क़तर में फ़ीफ़ा विश्व कप 2022 पर ख़तरे की घंटी

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- Author, डैन रोअन
- पदनाम, बीबीसी खेल संपादक
2022 का फ़ीफ़ा फुटबॉल विश्व कप क़तर में होना तय है, लेकिन एक गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक वहां जारी राजनीति संकट के कारण इसके भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
मैनेजमेंट कंसल्टंट कॉर्नरस्टोन ग्लोबल ने इस मामले में एक स्टडी की है. इसकी रिपोर्ट बीबीसी को मिली है. इस अध्ययन में गैस भंडार से संपन्न छोटे से देश क़तर और उसके पड़ोसियों के बीच जारी राजनयिक संकट का मूल्यांकन किया गया है.
इस अध्ययन के दस्तावेजों के मुताबिक कंस्ट्रक्शन कंपनियां 200 अरब डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर योजनाओं पर काम कर रही हैं और ये प्रोजेक्ट जोखिम से भरे हुए हैं.
दावा किया गया है, ''इस टूर्नामेंट से जुड़े भीतरी लोग और क्षेत्रीय विशेषज्ञों ने कहना शुरू कर दिया है कि क़तर 2022 के फ़ीफ़ा विश्व कप की मेजबानी करेगा, यह सच से काफ़ी दूर है.''

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क़तर ने रिपोर्ट को किया ख़ारिज
हालांकि क़तर 2022 सुप्रीम कमेटी फोर डिलीवरी एंड लेगसी ने अपने एक बयान में कहा है, ''मध्य-पूर्व में पहले विश्व कप को लेकर कोई संकट नहीं है. क़तर के ख़िलाफ़ जारी नाकेबंदी का असर विश्व कप की तैयारी पर नहीं पड़ेगा.'' इस कमेटी ने क़तर की मेजबानी पर शक करने वाली रिपोर्ट को भी कटघरे में खड़ा किया है.
2010 में 2022 के फ़ीफ़ा विश्व कप की मेजबानी क़तर को दी गई थी. गर्मी में ज़्यादा तापमान के कारण इसे जाड़े के मौसम में खेला जाना है. आयोजकों ने इसकी व्याख्या क्षेत्रीय एकता के प्रतीक के रूप में की है.
हालांकि इसी साल जून महीने में सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर से सारे राजनयिक और व्यापारिक संबंध ख़त्म करने की घोषणा की थी.
यह संबंध विच्छेद अब भी जारी है. इन देशों का कहना है कि क़तर आतंकवाद को बढ़ावा देकर मध्य-पूर्व को अस्थिर कर रहा है. क़तर ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है.
इन देशों ने क़तर के सामने कुछ शर्ते रखते हुए कहा था कि अगर वो इन शर्तों को मान लेता है तो नाकेबंदी ख़त्म कर दी जाएगी. हालांकि क़तर ने इन शर्तों को मानने से साफ़ इनकार कर दिया है.

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सऊदी अरब का क़तर से ज़मीनी संपर्क है. वहीं बाक़ी देशों ने क़तर से हवाई और समुद्री संपर्क ख़त्म कर दिया है.
कॉर्नरस्टोन ने अपने क्लाइंट्स से कहा है कि वो ज़मीनी हक़ीक़त बताएं. कॉर्नरस्टोन ने वहां की चुनौतियों के बारे में बताने के लिए कहा है. 'क्या फ़ीफ़ा विश्व कप 2022 संकट में है?' इसी टाइटल से जारी रिपोर्ट में कहा गया है- पश्चिम के राजनयिकों ने निजी तौर पर कहना शुरू कर दिया है कि तय कार्यक्रम के मुताबिक क़तर में फ़ीफ़ा विश्व कप होगा या नहीं ये उन्हें नहीं पता है.
इसकी कई वजहें बताई जा रही हैं. इनमें नीलामी और बुनियादी ढांचों से जुड़े विकास में भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, ''इस टूर्नामेंट की मेजबानी को लेकर क़तर भारी दबाव में है. इसकी वजह वर्तमान राजनीतिक संकट या फिर क़तर में एक विरोधी आंदोलन भड़कने की आशंका है.''

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क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है, ''इसका मतलब यह हुआ कि जो 2022 के फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के लिए काम कर रहे हैं या जो इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट चाहते हैं उन्हें पैसे नहीं मिलने का डर है. इसके विकल्प के तौर पर कोई अनुबंध के दूसरे तरीक़े दिख नहीं रहे हैं. अभी जिस तरह के संकट हैं उनसे साफ़ तौर पर लगता है कि क़तर में इस टूर्नामेंट का आयोजन नहीं हो पाएगा.
अगर अचानक से 2022 का फ़ीफ़ा विश्व कप क़तर में नहीं खेलने का फ़ैसला होता है तो इसकी तैयारी में लगे कॉन्ट्रैक्टर भारी संकट में फंस जाएंगे और इससे निकलना आसान नहीं होगा.
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ''क़तर में काम कर रहीं कंस्ट्रक्शन कंपनियों के सूत्रों ने बताया है कि कंपनियां विश्व कप 2022 के लिए काम कर रही हैं और अभी कोई हड़बड़ी जैसी स्थिति नहीं है. खाड़ी के पड़ोसी देशों के प्रतिबंधों के कारण वो पहले से ही परेशान हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक नाकेबंदी के कारण रसद काफ़ी महंगे हो गए हैं और साथ ही पड़ोसी देशों की सीमाओं पर तनाव के कारण भी काफ़ी दिक़्क़तें हो रही हैं. पांच प्रोजेक्ट के मैनेजरों का एक ग्रुप कई तरह की छोटी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम कर रही हैं. सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्टर्स विश्व कप के लिए काम कर रहे हैं. इनका कहना है कि जुलाई 2017 से इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रगति से जुड़े सामान 20 से 25 फ़ीसदी महंगे हो गए हैं.
कॉर्नरस्टोन का कहना है, ''प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि क़तर 2022 सुप्रीम कमेटी से कई सदस्यों ने इस्तीफ़े की धमकी दी है. इनका कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के बढ़ते हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण निराशा बढ़ रही है.
क़तर की प्रतिक्रिया
हालांकि इस रिपोर्ट को सुप्रीम कमेटी फोर डिलिवरी एंड लेगसी ने ख़ारिज कर दिया है. एक बयान में बीबीसी से कहा कि पूरी रिपोर्ट मीडिया और गुमनाम सूत्रों की रिपोर्ट पर आधारित है. क़तर ने साफ़ कर दिया कि फ़ीफ़ा विश्व कप के आयोजन को लेकर कोई संकट नहीं है.












