'एक मुहाजिर का कप्तान बनना कुछ पाकिस्तानी पचा नहीं पा रहे'

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
चैंपियंस ट्रॉफ़ी में रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहे मैच का रोमांच अपने चरम पर है और दोनों ही देशों के लोग अपनी-अपनी टीमों की जीत की दुआ कर रहे हैं.
लेकिन पाकिस्तानी टीम के कप्तान सरफ़राज़ के कुछ रिश्तेदार भारत की जीत की दुआ कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के इटावा में रह रहे सरफ़राज़ अहमद के मामू महबूब हसन कहते हैं कि उनकी दुआएं सरफ़राज के साथ ज़रूर हैं लेकिन जीत वो अपने देश की ही देखना चाहते हैं.

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मूल रूप से प्रतापगढ़ ज़िले में कुंडा के रहने वाले महबूब हसन इटावा कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज में हेड क्लर्क के पद पर काम करते हैं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की जीत इसलिए भी सुनिश्चित-सी लग रही है क्योंकि इस समय टीम बेहद संतुलित है और सभी खिलाड़ी बहुत अच्छा खेल रहे हैं.
चार जून के लीग मैच में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह हराया था.
इस हार के बाद पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों, ख़ासकर कप्तान सरफ़राज़ अहमद पर पाकिस्तानी सोशल मीडिया में कई तरह के आरोप लगाए गए. यहां तक कि कई पूर्व खिलाड़ियों ने भी सरफ़राज़ की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे.

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महबूब हसन कहते हैं कि पाकिस्तान में सरफ़राज़ का टीम का कप्तान बनना वहां के कई लोगों को पच नहीं रहा है, भले ही वो अपनी योग्यता से कप्तान बने हैं.
वो कहते हैं, "पाकिस्तान में मुहाजिरों की हालत किसी से छिपी नहीं है. कई पूर्व खिलाड़ी इस बात को हज़म नहीं कर पा रहे हैं कि एक मुहाजिर कैसे कप्तान बन गया? इसीलिए कुछ लोग अनाप-शनाप आरोप लगा रहे हैं."
महबूब हसन बताते हैं कि वो ख़ुद भी कराची गए हैं और इन चीजों को उन्होंने महसूस किया है.
उनका आरोप है- "इस बात को वहां के मुहाजिर लोग भी जानते हैं लेकिन वो कुछ कर नहीं सकते. पाकिस्तान में उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है."
हालांकि ये तथ्य है कि पाकिस्तान में मुहाजिर समुदाय के लोग कई अहम पदों पर रह चुके हैं और फौज के जनरल तक बन चुके हैं, जैसे जनरल परवेज़ मुशर्रफ़.

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महबूब हसन बताते हैं कि सरफ़राज़ और उनके माता-पिता यहां आते रहते हैं और वो लोग भी पाकिस्तान जाते हैं.
हसन बताते हैं कि सरफ़राज़ से उनकी आख़िरी मुलाकात साल 2015 में उस समय हुई थी जब वो सरफराज की शादी में पाकिस्तान गए थे.
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