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जयंत- पिता और कोच ने बताए कामयाबी के राज़
- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में 26 साल के जयंत यादव ने इतिहास बना दिया. टेस्ट क्रिकेट वह भारत की ओर से नंबर नौ पर बल्लेबाज़ी के तौर पर शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ हैं.
टीम इंडिया में बतौर ऑफ़ स्पिनर शामिल किए गए जयंत ने अपनी पहली ही सिरीज़ में दिखाया है कि उनमें ऑलराउंडर बनने की संभावना मौजूद है.
लेकिन शतकीय पारी खेलने के बाद भी उन्हें मालूम है कि लक्ष्य अभी काफ़ी दूर है,
जयंत ने कहा, "मैंने रणजी करियर का पहला दोहरा शतक भी नंबर नौ बल्लेबाज़ के तौर पर बनाया था, पहला टेस्ट शतक भी नंबर नौ बल्लेबाज़ के तौर पर आया है. मैं नंबर नौ बल्लेबाज़ बनकर ख़ुश हूं."
महज तीन टेस्ट पुराने इस क्रिकेटर में विश्लेषक वो तमाम ख़ूबियां देख रहे हैं जो किसी उभरते स्टार की निशानी मानी जाती है. एक ऐसा क्रिकेटर जो वक्त पड़ने पर विकेट झटकना जानता है, जिसे बल्ले से खूंटा गाड़ना आता हो और फ़ील्डिंग में रन बचाने में महारथ हो.
जयंत को क्रिकेट विरासत में मिली है. उनके पिता जय सिंह दिल्ली में क्लब स्तर के अच्छे क्रिकेटर रहे हैं.
बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज़ जय सिंह हरियाणा की ओर से अंडर-19 और अंडर-21 टीम की ओर से ख़ुद खेल चुके हैं. बाद में वे एयर इंडिया की टीम में शामिल हुए और टीम मैनेजर भी रहे.
जय सिंह ने जो सपना ख़ुद देखा था, जयंत ने उसे मंजिल तक पहुंचा दिया है. ज़ाहिर है एक पिता के तौर पर वे गर्व से भरे हैं.
टीम इंडिया का उभरता सितारा
जयंत का परिवार दिल्ली के वसंत विहार में रहता था. पढ़ाई-लिखाई दिल्ली पब्लिक स्कूल, वसंतकुंज से शुरू हुई, लेकिन क्रिकेट की कोचिंग के लिए पिता उन्हें हरबक्श स्टेडियम में कोचिंग देने वाले आरपी शर्मा के पास ले गए.
आठ साल की उम्र जब पहली बार आरपी शर्मा ने जयंत को देखा तो उन्हें यही लगा कि क्रिकेट से पहले तो इस दुबले पतले लड़के की फ़िटनेस पर ध्यान देना होगा.
एक साल बाद ही मां की मौत विमान दुर्घटना में हो गई. लेकिन इन मुश्किलों से उबरते हुए जयंत, वहां तक पहुंचे हैं जहां से उन्हें टीम का नया सुपर स्टार माना जा रहा है.
उनके इस सफ़र के बारे में बीबीसी ने उनके पिता, पहले कोच और उनकी प्रतिभा को निखारने वाले कोच से भी बात की. जयंत को जानने वालों से जानिए उनकी कामयाबी के राज़.
जय सिंह, जयंत यादव के पिता
एक पिता के तौर पर मैं उसे कामयाब होता देख कर ख़ुश हूं. उसे टीवी पर मैंने शतक बनाते देखा. बहुत ख़ुशी हुई.
जब तक अच्छा करेगा तब तक आगे बढ़ेगा. खेल में लगातार अच्छा करते रहना होता है. ऑफ़ स्पिनर तो है ही, वह बल्लेबाज़ी भी अच्छा करता है.
उसके यहां तक पहुंचाने में उसके कोच के अलावा हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन ने काफ़ी मदद की. 15 साल का जब था, तब मैं उसे हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन के ज़िम्मे छोड़ आया था.
उन लोगों ने उसको मौका दिया, उसकी प्रतिभा को निखारा. अब वह जैसा है, दुनिया उसे देख रही है.
