट की भूमिका में थे.
ट्रेनिंग के टाइम दोनों का ध्यान केवल ट्रेनिंग पर होता था, लेकिन ट्रेनिंग के समय बहुत लड़ाई होती थी.
रौनक पंडित को लगा कि एक मनोचिकित्सक की भी ज़रुरत है जो खेल से जुड़ी मानसिक परिस्थितियों को समझे. तो उन्होंने हिना सिद्धू और अपने लिए कनाडा के एक प्रसिद्ध खेल मनोचिकित्सक को टीम में शामिल किया. फिर आया 2012 ओलंपिक.
हिना सिद्धू की मेहनत और ट्रेनिंग सब फल दे रही थी. हिना फ़ाइनल के लिए क्वॉलिफ़ाई कर ही जातीं कि प्रतिद्वंद्वी को सपोर्ट कर रही भीड़ की आवाज़ से उनका ध्यान भंग हो गया और वो फ़ाइनल तक नहीं पहुंच पाईं.
इस घटना ने हिना सिद्धू को अंदर से हिलाकर रख दिया. क़रीब दो महीनों तक उनको इसका मलाल रहा.
तब लगा कि दोनों का रिश्ता ख़त्म ना हो जाए. रौनक पंडित बीबीसी को बताते हैं कि हिना सिद्धू को लगने लगा कि हम दोनों बहुत लड़ते हैं, ये रिश्ता आगे नहीं बढ़ पाएगा.
लेकिन रौनक पंडित को भरोसा था और उन्होंने हिना सिद्धू को समय देने के लिए कहा.
उस दौरान कनाडा के खेल मनोचिकित्सक ने दोनों की सहायता की और समय के साथ सब ठीक होने लगा.
2013 में की शादी
अब दोनों टूर्नामेंट्स में एक टीम की तरह मज़बूत नज़र आने लगे और दोनों ने 2013 में शादी करने का फ़ैसला कर लिया.
शादी के बाद हिना सिद्धू बताती हैं कि 2014 उनके लिए सबसे बेहतरीन साल रहा. उस साल वह शूटिंग की दुनिया में पहले पायदान पर पहुंच गईं थी. ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय शूटर बनीं.
इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब बीबीसी ने हिना सिद्धू से बात की तो उन्होंने इस जीत का श्रेय रौनक पंडित को दिया जिन्होंने उनको 10 मी. एयर पिस्टल इवेंट से 25 मी. एयर पिस्टल में आने में मदद की.
लेकिन इस जीत का हीरो देखा जाए तो वो विश्वास है जो हिना सिद्धू और रौनक पंडित के बीच ना केवल एक कोच और स्टूडेंट की तौर पर है बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में भी साफ़ झलकता है.
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