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चैंपियंस ट्रॉफी: टीम इंडिया की 5 विराट चुनौतियां
डिफेंडिंग चैंपियन भारत के सामने चैंपियन्स ट्रॉफी में पहली हार के साथ ही मुश्किल हालात बन गए हैं.
श्रीलंका के ख़िलाफ गुरुवार के मैच में भारतीय टीम के बल्लेबाज़ उम्मीद पर ख़रे उतरे लेकिन गेंदबाज़ 321 रन के बड़े स्कोर का बचाव भी नहीं कर सके.
श्रीलंका ने 8 गेंद बाकी रहते भारत को 7 विकेट से हरा दिया.
भारत का अगला मुक़ाबला रविवार को दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ होगा. भारत के लिए इस मैच में 'करो या मरो' की स्थिति होगी.
सेमी फ़ाइनल में पहुंचने के लिए भारत को दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ हर हाल में जीत हासिल करनी होगी.
वनडे के रिकॉर्ड के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका का पलड़ा भारी है. दोनों टीमों के बीच हुए कुल 76 वनडे मुक़ाबलों में दक्षिण अफ्रीका ने 45 और भारत ने 28 में जीत हासिल की है.
लेकिन चैंपियन्स ट्रॉफी में भारत ने दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ खेले तीनों मैच जीते हैं.
इस रिकॉर्ड को कायम करने के लिए भारत को 5 चुनौतियों से निपटना होगा.
1-मनोबल पर चोट
चैंपियन्स ट्रॉफी के पहले मैच में पाकिस्तान के ख़िलाफ मिली जोरदार जीत से भारतीय टीम के हौसले बुलंद थे.
लेकिन श्रीलंका के खिलाफ मैच में भारतीय टीम की कमजोरियां खुलकर सामने आ गईं.
अनुभव के पैमाने पर कमजोर श्रीलंका टीम के बल्लेबाज़ों ने जाहिर कर दिया कि भारत के पास जीत के लिए ज्यादा प्लान नहीं हैं. अगर टीम इंडिया पर दबाब बनाया जाए तो वो बिखर सकती है.
भारतीय टीम के सामने न सिर्फ हार के झटके से उबरने की चुनौती है बल्कि उसे अपनी रणनीति पर भी काम करने की जरुरत है.
टूर्नामेंट का फॉर्मेट ऐसा है कि एक और हार भारत को बाहर का रास्ता दिखा देगी.
2-कैसे सुधरेगी गेंदबाज़ी ?
वार्म अप मैच और पाकिस्तान के ख़िलाफ मुक़ाबले में टीम की ताकत नज़र आ रही गेंदबाज़ी श्रीलंका के खिलाफ कमजोर कड़ी साबित हुई.
भुवनेश्वर कुमार के अलावा सभी गेंदबाज़ श्रीलंका के बल्लेबाज़ों के सामने बेबस नज़र आए.
श्रीलंका ने वनडे में पहली बार 322 रन बनाकर जीत दर्ज़ की.
भारतीय गेंदबाज़ी की सबसे बड़ी कमी साझेदारी न तोड़ पाना रहा.
कप्तान विराट कोहली और कोच अनिल कुंबले को रविवार के मुक़ाबले के पहले गेंदबाज़ों को लय में लाने का फॉर्मूला तलाशना होगा.
3-क्या टीम में होगा बदलाव?
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों पर ही श्रीलंका के खिलाफ मैच में भी भरोसा दिखाया.
अनुभवी ऑफ स्पिनर आर अश्विन को टीम में जगह नहीं मिल सकी.
श्रीलंका के खिलाफ रविंद्र जडेजा और दूसरे गेंदबाज़ो की नाकामी के बाद आर अश्विन को प्लेइंग इलेवन में जगह देने की मांग हो रही है.
हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अश्विन का रिकॉर्ड भी खास नहीं है. अश्विन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ छह वनडे मैचों में सिर्फ पांच विकेट लिए हैं.
सवाल ये भी है कि तेज़ गेंदबाज़ों की मददगार मानी जाने वाली इंग्लैंड की पिचों पर क्या भारतीय टीम दो स्पिनर खिलाना चाहेगी.
4-विवाद का असर तो नहीं?
भारतीय टीम चैंपियन्स ट्रॉ़फी ख़ेलने पहुंची तो उसके सामने कई मुश्किल सवाल थे.
कोच कुंबले और कप्तान विराट कोहली के बीच अनबन की ख़बर थी. सुप्रीम कोर्ट की ओर से बीसीसीआई प्रशासक बनाए गए रामचंद्र गुहा ने इस्तीफा देते हुए स्टार सिस्टम पर सवाल उठाए थे. पाकिस्तान के ख़िलाफ क्रिकेट खेलने को लेकर भी कप्तान से सवाल पूछे गए.
हालांकि, पहले मैच में इस विवाद का असर नहीं दिखा लेकिन श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान जब भारतीय टीम के गेंदबाज़ लगातार बेअसर होते रहे तो बार-बार ये सवाल उठा कि क्या डिफेंडिंग चैंपियन टीम के पास विरोधी को रोकने के विकल्पों की कमी है और अगर ऐसा है तो इसकी वजह क्या है?
फिसले कैच तो फिसलेगी ट्रॉफी
चुनौती फ़ील्डिंग दुरुस्त करने की भी है. श्रीलंका के खिलाफ मैच में भारतीय खिलाड़ियों की ग्राउंड फील्डिंग ठीक-ठाक रही लेकिन कई खिलाड़ियों ने अहम मौके गंवा दिए.
हार्दिक पांड्या ने अपनी ही गेंद पर कुसल मेंडिस का कैच टपका दिया. भारतीय टीम को ये कैच छोड़ना काफी महंगा पड़ा. भारतीय टीम ने विरोधी बल्लेबाज़ों को रन आउट करने के मौके भी गंवाए.
पाकिस्तान के खिलाफ मैच में भी भारतीय टीम ने कई कैच टपकाए थे.
दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ ऐसी भूल भारी पड़ सकती है.
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