आरपी शर्मा, जयंत के पहले कोच
आठ साल की उम्र में मेरे पास जयंत था. काफ़ी दुबला पतला था तो फ़िटनेस पर काफ़ी दिनों तक ध्यान दिया. उसके पिता स्पिनर थे, तो वह इसे स्पिनर ही बनाना चाहते थे.
नौ-साढ़े नौ साल के बाद से मैंने इन्हें ऑफ़ स्पिन सिखाना शुरू किया. शुरुआती दौर में जयंत काफ़ी तेज़ी से ऑफ़ ब्रेक की गेंदबाज़ी करता था.
उनकी बल्लेबाज़ी पर तब हम काम करने के लिए कहते थे, तब इसका ध्यान गेंदबाज़ी पर ज़्यादा था. लेकिन फ़्लाइट पर ध्यान नहीं देता था. 15 साल की उम्र तक यह हमारे पास कोचिंग में रहा.
बाद में हरियाणा चला गया तो वहां उसने ख़ुद को काफ़ी इंप्रूव किया. उसने अपनी गेंदों में फ़्लाइट को शामिल किया. बैटिंग में तो उसने कमाल ही कर दिया है.
रणजी क्रिकेट में दोहरा शतक बना चुका है और अब टेस्ट क्रिकेट में शतक.
पहला कोच हूं तो जब तब जयंत दिल्ली में मिलता है या बात होती है तो क्रिकेट की बारीकियों पर बात होती रहती है.
विजय यादव, पूर्व क्रिकेटर और कोच, हरियाणा रणजी टीम
दो साल तक मैं हरियाणा की अंडर-19 टीम का कोच था, तब मेरी नज़र जयंत पर पड़ी थी. 2007 की बात है. लंबा था, तो ऑफ़ स्पिन के तौर पर प्रभावी गेंदबाज़ था.
अगले साल, अंडर-19 में मुंबई की टीम से मुक़ाबला था. बेंगलुरु में तब मैंने इसे नेट पर बैटिंग करते देखा. मुंबई को लीड हासिल हो गई थी, तो दूसरी पारी में मैंने इसे कहा कि तू ओपनिंग करेगा आज. जयंत ने कहा कि, रन बनाकर दूंगा सर. मैंने भी भेज दिया, इसने पचास रन बना दिए.
इसके बाद से मेरा भरोसा हो गया कि ये तो अच्छा बल्लेबाज़ निकलेगा. आम गेंदबाज़ों की तरह उठाकर शाट्स खेलने वाला बल्लेबाज़ नहीं है जयंत.
पूरी तरह तकनीकी बल्लेबाज़ की तरह बल्लेबाज़ी करता है. जल्दी आउट होने वाला बल्लेबाज़ नहीं है. किसी भी कप्तान के लिए जयंत एक कंप्लीट पैकेज हैं, जो भरोसे से रन बना सकता है, विकेट ले सकता है, फ़ील्डिंग भी शानदार करता है.
हालांकि टेस्ट क्रिकेट में क़ामयाब होने के लिए जयंत को अपनी गेंदबाज़ी में वेरिएशन लाना होगा. वो सीख भी रहा है. अश्विन के साथ खेलने का फ़ायदा उसे मिल रहा है. अश्विन के पास काफ़ी वेरिएशन है तो जयंत लकी है कि उसे सीखने का मौक़ा मिलेगा.
अगर वह ऐसा कर लेता है तो वह टीम इंडिया के लिए हर फॉर्मेट में फ़िट बैठेगा.
क्रिकेट में उतार चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन उनमें इंटरनेशनल क्रिकेट में टिके रहने का दमखम और कौशल दोनों मौजूद है.
जयंत के बारे में क्रिकेट के अलावा एक और बात ख़ास है, वह जब क्रिकेट नहीं खेल रहा होता है, वह आपको पढ़ता हुआ मिलेगा.
हर तरह की किताबों में दिलचस्पी रखता है. पढ़ा लिखा क्रिकेटर है, उत्तर भारत में ऐसे क्रिकेटर कम मिलते हैं. लेकिन जयंत अपवाद है, एक थिंकिंग क्रिकेटर टाइप.
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