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आगे की डगर आसान नहीं भारतीय क्रिकेट की
सुप्रीम कोर्ट ने BCCI अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को हटा दिया है. बीसीसीआई के वरिष्ठतम उपाध्यक्ष को अध्यक्ष और सहायक सचिव को सचिव की ज़िम्मेदारी संभालने का हुक़्म सुनाया गया.
बीसीसीआई के सभी अधिकारियों और राज्य क्रिकेट एसोसिएशनों को लोढ़ा समिति की सिफ़ारिशें मानने के लिए अंडरटेकिंग देने को कहा गया. जो लोग तय सीमा से ज़्यादा वक़्त गुज़ार चुके हैं, उन्हें हटने के लिए कहा गया.
अदालत के इन सभी आदेशों पर अमल भी शुरू हो गया है. लेकिन क्या दुनिया के सबसे ताक़तवर और रईस क्रिकेट बोर्ड ने पिछले बीस साल में जो सफ़र तय किया है, वो आगे जारी रह सकेगा?
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर अनुराग ठाकुर ने प्रतिक्रिया दी, तो उसमें तंज़ भी छिपा था.
अनुराग ने सोशल मीडिया के जारी बयान में कहा, ''अगर माननीय सुप्रीम कोर्ट के जजों को लगता है कि BCCI रिटायर हो चुके जजों के तहत अच्छा काम करेगा, तो मेरी शुभकामनाएं हैं.''
ज़ाहिर है, इस कटाक्ष के पीछे बोर्ड का रुतबा और पैसे की ताक़त थी. और कमाई में वाक़ई क्रिकेट बोर्ड ने झंडे गाड़े हैं.
भारत में क्रिकेट को लेकर दीवानगी कुछ इस क़दर है कि लाख दावों और कोशिशों के बावजूद पैसा कमाने के मामले में दूसरा कोई खेल आज गेंद और बल्ले का मुक़ाबला नहीं कर सकता.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की सालाना रिपोर्ट भी यही इशारा करती है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पहले से रईस था, लेकिन इंडियन प्रीमियर लीग ने उसके ख़ज़ाने में चार चांद लगा दिए.
साल 2016 में नौ सीज़न पूरा कर चुका ये टूर्नामेंट क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा ब्रांड बताया जाता है. साल 2015 में वैल्यूएशन अप्रेज़ल फ़र्म डफ़ एंड फ़ेल्प्स ने अनुमान लगाया था कि आईपीएल ब्रांड 27,000 करोड़ रुपए पहुंच गया था.
साल 2015 में अकेले आईपीएल से ग्रॉस मीडिया राइट्स और फ़्रेंचाइज़ी कंसिडरेशन के रूप में 1069.75 करोड़ रुपए कमाए थे.
टूर्नामेंट हो या ना हो, बोर्ड का खज़ाना हमेशा भरता रहा. साल 2015 में चैम्पियंस लीग टी20 टूर्नामेंट ख़त्म कर दिया गया था और उसकी एवज़ में बोर्ड को 1607.58 करोड़ रुपए मिले.
बीसीसीआई के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से होने वाली कमाई पिछले साल 388.80 करोड़ रुपए से बढ़कर 2015-16 में 648 करोड़ रुपए पहुंच गई.
जानकार भी मान रहे हैं कि बोर्ड में बदलाव और मौजूदा अधिकारियों की जगह खिलाड़ियों की तैनाती से कामयाबी मिलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है.
जो लोग हटाए गए हैं और उनसे पहले के अधिकारियों ने BCCI को जिस मुक़ाम तक पहुंचाया है, क्या आगे वो जारी रह पाएगा. इसके जवाब में जाने-माने खेल पत्रकार अयाज़ मेमन ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, ''मुझे नहीं लगता कि इसकी कोई गारंटी दे सकता है. दुनिया भर में खेल बोर्ड में दिग्गज खिलाड़ी आते रहे हैं, लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं कि वो सफ़ल रहते हैं.''
मेमन ने कहा, ''कोशिश है कि अगर आप इतना बड़ा बोर्ड चला रहे हैं, तो कुछ एक्सपर्ट वैल्यू होनी चाहिए. जो गेम खेले हैं, जो गेम समझते हैं, वो ऐसा कर सकते हैं. लेकिन अगर आप ये सोचें कि हर बोर्ड में खिलाड़ी ही अध्यक्ष बन जाए और वो उसे कामयाबी से साथ चला भी लें, ये संभव नहीं है. क्योंकि खेलने और एडमिनिस्ट्रेशन में काफ़ी फ़र्क होता है.''
उन्होंने कहा, ''ये सही है कि पिछले कई सालों के दौरान BCCI को कामयाबी तक पहुंचाया गया. गलतियां भी हुईं, लेकिन अगर इन ख़ामियों पर पहले ध्यान दिया होता और सही वक़्त पर इनका निपटारा हो गया होता, तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता.''
बीसीसीआई का पिछला बीस साल का सफ़र हैरतअंगेज़ रहा है. साल 1987 में क्रिकेट वर्ल्ड कप पहली मर्तबा भारतीय उपमहाद्वीप आया और टेलीविज़न डील का दौर शुरू हुआ.
क्रिकेट के दीवानों के जुनून को पैसा बनाने के फ़ॉर्मूले में बदला गया. रंगीन क्रिकेट अब वनडे से टी20 तक आ पहुंचा है, लेकिन कानूनी चाबुक के बाद दिग्गजों की रवानगी क्या भारतीय क्रिकेट पर कोई उल्टा असर डालेगी, वक़्त बताएगा.